Latest Updates
-
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा -
Bank Holidays October 2026: अक्टूबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
Pitru Paksha 2026 Food Rules: पितृपक्ष में क्या खाएं और क्या न खाएं? जानें खानपान से जुड़े जरूरी नियम
ये हैं काली हल्दी खाने के फायदे, आजमाएं और खुद जान जाएं
इस धरती पर प्रकृति ने जो कुछ भी बनाया है, वह बेवजह नहीं है। बहुत सी ऐसी वस्तुएं हैं जिनके बारे में हमें अभी भी जानना बाकी हैं। पीले रंग की हल्दी आसानी से कहीं भी मिल जाती है लेकिन आपने कभी काली हल्दी के बारे में देखा या सुना है? काली हल्दी को पीली हल्दी से ज्यादा फायदेमंद और गुणकारी माना जाता है। काली हल्दी बहुत दुर्लभ मात्रा में पाई और देखी जाती है। काली हल्दी दिखने में अंदर से हल्के काले रंग की होती है व उसका पौधा केली के समान होता है।
काली हल्दी मजबूत एंटीबायोटिक गुणों के साथ चिकित्सा में जडी़ - बूटी के रूप में उपयोग की जाती हैं। इसका प्रयोग घाव, मोच, त्वचा, पाचन तथा लीवर की समस्याओं के निराकरण के लिए किया जाता है । यह शाक कोलस्ट्राँल को कम करने में मदद करती है।

चीनी चिकित्सा में कैंसर के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है। इसमें सुंगधित वाष्पशील तेल पाया जाता है जो रक्त से अत्यधिक लिपिड निकालने के लिए, प्लेटलेट्रस के एकत्रीकरण को कम करने और सूजन को कम करने में मदद करता है। यह मूल रूप से भारत में पाई जाती है।
भारत में इसे पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तर-पूर्व और उत्तरप्रदेश में उगाया जाता है। इसे ब्लेक हल्दी के नाम से जाना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण खुशबूदार शाक (जड़ी - बूटी) है जो भूमिगत राइजोम के रूप में पाई जाती है। यह औषधीय और सुगंधित दोनों के लिए प्रयोग की जाती है। और विभिन्न बीमारियों के उपचार में प्रमुख रूप से इसका उपयोग किया जाता है।

1. ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाव करे
ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में दर्द और जकड़न पैदा करने वाली बीमारी है। यह रोग मुख्यतः जोड़ों की हडियों के बीच रहने वाली आर्टिकुलर कार्टिलेज को नुकसान देता है। काली हल्दी में इबुप्रोफेन पाया जाता है जिससे पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस का दर्द ठीक किया जा सकता है।

2. त्वचा की खुजली रोके
यह रोग अधिकतर खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! इसके साथ आप काली हल्दी का भी प्रयोग कर सकती है। इसमें एंटी इन्फ्लैमटॉरी गुण होते हैं जिससे त्वचा की खुजली ठीक की जाती है।

3. लाल चकत्ते मिटाए
रूइ के फाहे को काली हल्दी वाले दूध में भिगो कर चकत्ते वाले भाग पर 15 मिनट के लिये लगायें, इससे त्वचा पर लाली और चकत्ते कम होंगें। साथ ही इससे आपकी त्वचा पर निखार और चमक आयेगी।

4. माहवारी शुरू करे
काली हल्दी के सेवन से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। दूध में हल्दी मिलाकर कुछ हफ्ते पीने से पीरियड्स से जुड़ी हर समस्या दूर हो जाती है।

5. पेट ठीक करे
हल्दी के सेवन से आंतो के अच्छे बैक्टीरिया को पर्याप्त मात्रा में पैदा होते हैं। फलस्वरूप एसिड इत्यादि से पेट की बल्क्हेड सुरक्षित रहती हैं तथा पेप्टिक अलसर की सम्भावनाये बहुत कम रह जाती हैं।

6. अल्सर
अल्सर रोग के रोगियों को मेगोनंसम हल्दी के उपयोग से कतराना नहीं चाहिए। क्योंकि हल्दी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिससे पेट में एसिड नहीं बनता और अल्सर जैसी गंभीर बीमारी नहीं होती।

7. कोलन कैंसर से बचाव
हल्दी में मौजूद एक महत्वपूर्ण तत्व करक्युमिन कोलन कैंसर से ल़डने में मददगार हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक सूजन दूर करने वाली एक महत्वपूर्ण दवा के साथ मरीज को करक्युमिन देना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।

8. फेफड़े की बीमारियों में राहत
काली हल्दी का उपयोग अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, न्यूमोनिया जैसी बिमारियों में किया जाता है। अगर आप नयी या पुरानी किस भी प्रकार की सुखी गीली खांसी से परेशान हैं तो हल्दी इसके लिए रामबाण इलाज है। इसके लिए आप हल्दी की गांठें ले सकते हैं और उसे धोकर उसके रस को पीसकर पी सकते हो। इससे जल्द ही आपकी खांसी दूर हो जाएगी। हल्दी में मौजूद कुरकुमिन नामक तत्व फेफडों के कैंसर का कारण बनें वाले तत्व को हटाता है। यह फेफडों की सूजन को घटाता है व अस्थमा के रोगियों को आराम पहुँचता है।

9. सूजन को रोकता है
काली हल्दी में एंटी इन्फ्लैमटॉरी पाए जाते हैं जिसमें कुरकुमिन नमक तत्व पाया जाता है जो मालक्यूल को ब्लॉक कर सूजन होने से रोकता है। इसके लिए आप काली दोसिसि हल्दी का उपयोग कर सकते हैं। इसका आपको प्रति दिन 500 मिलीग्राम से अधिक सेवन नहीं करना है। और अगर इससे ज्यादा इसका सेवन किया जाए तो इससे एलर्जी और गॉल्ब्लैडर को नुक्सान हो सकता है।



Click it and Unblock the Notifications
