Latest Updates
-
Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी की रथ यात्रा में जा रहे हैं? इन 7 मशहूर लोकल फूड्स का स्वाद लेना न भूलें -
PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जानें स्पीड, रूट और कितना होगा किराया -
Relationship Tips: लाइफ पार्टनर से कभी न बोलें ये 5 बातें, वरना टूट सकता है आपका रिश्ता -
कितने पढ़े-लिखे हैं सोनम वांगचुक और कितनी है उनकी नेट वर्थ? जानें कहां-कहां से होती है कमाई -
Sonam Wangchuk की 20वें दिन भी भूख हड़ताल जारी, बिना खाना खाए कितने दिन जीवित रह सकता है इंसान? -
Jagannath Rath Yatra 2026: कौन हैं भगवान जगन्नाथ की मौसी? जिनसे मिलने के लिए हर साल रथ से निकलते हैं महाप्रभु -
World Emoji Day 2026: क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड इमोजी डे, कैसे पड़ा 'Emoji' नाम? जानिए इसका दिलचस्प इतिहास -
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: जगन्नाथ रथ यात्रा पर अपनों को भेजें ये दिल छू लेने वाले शुभकामना संदेश -
World Emoji Day: रोज इस्तेमाल करते हैं ये 5 इमोजी, लेकिन 99% लोग नहीं जानते इनका असली मतलब -
Puri Rath Yatra Stampede: भगदड़ मचने पर कैसे बचा सकते हैं अपनी जान? अपनाएं ये 10 सुरक्षा टिप्स
30 की उम्र हो गई है तो जरुर खाएं एवाकाडो और पालक, जानें कारण
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पालक और अवोकेडो से ना ही आपको ज़रूरी विटामिन और प्रोटीन मिलते हैं, पर यह आपके ज्ञानात्मक कौशल के लिए भी सही होते हैं।
लूटीन शरीर अपने आप नहीं बना पाता इसलिए इंसान को ऐसा खाना खाना खाना चाहिए जिसमें यह मौजूद हों। लूटीन अधिक मात्रा में पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, अवोकेडो, केल, पीले गाजर और अंडे में पाया जाता है।

हाल ही में हुए शोध जो फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस नाम की पत्रिका में छपी थी, में 25 से 45 साल के 60 वयस्कों पर अध्ययन किया गया और यह पाया गया कि मिडिल एज के लोग जिनमें लूटीन की मात्रा ज़्यादा थी उनके न्यूरल रेस्पोंस उनसे छोटे लोगों के जैसी थी और अपने साथ वालों से ज़्यादा थी।

उर्बाना- चम्पैग्न की यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलेनॉइस के शोधकर्ताओं ने कहा कि ज़्यादा मात्रा में लूटीनयुक्त खाना खाने से मिडिल एज के लोगों में ज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है।
"जैसे लोग बूढ़े होते हैं, उनकी इस क्षमता में कमी आती है। हालांकि, शोध से पता चलता है कि यह क्रिया अपेक्षा से पहली भी शुरू हो सकती है।
आपको इस क्षमता में 30 साल की उम्र से भी बदलाव नज़ाकर आ सकता है," शोध के पहले लेखक एन वाक ने कहा।
दिमाग के अलावा शोधकर्ताओं ने लोगों के आँखों में लूटीन के असर की जांच की कि कैसे वह टिमटिमाती रौशनी पर प्रतिक्रया करते हैं।
फिर स्कैल्प पर इलेक्ट्रोड की मदद से उन्होंने दिमाग में हो रही न्यूरल गतिविधि को नापा और लोगों से कुछ काम करवाए। हम सही तरीका चुनते हैं। ना कि आसान तरीका।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications