हिमालय की घाटी में 14 साल बाद खिला ब्रह्मकमल, जानिए इसके अद्भूत स्‍वास्‍थय लाभ

हिमालय क्षेत्र में 14 साल बाद इन दिनों जगह-जगह ब्रह्म कमल खिले हुए हुए नजर आ रहे हैं। यह फूल हिमालय की ठंडी जगहों पर सिर्फ रात में खिलता है। सुबह होते ही ये फूल बंद हो जाता है। इसे देखने दुनियाभर से लोग वहां पहुंच रहे हैं।

इसे उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी कहते हैं। पौरोणिक मान्‍यताओं के अनुसार ब्रह्म कमल, इसे स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का पुष्प माना जाता है। इस फूल का उल्‍लेख महाभारत में भी मिलाता है। इसके अलावा इस फूल के कई स्‍वास्‍थय लाभ भी है इसे कैंसर की दवा से लेकर यौन संचारित रोगों को दूर करने के ल‍िए भी इस्‍तेमाल में ल‍िया जाता है।

आइए जानते है इस फूल की विशेषताओं के बारे में।

अलग-अलग नाम से जाना जाता है

अलग-अलग नाम से जाना जाता है

ब्रह्मकमल को अलग-अलग जगहों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तराखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस नाम से इसे जाना जाता है। चीन में भी ब्रह्म कमल खिलता है जिसे 'तानहुआयिझियान' कहते हैं जिसका अर्थ है प्रभावशाली लेकिन कम समय तक ख्याति रखने वाला। ये केवल जुलाई-अक्‍टूबर के बीच खिलने वाला यह फूल मध्य रात्रि में बंद हो जाता है।

 बेहद ठंडे इलाकों में मिलता है ब्रह्मकमल

बेहद ठंडे इलाकों में मिलता है ब्रह्मकमल

ब्रह्मकमल हिमालय के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिम चीन में पाया जाता है। यह ब्रह्मकमल हिमालय के बेहद ठंडे इलाकों में ही मिलता है। बदरीनाथ, केदारनाथ के साथ ही फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, वासुकीताल, वेदनी बुग्याल, मद्महेश्वर, रूप कुंड, तुंगनाथ में ये फूल मिलता है। धार्मिक और प्राचीन मान्यता के अनुसार ब्रह्मकमल को भगवान महादेव का प्रिय फूल है। इसका नाम उत्पत्ति के देवता ब्रह्मा के नाम पर दिया गया है।

आइए जानते है इसके फायदों के बारे में।

 छिलने कटने का इलाज

छिलने कटने का इलाज

छिलने या कटने पर ब्रह्म कमल के फूल का रस लगाने से जख्‍म जल्‍दी भर जाते है। इस फूल के रस में एंटी सेप्टिक गुण पाएं जाते है जो घाव को भरने का काम करता है।

भूख बढ़ाता है

भूख बढ़ाता है

इसका स्‍वाद चाहे कैसा भी क्‍यों न हो लेकिन इसमें काफी मात्रा में न्‍यूट्रीशियन पाया जाता है। इस फूल को पाउडर बनाकर इसे भूख बढ़ती है और पाचन क्रिया भी तंदरुस्‍त रहती है।

यूरिन इंफेक्‍शन

यूरिन इंफेक्‍शन

यूरिन इंफेक्‍शन होने पर भी ये फूल काफी लाभकारी होता है। इसके रस को पीने से यूटीआई इंफेक्‍शन भी दूर हो जाता है।

 बुखार से न‍िजात

बुखार से न‍िजात

इस फूल के रस में काफी औषधीय गुण छिपे होते है। ये बुखार को दूर करने में मदद करता है। कितना ही तेज ज्‍वर क्‍यों न हो।

ब्रह्मकमल के फूल का रस हर बुखार को मात देदेता है। इस फूल से निकले अर्क को 50 मिलील‍ीटर की मात्रा में पीने से बुखार जड़ से गायब हो जाता है।

एसटीडीज से मुक्ति

एसटीडीज से मुक्ति

असुरक्षित सेक्‍स करने से मह‍िलाओं और पुरुषों में यौन संचारित रोग फेलने का डर रहता है। इस फूल के रस से यौन संचारित रोगों से भी मुक्ति मिलती हैं।

लीवर के इंफेक्‍शन को करता है दूर

लीवर के इंफेक्‍शन को करता है दूर

ब्रह्म कमल के रस में काफी औषधीय गुण छिपे होते है। इसका रस पीने से लीवर का इंफेक्‍शन भी ठीक हो जाता है। इस फूल के रस का सूप बनाकर पीने से लीवर से संबंधित सभी रोग दूर हो जाते है।

काली खांसी का इलाज

काली खांसी का इलाज

इस फूल का प्रयोग जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। वैद्य बताते हैं कि इसकी पंखुडियों से टपका जल अमृत समान होता है। इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान मिट जाती है। इससे पुरानी (काली) खांसी का भी इलाज किया जाता है।

Story first published: Monday, September 10, 2018, 8:00 [IST]
Desktop Bottom Promotion