Latest Updates
-
आईटी मैनेजर की लाखों की नौकरी छोड़ थामा ऑटो का हैंडल, इस महिला की अनोखी कहानी जीत रही दिल -
Maghi Special Bihar Tilkut Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट तिलकुट -
Summer Hair Care: गर्मियों में बालों के लिए बेस्ट 5 हल्के तेल, बिना चिपचिपाहट के मिलेंगे लंबे और मजबूत बाल -
Japan Mango Ban: जापान में सबसे ज्यादा कौन सा आम खाया जाता है? 20 साल बाद भारतीय आमों पर लगाया प्रतिबंध -
Restaurant Style Jeera Aloo Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा और कुरकुरा जीरा आलू -
World No Tobacco Day: स्मोकिंग की लत से छुटकारा चाहिए? ये 5 घरेलू उपाय बीड़ी-सिगरेट छोड़ने में करेंगे आपकी मदद -
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी
30 की उम्र हो गई है तो जरुर खाएं एवाकाडो और पालक, जानें कारण
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पालक और अवोकेडो से ना ही आपको ज़रूरी विटामिन और प्रोटीन मिलते हैं, पर यह आपके ज्ञानात्मक कौशल के लिए भी सही होते हैं।
लूटीन शरीर अपने आप नहीं बना पाता इसलिए इंसान को ऐसा खाना खाना खाना चाहिए जिसमें यह मौजूद हों। लूटीन अधिक मात्रा में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, अवोकेडो, केल, पीले गाजर और अंडे में पाया जाता है।

हाल ही में हुए शोध जो फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस नाम की पत्रिका में छपी थी, में 25 से 45 साल के 60 वयस्कों पर अध्ययन किया गया और यह पाया गया कि मिडिल एज के लोग जिनमें लूटीन की मात्रा ज़्यादा थी उनके न्यूरल रेस्पोंस उनसे छोटे लोगों के जैसी थी और अपने साथ वालों से ज़्यादा थी।

उर्बाना- चम्पैग्न की यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलेनॉइस के शोधकर्ताओं ने कहा कि ज़्यादा मात्रा में लूटीनयुक्त खाना खाने से मिडिल एज के लोगों में ज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है।
"जैसे लोग बूढ़े होते हैं, उनकी इस क्षमता में कमी आती है। हालांकि, शोध से पता चलता है कि यह क्रिया अपेक्षा से पहली भी शुरू हो सकती है।
आपको इस क्षमता में 30 साल की उम्र से भी बदलाव नज़ाकर आ सकता है," शोध के पहले लेखक एन वाक ने कहा।
दिमाग के अलावा शोधकर्ताओं ने लोगों के आँखों में लूटीन के असर की जांच की कि कैसे वह टिमटिमाती रौशनी पर प्रतिक्रया करते हैं।
फिर स्कैल्प पर इलेक्ट्रोड की मदद से उन्होंने दिमाग में हो रही न्यूरल गतिविधि को नापा और लोगों से कुछ काम करवाए। हम सही तरीका चुनते हैं। ना कि आसान तरीका।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications