नवरात्रि में बोएं जाने वाले जौ के है कई फायदे, बॉडी को करता है डिटॉक्‍स

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नवरात्रि में देवी के पूजन के साथ घटस्‍थापना की पराम्‍परा चली आ रही है। इसी के साथ जौ बोने की परम्परा भी चली आ रही है। ज्वार या जौ एक प्रकार की औषधि है, जिसे हरा खून भी कहा जाता है। इसके सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रियों में बोए जाने वाले जौ ना केवल पूजन की एक पराम्‍परा तक ही सीमित है बल्कि यदि इनका सेवन किया जाया तो ये शरीर को भी स्वस्थ रखते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि एक रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि जौ का रस सैकड़ों बीमारियों को दूर करता है। जौं का उपयोग कैसे करें जानते हैं इसी बारे में।

क्‍या होता है जौ?

क्‍या होता है जौ?

गेहूं के बोने पर जो एक ही पत्ता उगकर ऊपर आता है उसे जौ या ज्‍वारा कहा जाता है। नवरात्रि में यह घर-घर में छोटे-छोटे मिट्टी के पात्रों में मिट्टी डालकर इसे बोया जाता है।

 हेल्‍थ टॉनिक होता है इसका जूस

हेल्‍थ टॉनिक होता है इसका जूस

गेहूं के उगे जौ का रस शरीर के लिए किसी हेल्‍दी टॉनि‍क से कम नहीं है। इसमें शरीर को स्वस्थ रखने वाले पांचो तत्वों में से चारों तत्व कार्बोहाईड्रेट, विटामिन, क्षार एवं प्रोटीन पाए जाते हैं। जिस कारण से इसका सेवन कई बीमारियों के ईलाज में किया जा सकता हैं।

आंखों के ल‍िए फायदेमंद

आंखों के ल‍िए फायदेमंद

ज्वारों के रस से आंखें, दांत और बालों को बहुत लाभ पहुंचता है। कब्ज मिट जाती है, कार्यक्षमता बढ़ जाती है और थकान नहीं होती।

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 डिटॉक्‍स करता है बॉडी को

डिटॉक्‍स करता है बॉडी को

इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकेन शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर मल द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है और बवासीर के खतरे को कम करता है। यह आपको कब्ज से राहत देता है, आंतों को साफ रखता है जिससे की पेट के कैंसर की संभावना कम हो जाती है।

गठिया का दर्द

गठिया का दर्द

जौ में एंटी-इंफ़्लामेंट्री गुण होते हैं। गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों को जौ के पानी से फायदा मिलता है।

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नवरात्रियों में ऐसे उगाएं ज्‍वार

नवरात्रियों में ऐसे उगाएं ज्‍वार

नवरात्रि के मौके पर मिट्टी के नए कुंडे लें, उनमें खाद मिली मिट्टी लें। रासायनिक खाद का उपयोग बिलकुल न करें। पहले दिन कुंडे में गेहूं बोएं, ध्‍यान रखें कि ये मिट्टी छिप जाएं इतने गेंहू बोएं। पानी डालकर कुंडों को मां के कलश के पास ही रखें। सूर्य की धूप मिट्टी के इस पात्र तक नहीं पहुंचनी चाहिए। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग नहीं करना है। रोजाना पानी देने से 5 से 6 दिन में ज्वारे 5-7 इंच लंबे हो जाते हैं। ऐसे ज्वारों में अधिक गुण होते हैं। ध्‍यान रखें कि सात इंच से अधिक लंबे जौ के स्वास्थ्य लाभ कम हो जाते हैं। उनका पूरा लाभ लेने के लिए सात इंच तक बड़े होते ही उनका उपयोग कर लेना चाहिए।

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    English summary

    Sowing of Barley in Navratri, know Benefits of Jau

    Planting jowar, This tradition is also coming along with Shri Durga Puja, performed in Navaratri. Jowar or barley grass is a type of medicine. Also called green beat blood.
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