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गांधी का डाइट प्लान जिसे सुभाष चंद्र बोस थे प्रेरित, जानें इसे लेकर रोचक रहस्य
देश को आजादी दिलाने में महात्मा गांधी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अंहिसा, नैतिकता और उपवास के सहारे उन्होंने देश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी। हम में से कई लोग जानते हैं कि गांधीजी ने देश की स्वतंत्रता के लिए करीब 17 उपवास किए थे जिनमें से सबसे लम्बा उपवास 21 दिनों तक चला था। महात्मा गांधी मानते थे कि फूड और डाइट भी मेडिसिन का काम करते हैं। बॉडी को फिट और हेल्दी रखने के लिए सही डाइट लेना बहुत जरूरी है। गांधीजी शाकाहार को सबसे अच्छा मानते थे। इसमें भी वे बगैर आग पर पकाए फूड को ज्यादा अच्छा मानते थे। गांधीजी ने किए थे डाइट पर प्रयोग....
गांधी जी ने अपनी डाइट पर भी कई तरह के प्रयोग किए थे। इन प्रयोगों के बारे में उन्होंने यंग इंडिया और हरिजन समाचार पत्रों में भी लिखा। इनका संकलन एक किताब 'Diet and Diet Reform' में किया गया है जो गांधी सेवाग्राम द्वारा पब्लिश की गई है। महात्मा गांधी अक्सर देश-विदेश के फूड और डाइट एक्सपर्ट से पत्राचार करके एक सही डाइट प्लान के बारे में जानकारी भी लेते रहते थे।

सुबह-शाम नींबू और शहद
गांधीजी सुबह और शाम गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद डालकर पीते थे। इसके अलावा उनकी डाइट में रोजाना करीब 90 ग्राम अंकुरित गेहूं भी रहता था। इसके अलावा गांधीजी रोजाना 200 एमएल दूध पिया करते थे। गांधी जी को बकरी का दूध पसंद था। जब आखिरी वाइसरॉय लॉर्ड माउंटबैटन गांधीजी से मिले थे तो उन्होंने माउंटबैटन को भी बकरी का दूध पिलाया था। बकरी और गाय के दूध के अलावा वह कोकोनट मिल्क भी पिया करते थे।

ताजे फल
गांधीजी की डाइट में रोजाना 22 ग्राम घी भी शामिल होता था। गांधीजी को फल खाना भी काफी पसंद था। गांधीजी रोजाना डाइट में 230 किलोग्राम अमरूद जैसे ताजे फल शामिल होते थे। काजू और बादाम भी गांधी जी के डाइट का हिस्सा थे। वह रोजाना 90 ग्राम बादाम का हलवा और 11 ग्राम साबुत खाते थे। बता दें कि बादाम हार्ट की बीमारी और डायबिटीज जैसी कई बीमारियों से बचाता है।

व्यायाम पर दे ध्यान
पुस्तक के अनुसार उन्होंने दृढ़ता से शाकाहारी भोजन अपनाया और खुले में व्यायाम किया क्योंकि उनका मानना था कि व्यायाम मन और शरीर के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि भोजन मन, हड्डियों और मांस के लिए।

सुभाषचंद्र को दी थी ये सलाह
सुभाष चंद्र महात्मा गांधी के डाइट प्लान से प्रेरित थे। इसलिए उन्होंने सुभाषचंद्र को लहुसन खाने की सलाह दी थी।



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