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सावधान..! हर मर्द को मालूम होना चाहिए इन खतरनाक सेक्स डिसीज के बारे में
एसटीडी या सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज संक्रमण यौन संपर्क में आने के बाद मिलते हैं। एसटीडी सेक्स संबंधी रोग है जिसके कई सारे कारण हो सकते हैं जो महिला और पुरुष दोनों के शरीर को नुकसान पहुंचाने में कोई भी कसार नहीं छोड़ते हैं।
एसटीडी पुरुष और महिला दोनों में हो सकता है जिसके अलग-अलग लक्षण होते है और उन लक्षणों को जानना सभी को जरूरी है ताकि एसटीडी से पीड़ित लोग इसका अच्छी तरह से इलाज कर सके।
आज तक महिलाओं को एसटीडी के बारे में अवेयर किया जाता है। आज हम पुरुषों में पाएं जाने वाले एसटीडी के बारे में जिसके बारे में हर पुरुष को मालूम होना जरुरी है। शर्मिंदा न होइए.. इन देसी नुस्खों से बढ़ाइए अपने लिंग का आकार

क्लैमाइडिया
सबसे आम बीमारी है कि यौन संचारित कर रहे हैं में से एक है। क्लैमिडिया यौनसंचारित रोग है जो क्लैमिडिया ट्रैकोमेटिस नामक जीवाणु से होता है। क्लैमिडिया यूरीन नली (यूरेथ्रा), योनि या गर्भग्रीवा के आस-पास का क्षेत्र (सर्विक्स एरिया), और गुदा को संक्रमित कर सकता है। क्लैमिडिया के मुख्य कारण असुरक्षित यौन, गुदा या मुख मैथुन आदि हो सकते हैं। जन्म के समय यह मां से उनके बच्चे को भी लग सकता है। क्लैमाइडिया से ग्रस्त माताओं से उनके बच्चे को नेत्र संक्रमण और निमोनिया हो सकता है। यौनिक सक्रिय व्यक्ति में भी क्लैमिडिया संक्रमित हो सकता है।
जिन पुरुषों को यह बीमारी होती है उनके लिंग से स्राव हो सकता है या पेशाब करते समय जलन हो सकती है। पुरुषों को लिंग के रंध्र (ओपनिंग) के आसपास जलन या खुजली हो सकती है।

गोनोरिया
गोनोरिया नामक जीवाणु के कारण गोनोरिया नीसेरिया होता है। ये जीवाणु महिलाओं व पुरुषों में तेजी से फैलती हैं। ओरल सेक्स की वजह से इसके बैक्टीरिया संक्रमण करते है जिस वजह से सूजन व दर्द होने लता है।
जरा सी उत्तेजना में वीर्यपात, पेशाब से पहले व बाद में धातु गिरना, शौच के समय जरा सा जोर लगाते ही वीर्यपात हो जाना प्रमेह के प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा तालू, कंठ, जीभ व दांतों में मैल जमा होना, हाथ-पांवों में जलन, शरीर में चिकनाहट तथा मुंह में मिठास अनुभव होना इसके अलावा लिंग से सफेद, पीला या हरा स्त्राव निकलने लगता है तथा अंडग्रंथि में सूजन व दर्द शुरु हो जाता है।

हपीर्स
डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 50 वर्ष की उम्र के आयुवर्ग के लोगों में लगभग दो तिहाई प्रतिशत भाग वाले लोग हर्पीस से ग्रस्त हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संक्रमण का कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। इस बीमारी का कोई इलाज भी नहीं है, हांलाकि अगर आपको इसकी जानकारी हो तो आप इससे बच सकते हैं और इसका जल्द इलाज किया शुरु कर सकते हैं। हर्पीस एक यौन रोग है जो यौन संबंध दृारा फैलता है। यह दो प्रकार का होता है, एक ओरल और दूसरा जेनाइटल। इसे HSV 1 और HSV 2 वायरस भी कहते हैं। दुर्भाग्यवश इसके इलाज के लिये कोई दवा नहीं बनी है पर रिसर्च चल रही है। इस बीमारी में निकलने वाले छाले म पुरूषों के मूत्रमार्ग को अपनी चपेट में ले सकते हैं।जानें, क्या होती है हर्पीस और कैसे बचें इस यौन रोग से

एचआईवी
एच आई वी यानि ह्यूमन इम्युनडिफिशिएंशी वायरस एक विषाणु है जो बॉडी के इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव ड़ालता है और व्यक्ति के शरीर में उसकी प्रतिरोधक क्षमता को दिनोंदिन कमजोर कर देता है।
हर दो तीन दिन में बुखार महसूस होना और कई बार तेजी से बुखार आना, एच आई वी का सबसे पहला लक्षण होता है।
पिछले कुछ दिनों से पहले से ज्यादा थकान होना या हर समय थकावट महसूस करना एच आई वी का शुरूआती लक्षण होता है।एच आई वी में मरीज का वजन एकदम से नहीं घटता है। हर दिन धीरे - धीरे बॉडी के सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है और वजन में कमी होती है। अगर पिछले दो महीनों में बिना प्रयास के आपके वजन में गिरावट आई है तो चेक करवा लें।

जननांगों में मस्सें
जननांगों पर मस्से होने का कारण ह्यूमन पैपीलोमावारस (एचपीवी) है। यह पूरे विश्व में सबसे आम पाया जाने वाला यौनसंचारित रोग है। आपके जननांगों (लिंग, योनि या गुदा) पर एचपीवी संक्रमण हो सकता है, इसके साथ-साथ यह आपके मुंह के अंदर और गले में भी हो सकता है।
एचपीवी से संक्रमित अधिकांश लोगों को इसका पता नहीं चलता क्योंकि उन्हें मस्से या दाने होने का पता नहीं होता। फिर भी संक्रमित व्यक्ति से यह दूसरों को लग सकता है।
जननांग पर हुए मस्सों का कोई इलाज नहीं है। या तो वे अपने-आप ठीक हो जाते हैं अथवा इन्हें दबाने के लिए आपको उपाय तलाशने होते हैं।
असुरक्षित मुख, यौन और गुदा मैथुन करने से आपको जननांग पर मस्से हो सकते हैं। साथ ही यह विषाणु किसी ऐसे व्यक्ति के सेक्स ट्वाय का प्रयोग करने से भी आपको हो सकता है, जिसके जननांग पर मस्से तो नहीं हैं किंतु वह ह्यूमन पैपीलोमावायरस से संक्रमित है।

हेपेटाइटिस ए
‘हेपेटाइटिस ए' एक विषाणु जनित रोग है। इसमें लिवरमें सूजन हो जाती है और ऐसा इस बीमारी के विषाणु के कारण होता है। इसे वायरल हेपेटाइटिस भी कहते हैं। जब लिवर रक्त से बिलीरूबिन को छान नहीं पाता है तो हेपेटाइटिस होता है। हालांकि हेपेटाइटिस के सभी रूपों में हेपेटाइटिस ए सबसे कम गंभीर है। यह संक्रामक रोग है यानी यह रोगी के संपर्क में आने वाले स्वस्थ व्यक्ति को भी अपना शिकार बना सकती है।

क्या है हेपेटाइटिस बी
यह 'बी' टाइप के वायरस से होने वाली बीमारी है। इसे सीरम हेपेटाइटिस भी कहते हैं। यह रोग रक्त, थूक, पेशाब, वीर्य और योनि से होने वाले स्राव के माध्यम से होता है। ड्रग्स लेने के आदि लोगों में या उन्मुक्त यौन सम्बन्ध और अन्य शारीरिक निकट सम्बन्ध रखने वालों को भी यह रोग हो जाता है। विशेषकर अप्राकृतिक संभोग करने वालों में यह रोग महामारी की तरह फैलता है। इस दृष्टि से टाइप 'ए' के मुकाबले टाइप 'बी' ज्यादा भयावह होता है। इस टाइप का प्रभाव लीवर पर ऐसा पड़ता है कि अधिकांश रोगी 'सिरोसिस ऑफ लिवर' के शिकार हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग दो अरब लोग हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हैं और तकरीबन 35 करोड़ से अधिक लोगों में क्रॉनिक (लंबे समय तक होने वाला) लिवर संक्रमण होता है, जिसकी मुख्य वजह शराब का सेवन है।
इसमें त्वचा और आँखों का पीला, गहरे रंग का मूत्र आना, अत्यधिक थकान, उल्टी और पेट दर्द जैसी शिकायतें होती है।

सिफलिस
सिफलिस एक बैक्टीरियल या जीवाणु संक्रमण है जो आम तौर पर संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध रखने से होता है। Syphilis को हिंदी में उपदंश कहा जाता है। यह एक यौन रोग (एसटीडी) है। यह प्रजनन अंगों से होने वाला संक्रमण है और यदि इसका जल्दी इलाज नहीं कराया जाता तो यह जटिलताओं का कारण हो सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में बदल सकता है।
सिफलिस के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं और बहुत समय तक कोई लक्षण भी नहीं हो सकते लेकिन जब तक इलाज़ नहीं कराया जाता, शरीर में उपदंश का संक्रमण बना रहता है।



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