माइग्रेन से राहत पाने के लिए करें ये 5 योगासन

आइए जानते हैं ऐसे योगासन के बारे में जिनसे आप अपनी माइग्रेन की समस्या को दूर कर सकते हैं।

By Lekhaka

अगर आप माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे हैं और कई तरह के इलाज से भी आपको कोई फायदा नहीं हुआ है, तो समय आ गया है आप योग का सहारा लें। योग से आप अपनी कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं। ऐसी ही एक बड़ी बीमारी माइग्रेन से भी आप योगा की मदद से निजात पा सकते हैं।

योग एक प्राचीन तकनीक है जो श्वसन तकनीकों और मुद्राओं के संयोजन के माध्यम से सम्पूर्ण रुप से जीवन को जीने के लिए प्रोत्साहित करता है। सबसे अच्छी बात यह है कि माइग्रेन से लड़ने के लिए यह पक्ष प्रभाव से मुक्त विधि है।

आइए जानते हैं ऐसे योगासन के बारे में जिनसे आप अपनी माइग्रेन की समस्या को दूर कर सकते हैं।

1) अधोमुख श्वानासन

1) अधोमुख श्वानासन

अधोमुख श्वानासन मस्तिष्क में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और सिर दर्द से राहत दिलाता है।

इसे करने का तरीका- इसे करने के लिए घुटनों के बल खड़े हों और फिर हाथों को जमीन पर रखें। अब हाथों पर शरीर का सारा जोर देते हुए पैरों को वी आकार में फैलाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ खींचें। एक मिनट तक इसी अवस्था में रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।

2) प्रसारित पादोत्तासन

2) प्रसारित पादोत्तासन

यह आसन ओक्सिजेनेटेड ब्लड से आपके मस्तिष्क को ताज़ा करता है। यह आसन माइग्रेन से राहत पाने के लिए सबसे बेहतर आसनों में से एक है।

इसे करने का तरीका- सीधे खड़े होकर अपने हाथों को साइड में सीधे रखें और अपने पैरों को अलग करें। आपके पैर सीधे कलाई के नीचे होना चाहिए। अब, अपने हाथ सामने लाओ और आगे बढ़ें जब तक कि आपका सिर फर्श को छू जाए। फर्श पर अपने हथेलियों को रखें कुछ मिनट के लिए इस स्थिति में रहें और मूल स्थिति पर लौटें।

3) शिशुआसन

3) शिशुआसन

इसे चाइल्‍ड पोज भी कहते हैं, यह बहुत उपयुक्त माना जाने वाला आसन है जो तनाव को दूर करता है। इस आसन के दौरान आपके कूल्हों, जांघों, एड़ियों में हल्‍का सा खींचाव महसूस होगा तथा यह आसन मन को शांत और आपको तनाव एवं थकान से मुक्त करेगा। बाल मुद्रा आसन तंत्रिका तंत्र को भी शांत करता है व प्रभावी रूप से दर्द को कम करता है।

4) जानुशीर्षासन

4) जानुशीर्षासन

इससे पाचन बेहतर रहता है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है।

इसे करने का तरीका- पैरों को सामने की ओर सीधे फैलाते हुए बैठ जाएं, रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। बाएं घुटने को मोड़े, बाएं पैर के तलवे को दाहिनी जांघ के पास रखें, बायां घुटना ज़मीन पर रहे। सांस भरें,दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाएं, खींचे ओर कमर को दाहिनी तरफ घुमाएं। सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें,रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए, ठुड्डी को पंजों की और बढ़ाएँ। अगर संभव हो तो अपने पैरों के अंगूठों को पकडे,कोहनी को जमीन पर लगाएँ,अँगुलियों को खींचते हुए आगे की ओर बढ़े। साँस रोकें। साँस छोड़ते हुए ऊपर उठें। पूरी प्रक्रिया को दूसरे पैर से दोहराएं।

5) हस्तपदासन

5) हस्तपदासन

हस्तपदासन तंत्रिका तंत्र को स्फूर्ति से भर देता है। यह आसन रक्तसंचार को बढ़ाता है तथा मन को शांत करता है, कमर का दर्द ठीक होता है, पेट अंदर से मजबूत बनता है और चेहरे को सुंदर बनाता है।

इसे करने का तरीका- सबसे पहले जमीन पर एक आसन बिछा लें। इसके बाद सीधे खड़े हो जाएं। अब पैरों को एक दूसरे से दूर ले जाएं। इसके बाद अपने दोनों हाथों का एक सीध में उपर की तरफ ले जाइये। अब आप अपने हाथों को धीरे.धीरे पैरों तक ले जाएं और जमीन को छूएं और अपने सिर को घुटनों से लगाने की कोशिश करें। साथ ही साथ अपनी उंगलियों के पोरों के जरिए भी जमीन को छूने की कोशिश करें। जब आप हस्तपादासन योग को कर रहे हों तब अपनी सासों को सामान्य ही रखें। आसन को पहले बहुत ही आराम से करें। हस्तपादासन को दिन में दो बार करें।

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