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सेल्फी लेने का जुनून लोगों को पहुंचा रहा है सर्जन के पास, रिसर्च
सेल्फी लेना और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का जुनून आजकल युवाओं में बढ़ता जा रहा है। सेल्फी में गॉर्जियस लुक पाने के लिए लोग कई सारे ब्यूटी एप्स का इस्तेमाल भी करते हैं।, लेकिन एक ताजा अध्ययन के मुताबिक सेल्फी में खुद को खूबसूरत दिखाने की ये आदत लोगों में धीरे धीरे एक लत बनती जा रही है।
रियल लाइफ और सेल्फी में एक जैसे खूबसूरत नजर आने के लिए लोग कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए उत्सुक हो रहे है।

हीन भावना से निकलने के लिए
एक ताजा अध्ययन के नतीजों के अनुसार सेल्फी लेने की प्रवृत्ति का लोगों के मनोवैज्ञानिक पर नकरात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सेल्फी में ब्यूटी एप्प के जरिए खुद को खूबसूरत दिखाने की प्रवृति की वजह से सेल्फी लेने वाले लोग अधिक चिंतित महसूस करने लगे हैं। उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है और वे शारीरिक आकर्षक में कमी महसूस करते हैं। सेल्फी के वजह से लोग खुद को हीनभावना से देखने लगे है जिसका नतीजा यह हो रहा है लोग अपनी सौंदर्यता बढ़ाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी कराने का विकल्प चुन रहे हैं।

क्या कहता है अध्ययन
एक कॉस्मेटिक क्लिनिक के तहत कराए गए अध्ययन के अनुसार लोग अब सोशल मीडिया पर बिना फिल्टर का इस्तेमाल किए सेल्फी पोस्ट करने
से कतराते है। इसे लोगों के आत्मविश्वास में कमी और हीनभावना से जोड़कर देखा जा रहा है।

बढ़ रही है एंग्जायटी
आमतौर पर सेल्फी लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के परिणाम स्वरूप मूड में गिरावट होती है और खुद की छवि को लेकर व्यक्ति की भावना में कमी आती है। जो लोग सोशल मीडिया पर अपनी सेल्फी को पोस्ट करने से पहले दोबारा सेल्फी लेते हैं या उन्हें सुधार करते हैं वे भी मूड में कमी एवं एंग्जाइटी महसूस करते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि सेल्फी पोस्ट करने वाले अधिकांश लोग अपने लुक को बदलने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी और प्रक्रियाओं से गुजरना चाहते हैं।

प्रति सप्ताह पांच घंटे सेल्फी
औसतन 16-25 वर्ष के बीच के पुरुष और महिलाएं प्रति सप्ताह 5 घंटे तक सेल्फी लेते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत प्रोफाइल पर अपलोड करते हैं। इस अध्ययन के निष्कर्षों को मानसिक स्वास्थ्य समस्यों की रोकथाम और उनके उपचार के लिए उपयोग किया जा सकता है। ये निष्कर्ष सोशल मीडिया और सेहत को लेकर महत्वपूर्ण चिंता पैदा करते हैं।

नकरात्मक भावना बढ़ा रही है
चार शहरों में किए गए अपनी तरह के इस पहले अध्ययन में पाया गया कि सेल्फी लेने, उन्हें बदलने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की प्रक्रिया आत्मसम्मान और अपने शरीर को लेकर व्यक्ति की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है और अपने शरीर को लेकर हीन भावना बढ़ाती है। अध्ययन में सामने आया है कि सोशल मीडिया के प्रति बदलते इस व्यवहार को लेकर 60 प्रतिशत पुरुषों और 65 प्रतिशत महिलाओं में एंग्जाइटी में वृद्धि देखी गई।



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