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जानिए क्या है कोरोनासोम्निया और कैसे पाएं इससे निजात
आज के समय में बहुत से लोग पहले से ही नींद से जुड़ी किसी ना किसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। खराब लाइफस्टाइल, अत्यधिक तनाव और खानपान की गलत आदतें लोगों में नींद की समस्या का कारण बनती हैं। हालांकि, कोविड-19 के बाद तनाव, दुःख और चिंता और दैनिक जीवन पर इसके प्रभाव के साथ, लोग पहले से कहीं अधिक नींद की समस्या की रिपोर्ट कर रहे हैं। एक वैश्विक महामारी में जीने के तनाव के कारण, नींद विशेषज्ञों ने नींद की इन समस्याओं को कोरोनासोम्निया करार दिया है, जो कोरोनवायरस और अनिद्रा से जुड़ी एक समस्या है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको विस्तारपूर्वक कोरोनासोम्निया के बारे में बता रहे हैं-

क्या है कोरोनासोम्निया
कोरोनासोम्निया वास्तव में आपकी नींद और कोरोना वायरस से जुड़ी एक समस्या है। कोरोनासोम्निया महामारी के दौरान नींद की समस्याओं में वृद्धि के साथ-साथ चिंता, अवसाद और तनाव के लक्षणों की विशेषता है। जबकि अनिद्रा अक्सर चिंता और अवसाद से जुड़ी होती है, कोरोनासोम्निया पारंपरिक अनिद्रा से अलग है क्योंकि यह कोविड-19 महामारी से संबंधित है। कई लोगों को इस महामारी के दौरान कोरोना के हल्के व तेज लक्षणों का सामना किया, जिससे उनके मन में एक डर व तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और इसका विपरीत असर उनकी नींद पर भी पड़ा। इतना ही नहीं, इस महामारी के दौरान लोगों के मन में वित्तीय तनाव से लेकर भावनात्मक तनाव, अपनों से दूरी, अनिश्चितता, काम काज से जुड़ी चिंताएं आदि काफी अधिक बढ़ने लगीं, जिसके कारण ठीक से नींद ना आना या रात को देर तक जागना आदि समस्याएं शुरू हुईं। इस तरह कोरोना के कारण शुरू हुई चिंता व तनाव का असर जो नींद पर हुआ, उसे ही कोरोनासोम्निया नाम दिया गया।

कोरोनासोम्निया का क्या कारण है?
कोविड-19 महामारी ने हमारे दैनिक जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है। माता-पिता और बच्चों को रिमोट स्कूलिंग के जरिए स्टडीज को एडजस्ट करना पड़ रहा है, जबकि लाखों वर्कर्स को रिमोट वर्क के जरिए काम करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, ऐसे भी लाखों लोग हैं, जिन्होंने पूरी तरह से अपनी नौकरी खो दी थी। कई लोगों ने अपनों को खोया है और बीमारी का अनुभव किया है। नौकरी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और हालात कब सामान्य होंगे, इसे लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। एक साथ इतने सारे बदलाव के साथ, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि लोगों को सोने में परेशानी हो रही है। कोरोनासोम्निया के मुख्य कारणों की बात की जाए तो इसमें बढ़ा हुआ तनाव, अपने डेली रूटीन में समझौता करना, अपनों से दूर रहना, मीडिया कंसप्शन में वृद्धि आदि ऐसे कई कारण हैं, जो कोरोनासोम्निया की वजह बनते हैं।

कोरोनासोम्निया के लक्षण
कोरोनासोम्निया होने पर व्यक्ति में कुछ लक्षण नजर आते हैं। जैसे-
• इनसोमनिया के लक्षण जैसे सोने में कठिनाई होना या रात में बार-बार नींद खुलना
• एंग्जाइटी व डिप्रेशन के लक्षण नजर अधिक आना
• रात में देरी से सोना
• नींद की कमी के लक्षण, जैसे दिन में नींद आना, एकाग्रता और फोकस में कमी और मूड खराब होना
कोविड महामारी के दौरान कई अध्ययनों ने इस बात को साबित किया कि महामारी के कारण अनिद्रा और मानसिक स्वास्थ्य विकारों की समस्या लोगों में बढ़ी है। जहां महामारी से पहले करीबन 24 प्रतिशत नींद की समस्याओं जैसे अनिद्रा या सोने की कठिनाई की समस्या से जूझ रहे थे। वहीं महामारी के दौरान यह संख्या बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि महामारी से पहले किसी भी तरह से अनिद्रा की किसी भी समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या में करीबन 37 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बदल रही हैं नींद की आदतें
ऐसा देखने में आ रहा है कि महामारी के दौरान लोगों की नींद की आदतें भी बदल गई हैं। लोग रात को सोने में कम समय और दिन में अधिक झपकी लेने में बिता रहे हैं। वे अपने सोने के समय और जागने के समय को क्रमशः 39 और 64 मिनट तक पीछे धकेल रहे हैं। नतीजतन, नींद की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। जिसके कारण भी लोगों को नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

कोरोनासोम्निया होने का रिस्क किसे अधिक है
यूं तो कोई भी व्यक्ति कोरोनासोम्निया से पीड़ित हो सकता है और उसमें इसके लक्षण विकसित हो सकते हैं, लेकिन लोगों के कुछ समूहों में इसका रिस्क बढ़ जाता है, जिनमें मुख्य हैं-
• कोविड-19 पीड़ित रोगी
• फ्रंटलाइन कार्यकर्ता
• बिना वेतन दूसरों की देखभाल करने वाले
• एसेंशियल वर्कर्स
• महिलाएं
• युवा वयस्क आदि।
इनमें भी कोविड-19 के मरीजों को नींद की समस्या की रिपोर्ट करने की सबसे अधिक संभावना है। दरअसल, कोरोना पॉजिटिव होने पर बीमारी के लक्षणों के कारण उन्हें आराम करने में कठिनाई होती है। मसलन, ऐसे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होना व खांसी आदि के कारण सही तरह से नहीं आती। इसी तरह, फ्रंटलाइन मेडिकल वर्कर, विशेष रूप से सीधे कोविड-19 रोगियों के साथ काम करने वालों में खराब नींद की गुणवत्ता, अनिद्रा, चिंता, अवसाद और परेशान नींद की दर काफी अधिक है। चूंकि, इन हेल्थकेयर वर्कर्स में कोविड-19 का अधिक जोखिम है, और इसलिए, संक्रमण के प्रति उनकी चिंता बढ़ गई है, साथ ही काम का ओवरलोड भी उनके तनाव के स्तर को बढ़ा रहा है। हेल्थकेयर वर्कर्स को पहले से ही खराब नींद का खतरा अधिक होता है, खासकर वे जो लंबे समय तक और रात भर की शिफ्ट में काम करते हैं। खराब नींद के साथ, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली से समझौता हो जाता है, जिससे उन्हें संक्रमित होने और अपना काम करने की क्षमता को कम करने का और भी अधिक जोखिम होता है।

कोरोनासोम्निया से बचाव व बेहतर नींद के उपाय
चूंकि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि बदले हुए हालातों के कारण पैदा हुई एक समस्या है। इसलिए, इससे निपटने के लिए आपको अपने जीवन में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। सौभाग्य से, ऐसी कई चीजें हैं जो आप कोरोनासोम्निया से निपटने और महामारी के दौरान बेहतर नींद लेने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अच्छी स्लीप हाईजीन को मेंटेंन करने से लेकर एक बेहतर शेड्यूल व स्ट्रेस मैनेजमेंट के जरिए नींद को बेहतर बनाया जा सकता है।
• सबसे पहले तो आप एक स्लीप हाईजीन मेंटेंन करें, जिस तरह आप ओरल हाईजीन या पर्सनल हाईजीन का ख्याल रखते हैं। बेहतर स्लीप हाईजीन के लिए आप अपने स्लीप शेड्यूल पर टिके रहें। फोन, टीवी या अन्य कारणों के चलते नींद के साथ समझौता ना करें। इसी तरह आप अपने बेडरूम को डार्क, कूल व शांत रखें ताकि आपको एक अच्छी नींद आए। लॉन्ग नैप लेने से बचें। डिनर जल्दी कर लें और अल्कोहल व कैफीन का सेवन सीमित करें। खासतौर से, बेड पर जाने से पहले कैफीन युक्त चीजों का सेवन बिल्कुल भी ना करें।
• वहीं अपना एक डेली रूटीन तय करें। जिसमें आप व्यायाम से लेकर समय पर खाना खाना व अपना पर्सनल व प्रोफेशनल काम करना है। दरअसल, जब आप एक रूटीन तय करते हैं तो आपका दिमाग खुद पर खुद आपको समय पर काम करने के सिग्नल देता है। जिससे भी तनाव कम होता है। साथ ही आपको स्लीप शेड्यूल बनाने में भी मदद मिलती है।
• एक बेहतर नींद के लिए जरूरी है कि अपने भीतर के तनाव को कम करें। इसके लिए, आप एक्सरसाइज, डीप ब्रीदिंग, योगा व मेडिटेशन करने के अलावा कुछ ऐसे काम करें, जो आपको खुशी देते हों। इसके अलावा, न्यूज से कुछ वक्त के लिए ब्रेक लें। बहुत अधिक और लगातार न्यूज देखने से भी मन-मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वहीं, सोशल डिस्टेसिंग के दौर में भी टेक्नोलॉजी के जरिए अपनों से टच बनाए रखें। इससे आपके भीतर एक पॉजिटिविटी आएगी और फिर इसका सकारात्मक असर आपकी नींद पर भी होगा।



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