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क्या होती है लूनर डाइट, क्यों सेलिब्रेटिज के बीच है फेमस ये खास डाइट
आपने तरह-तरह की डाइट के बारे में सुना होगा जैसे कीटो डाइट, वीगन डाइट और लिक्विड डाइट लेकिन क्या आपने कभी लूनर डाइट के बारे में सुना हैं। जी हां, लूनर डाइट जिसे मून डाइट और वेयरवुल्फ डाइट के नाम से भी जाना जाता हैं। चर्चा है कि डेमी मूर और मेडोना जैसी हॉलीवुड हस्तियां भी इस डाइट को फॉलो करती हैं। आइए जानते हैं इस डाइट से जुड़ी जरुरी बातों के बारे में।

लूनर डाइट का तरीका
इसमें व्यक्ति को अमावस्या या पूर्णिमा के दिन व्रत रखना होता है और दौरान ठोस भोजन बिलकुल भी ग्रहण नहीं करना होता, सिर्फ तरल पेय पदार्थ लेना होता है। जैसे कि फलों और सब्जियों का जूस ले सकते हैं, पर दूध चीनी का सेवन न करें। विशेषज्ञों की मानें तो यह आहार पद्धति किसी व्यक्ति की वजन कम करने की क्षमता को बढ़ावा देती है और इसके जरिए महज 26 घंटे में कोई भी अपना वजन छह पाउंड तक कम कर सकता है।

साइंस के अनुसार
इस डाइट के पीछे की साइंस की मानें तो चंद्रमा हमारे शरीर में मौजूद जल को उसी तरह प्रभावित करता है, जिस तरह वह समुद्र में ज्वार को प्रभावित करता है। इसलिए इस शक्ति का उपयोग वजन कम करने के लिए किया जा सकता है। हम जानते हैं कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पूर्णिमा और अमावस्या के दौरान सबसे शक्तिशाली होता है। इसलिए इस दौरान तरल आहार लेने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

लूनर डाइट फॉलो करने का तरीका-
मून डाइट का पालन करने वालों को अमावस्या या पूर्णिमा के 26 घंटों के दौरान ठोस भोजन नहीं लेना होता। वे पानी और डिटॉक्स टी ले सकते हैं। इस दौरान वो सब्जियों और फलों के रस को भी पी सकते हैं। अगले 26 घंटों तक आपको केवल फल, सलाद, सूप, कद्दू का मसला हुआ गूदा आदि खाने की छूट होती है। अगर आपने मून डाइट अपनाई है तो पूर्णिमा के दौरान भारी खाद्य पदार्थ, चीनी और वसा का सेवन न करें।

लूनर डाइट के लिए सावधानी
लूनर डाइट के चलते आपको कमजोरी, थकान या चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा थकान, चिड़चिड़ापन, बेहोशी, चक्कर आने या संवेदनाशून्य होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाइपोग्लाइकीमिया अर्थात ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। इसलिए इसे करने से पहले किसी विशेषज्ञ जी की राय जरुर लें।



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