Latest Updates
-
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं
बाजरा या रागी के स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ
बाजरा या रागी सामान्यतः दक्षिण भारत के रसोईंघरों में नियमित रूप से प्रयोग किया जाता है। वास्तव में यह दक्षिण भारत के कई गावों का प्रमुख भोजन है। रागी कैल्शियम, लौह, प्रोटीन, रेशे और अन्य खनिजों का समृद्ध स्रोत है। इस अनाज में वसा की मात्रा कम होती है और यह मुख्यतः असंतृप्त वसा होता है। यह पचने में आसान होता है और ग्लूटिन नहीं होता, इसलिये जो लोग ग्लूटिन के प्रति संवेदनशील होते हैं वे बाजरे को आसानी से प्रयोग कर सकते हैं।
रागी को सबसे अधिक पोषण वाले अनाजों में से एक माना जाता है। रागी एक अत्यधिक पोषणयुक्त अनाज है और अच्छे स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिये लाभदायक है। हलाँकि इसके अधिक मात्रा में सेवन से शरीर में ऑक्सैलिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिये वृक्क में पथरी वाले मरीजों को इसकी सलाह नहीं दी जाती।

मोटापा कम करने के लिये रागी
रागी में एक अमीनो अम्ल ट्रिप्टोफैन होता है जिससे भूख कम लगती है और भार को नियन्त्रित करने में सहायक होता है। रागी धीमी दर से पचता है इसलिये अतिरिक्त कैलोरी ग्रहण करने से रोकता है। रागी में रेशे होने के कारण भी पेट भरा होने का अहसास होता है इसलिये अतिरिक्त भोजन की खपत को नियन्त्रित करता है।

हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये रागी
रागी कैल्शियम के मामले में समृद्ध होता है इसलिये हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। यह बढ़ते बच्चों और वृद्ध हो रहे लोगों के लिये कैल्शियम का सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक स्रोत है।

मधुमेह के लिये रागी
बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक होते हैं। मधुमेह की स्थिति में यह रक्त में शर्करा की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।

रक्त में कोलेस्ट्रॉल की कमी के लिये रागी
इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो यकृत से अतिरिक्त वसा को हटा कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं।

खून की कमी के लिये रागी
रागी लौह का बहुत अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। रागी की खपत से खून की कमी की स्थिति बेहतर होती है।

शान्ति के लिये रागी
रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। यह उत्सुक्ता, अवसाद और नींद न आने की स्थितियों में फायदेमन्द होता है। रागी माइग्रेन के लिये भी लाभदायक है।

प्रोटीन या अमीनो अम्ल के लिये रागी
शरीर की सामान्य क्रियाशीलता तथा मरम्मत के लिये आवश्यक अमीनो अम्ल के मामले में रागी काफी धनी है। यह शरीर में नाइट्रोजन सन्तुलन के लिये भी सहायक है।

अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिये रागी
यदि रागी का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है।

उच्च रक्त चाप को ठीक करता है
उच्च रक्तचाप, यकृत रोगों, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।



Click it and Unblock the Notifications
