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इबोला बीमारी से बचने के लिए 8 टिप्स
इबोला एक खतरनाक वायरस है तथा हमारी थोडी सी लापरवाही हमें इस इबोला वायरस इवीड़ी) का शिकार बना सकती है। एक बार इस बीमारी की गिरफ्त में आने के बाद, आप केवल प्रभावी निवारक एवं एहतियाती उपायों से ही इस संक्रमण रोग को बढ़ने से रोक सकते हैं। यहाँ इस रोग को फैलने से रोकने में मददगार साबित होने वाले कुछ विशेषज्ञ सुझाव दिए गए हैं। जानलेवा इबोला वायरस के लक्षणों की करें पहचान

1 ईबोला बीमारी के बारे में जानें:
इस रोग को फैलने से रोकने के लिए इसके लक्षणों, संक्रमण के तरीकों एवं निवारक उपायों के बारे में जानें। यह जानकारी विशेष रुप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो इस बीमारी से प्रभावित पश्चिम अफ्रीका के क्षेत्रों से आ रहे हैं या वहां जा रहे हैं।

2 स्वच्छता बनाए रखें:
माना जाता है कि यह वायरस हमारे शरीर में त्वचा व आंखों के माध्यम से प्रवेश करता है। अतः यह बीमारी भोजन एवं पानी द्वारा भी हमारे शरीर में प्रवेश हो सकती है। खाना खाने से पहले हाथों को धोएं या मुंह बंद रखने से भी इस वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। साथ ही, अपने आसपास के क्षेत्र को भी साफ रखें।

3 रक्त एवं शरीरी द्रव से बचें:
ईबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, लार, पसीना, मूत्र, मल पदार्थ तथा उल्टी से फैलता है। संक्रमित व्यक्तिओं के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं मेडिकल स्टाफ को खासे एहतियात बरतने की जरुरत है। इन्हें संक्रमित सुइयों को तथा फ़सर्ट-एड किट को बहुत संभाल कर इस्तेमाल करना चाहिए।

4 घाव:
चोट व खुले घाव वायरस को शरीर में प्रवेश करने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। इसलिए, बहते घावों की जल्दी मलहम पट्टी कर देनी चाहिए तथा उन्हें हवा के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए।

5 भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहें:
भीड़-भाड़ वाली जगहों में आप सीधे तथा बड़ी आसानी से इस वायरस के संपर्क में आ सकते हैं। इसलिए, रोगियों को घर में आराम करना चाहिए व ऐसे आप इस बीमारी को भी फैलने से रोक पाएंगे।

6 सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग करें:
ईबोला वायरस से बचने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं मेडिकल स्टाफ को दस्ताने, मास्क एवं बाडी सूट जैसे सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले स्वस्थ व्यक्तियों को भी दस्ताने व मास्क जरुर पहनने चाहिए।

7 बिना पका मांसाहरी खाना ना खाएं:
जान पड़ता है कि यह वायरस जानवरों के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश हुई है। हालांकि, चमगादड़ को इस वायरस का मूल जलाशय समझा जाता है, लेकिन अब यह वायरस अन्य जानवरों में भी फैल चुका है। अतः, मांसाहरी भोजन को ना खाने में ही समझदारी है।

8 कम सफ़र करें:
दिल्ली-एनसीआर के रॉकलैंड ग्रूप ऑप होस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ रतन कुमार वैश्य के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा ना करना ही इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।



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