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दोपहर का खाना खाते ही ऑफिस में आ जाती है नींद, आप हो सकते हैं इस बीमारी के शिकार
feel sleepy at work after having lunch : दोपहर में खाना खाने के बाद ही आपकी आंखें भारी हो जाती है। भरपेट खाने के बाद आपको आपको एक चैन की नींद चाहिए होती है, तो आप इस बीमारी की गिरफ्त में हैं।
जी हां, खाने के बाद नशे सी हालत हो जाती है और आपको कैसे भी नींद चाहिए होती है तो आप फूड कोमा की बीमारी जूझ रहे हैं। जिसे मेडिकल भाषा में पोस्टप्रांडियल सोमनोलेंस कहा जाता है। आइए जानते हैं कि फूड कोमा या पोस्टप्रांडियल सोमनोलेंस क्या है और ऐसा क्यों होता है?

खाने के बाद नींद क्यों आती है?
खाना खाने के बाद नींद आना, आंखे भारी होना, बेहोशी जैसी स्थिति होना को पोस्टप्रांडियल सोमनोलेंस कहा जाता है। लंच के बाद ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होने की वजह से यह समस्या होती है। ऐसे लोग जो सुबह के वक्त खाना नहीं खाते, दोपहर के खाने के बाद उनका ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है। इसी की वजह से सुस्ती आती है और नींद लगता है। कुछ लोगों को कई-कई घंटे तक उबासी भी आती है।
इस वजह से होता है ऐसा
खाना खाने के बाद स्लीप हार्मोन पर इसका असर होता है। पाचन प्रक्रिया में कई तरह के न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज होते हैं। इसकी वजह से थकान और नींद लगने लगती है। कुछ रिसर्च में पाया गया है कि ये समस्या 2 से 4 घंटे तक रह सकती है। कुछ लोगों में तो एक घंटे में ही समस्या खत्म हो जाती है। अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग यह समस्या होती है।
बन सकता है बीमारी की वजह
आयुर्वेद में खाने के बाद सोने की आदत को खराब माना गया है। क्योंकि इससे वजन बढ़ना, थायरॉइड की समस्या, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल हो सकता है। अचानक कफ बढ़ने से फूड कोमा होता है। इसी की वजह से शरीर में इंफ्लामेशन हो सकती है। न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, फूड कोमा के बाद नींद आना, आलस, थकावट, एनर्जी की कमी, फोकस ना कर पाना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
फूड कोमा या पोस्टप्रांडियल सोमनोलेंस से बचने के तरीके
- दोपहर का लंच हल्का ही करें।
- खाने के कुछ मिनट बाद ही पानी पिएं।
- खाने के बाद कुछ देर वॉक करें।
- रात में कम से कम 7 घंटे जरूर सोएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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