Latest Updates
-
Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
मामा IPS, नाना रजिस्ट्रार और चाची राजनीति में, जानें Vaibhav Suryavanshi के परिवार में कौन क्या करता है? -
El Nino: क्या है एल नीनो, मानसून की बारिश और तापमान पर कैसे असर डालता है? जानिए सब कुछ -
Grandma Sunday Recipe Rajma Chawal Recipe: दादी के हाथ जैसा स्वाद अब घर पर पाएं -
दही के साथ भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना बिगड़ सकती है सेहत -
Telangana Formation Day Quotes: गर्व से कहो जय तेलंगाना! अपनों को भेजें दिल को छू लेने वाले बधाई संदेश -
Indore Street Style Poha Recipe: घर पर बनाएं इंदौर जैसा चटपटा और खिला-खिला पोहा -
5th Bada Mangal 2026: पांचवे बड़े मंगल पर करें पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ, बजरंगबली दूर करेंगे सभी संकट -
Aaj Ka Rashifal 02 June 2026: मंगलवार को इन राशियों पर होगी धनवर्षा, बजरंगबली की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट -
No Bitterness Trick Karela Sabzi Recipe: अब घर पर बनाएं बिना कड़वाहट वाली चटपटी सब्जी
बॉडी पास्चर को सुधारे उष्ट्रासन (कैमल पोज़)
योग के किसी अन्य आसन की तरह ही कैमल पोज़ या उष्ट्रासन भी संस्कृत शब्द से ही निकला है। उष्ट्र शब्द का अर्थ है ऊंट तथा आसन का अर्थ है मुद्रा।
यह आसन शरीर के आगे के भाग में खिंचाव लाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है तथा इसके अलावा यह रीढ़ की हड्डी, गर्दन, कूल्हे और कंधे के जोड़ों को लचीला भी बनाता है।
इस आसन में घुटनों को ज़मीन पर टिकाकर शरीर को पीछे की ओर मोड़ा जाता है। कई लोगों को शुरू में इस आसन को करने में कठिनाई होती है क्योंकि उन्हें पीछे की ओर झुकने की आदत नही होती।
इस आसन को करते समय धीरे धीरे श्वास लेना चाहिए क्योंकि इसमें शरीर का आगे का भाग खिंचा हुआ होता है। यह आसन कई प्रकार की समस्याओं जैसे अपचन, माहवारी की समस्या, लोअर बैक(पीठ में पीछे की ओर दर्द) के दर्द, सर्विकल स्पॉन्डिलाइटिस आदि के उपचार में सहायक होता है।
इस आसन को करने के चरणों और इससे शरीर को होने वाले अन्य लाभों के बारे में जानने के लिए इसे पढ़ें।
आसन को करने की चरण दर चरण प्रक्रिया:

चरण 1: ज़मीन पर घुटनों के बल इस प्रकार बैठे कि आपके घुटने, जांघें और कूल्हे ज़मीन से लंबवत रहें। अपनी जाँघों को धीरे से अंदर की ओर मोड़ें और कूल्हों को पास लायें परन्तु कूल्हों को कड़ा न करें। ध्यान रहे कि कूल्हों को जितना हो सके नरम रखने का प्रयत्न करें। अपने पैरों के साथ पिंडलियों को भी ज़मीन पर मज़बूती से दबाएँ।

चरण 2: अपने हाथों को अपनी श्रोणि के पीछे इस प्रकार रखें कि आपकी हथेलियाँ आपके कूल्हों को संभालें तथा आपकी उंगलियाँ पैरों की ओर हों। अपनी टेल बोन को प्युबिस की ओर मज़बूती से सहारा दें। आपके पेट और जांघ के बीच का भाग आगे की ओर नहीं झुकना चाहिए। धीरे धीरे सांस लेते हुए अपने दिल को ऊपर उठायें तथा अपने कंधों को पीछे की पसलियों की ओर दबाएँ।

चरण 3: अपनी टेलबोन और कंधे के किनारों का सहारा लेते हुए सिर को ऊपर रखते हुए, ठोडी को छाती की हड्डी से लगाते हुए तथा हाथों को श्रोणि पर रखकर नीचे की ओर झुकें। नौसिखिये लोगों को शुरू में यह आसन करना थोडा मुश्किल लग सकता है। प्रारंभ में केवल एक ही ओर झुकें और अपना एक पैर ही पकड़ें तथा उसका ही सहारा लेते हुए दूसरे पैर को छूने का प्रयास करें तथा जाँघों को दबाएँ। धीरे धीरे आप ये आसन कर पायेंगे।

चरण 4: ध्यान रहे कि आपकी निचली पसलियाँ ऊपर की ओर बहुत ज़्यादा निकली हुई न हों। इससे पेट कड़ा हो जाएगा तथा आपके शरीर के निचले भाग पर दबाव पड़ेगा। श्रोणि के अग्र भाग को पसलियों की ओर उठायें। अपनी हथेलियों को अपने तलुओं पर मजबूती से रखें तथा उंगलियाँ पैरों की उँगलियों की ओर हों। ऐसा करने से आपकी भुजाएं बाहर की ओर मुड जायेंगी और आपके कंधे थोड़े सिकुड़ जायेंगे।
आपकी गर्दन सामान्य स्थिति में तथा पीछे की ओर झुकी हुई होनी चाहिए। आपको गर्दन पर कभी भी तनाव नहीं देना चाहिए। अपने गले को कड़क रखें। बहुत बार ऐसा होता है कि जब आप यह आसन अधिक समय के लिए करते हैं तो आपकी आँखों के आगे अँधेरा छा जाता है। ऐसा न करें और जब ऐसा होने लगे तो आराम करें।

चरण 5: इस मुद्रा में 30-60 सेकंड तक रहें। झटके से न उठें। बल्कि धीरे धीरे उठें। पहले अपने हाथों को श्रोणि के आगे लायें। फिर धीरे से श्वास लें तथा आराम करें। अपने कूल्हों को ज़मीन की ओर ले जाएँ तथा अपने हाथों को श्रोणि के आगे ले जाएँ। कुछ मिनिट तक चाइल्ड पोज़ में जाकर आराम करें तथा इसे आसन को 5-6 बार करें या जब आप आराम महसूस करें

इस आसन से होने वाले लाभ
- महिलाओं में मासिक धर्म के कारण होने वाली असुविधा को दूर करना
- लचीलापन बढ़ाना और रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर झुकाना
- पाचन की प्रक्रिया में सुधार लाना
- पीठ और कंधे की मांसपेशियों को मज़बूत करना
- कमर के दर्द से आराम दिलाना
सावधानी
वास्तव में इस आसन को करना कठिन है विशेष रूप से तब जब आपके कंधों में कडापन हो या आपको स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या हो। ऐसी स्थिति में आप अपनी पीठ और गर्दन के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications