Latest Updates
-
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता
आयुर्वेद के अनुसार खाना हजम करना है तो जरुर खाएं ये 7 मसाले
आयुर्वेद के अनुसार अगर भोजन को संतुलित कर के खाया जाए, तो शरीर के सभी दोषों से मुक्ती मिल सकती है। जिनमें से मसाले का प्रयोग किचन में करना आवश्यक होता है और इससे आपका हाजमा एक दम ठीक हो सकता है।
Jabong Happy hour sale- Flat 50% +extra 15% off with Promo code Click to Shop!
आयुर्वेद में रोजमर्रा से जुड़ी हर चीजों के बारे में निर्दश दिये गए हैं, जैसे मौसम बदलने पर क्या खाएं औ क्या नहीं, पेट को दुरूस्त रखने के लिये किन मसालों का चयन करें या फिर नींद कितनी लें, जिससे हमारा स्वास्थ्य चंगा रहे और बीमारियां हमारी जिंदगी से दूर रहें।
आयुर्वेद, पांच तत्वों के मेटाफिजिक्स पर आधारित है, पृथ्वी, पानी (जल), आग (अग्नि), हवा (वायु) और आकाश या अंतरिक्ष। आयुर्वेद, तीन मौलिक ऊर्जाओं या दोषों: वात, पित्त और कफ के संतुलन पर जोर देता है।
आयुर्वेद के अनुसार शारीरिक बीमारियां तभी होंगी जब आपका पाचन खराब होगा। अच्छी प्रकार से भोजन हजम होने का यह मतलब होता है कि शरीर ने भोजन से पूरा पोषण ले लिया है और ऊर्जा में बदल दिया है।
अब आइये हम जानते हैं कि अच्छे पाचन क्रिया के लिये हमें अपने भोजन में किन-किन मसालों का प्रयोग करना चाहिये तथा वे मसाले किन दोष वाले व्यक्तियों के लिये अच्छा होगा।

1. काली मिर्च
वात और कफ दोष वालों के लिये अच्छी
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: जुकाम, फ्लू, खांसी, गले में खराश, बुखार, पेट की शुद्धी, वसा और मोटापा को हज़म करने, चयापचय, बलगम, साइनस, अग्नि, मिरगी के दौरे को ठीक करती है। इसे अगर शहद के साथ सुबह लिया जाए तो यह कफ दोष को ठीक करती है।

2. जीरा
वात, पित्त और कफ दोष वालों के लिये अच्छी
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: यह ब्रेड को हजम करता है, गैस, हाजमा, पेट दर्द, भारी भोजन या ज्यादा खा लेने पर जीरा खाना लाभकारी होता है।

3. इलायची
वात, पित्त और कफ दोष वालों के लिये अच्छी
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: यह पोषक तत्वों का अवशोषण करती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, जुकाम, खांसी, पेट की शिकायतों, गला बैठने, अपच, फेफड़े और पेट में कफ को कम करती है, दिमाग को उत्तेजित करती है, दूध के साथ लेने पर बलगम खतम करती है, पाचन, उल्टी, सिर दर्द, डकार, दस्त, मतली, एसिड बनने से रोकने आदि में यह मददगार है

4. धनिया
वात, पित्त और कफ दोष वालों के लिये अच्छी
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: पेट फूलना, गठिया, नसों का दर्द, अपच, उल्टी, पेट के रोगों, कफ, कंजेक्टिवाइटिस, आंतरिक गर्मी और प्यास, त्वचा/दाने की समस्या, मूत्रमार्ग में जलन, गले में खराश, एलर्जी, बुखार, पित्त दोष, स्किन रैश और बवासीर आदि बीमारियों में लाभदायक। साथ ही गर्भ आहार जैसे, अंडा या मिर्च आदि को बैलेंस करने के लिये धनिया का प्रयोग करें।

5. सौंफ
वात, पित्त और कफ दोष वालों के लिये अच्छा
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: पेट दर्द (गैस या अपच), मासिक धर्म ऐंठन, हर्निया, दस्त, पेट का दर्द, उल्टी, मतली, भूख न लगना, खांसी, सूखी खांसी, वीर्य को बढ़ावा देता है, दृष्टि बढ़ जाती है, अग्नि बढ़ाए, पेशाब आने में परेशानी या जलन को ठीक करे, बच्चों और बुजुर्बों का पाचन ठीक रखे, मासिक धर्म नियमित करे, स्तन के दूध के प्रवाह को बढ़ाने में मददगार।

6. मेथी
वात, पित्त और कफ दोष वालों के लिये अच्छा
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: दीर्घायु, एलर्जी, गठिया, त्वचा, कायाकल्प, मधुमेह, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, फ्लू, पुरानी खांसी, पेचिश, अपच, स्वास्थ्य लाभ, सूजन, दांत दर्द, साइटिका, नसों की दुर्बलता, आदि में लाभदायक।
सावधानी: गर्भावस्था में इसे ज्यादा मात्रा में ना खाएं

7. हल्दी
हर तरह के दोषों के लिये लाभगारी
किन स्थितियों के लिए सर्वश्रेष्ठ: एनीमिया, गठिया, रक्त शोधक, परिसंचरण, खांसी, मधुमेह, कीड़े, पीलिया, आंख की समस्याओं, बुखार, गैस, बवासीर, सूजन, अपच, नियमित चयापचय, बलगम राहत, प्रोटीन को पचाने, त्वचा रोग, फोड़ा, मूत्र रोग, घाव और खरोंच पर मरहम लगाने के लिये अच्छी है।



Click it and Unblock the Notifications
