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भोजन के तुरंत बाद वज्रासन करने से नहीं होती है अपच की समस्या , टमी भी रहती है फ्लैट
योग का फायदा तभी होता है जब उसे नियमों और सावधानी से किया जाए तभी उसके लाभ मिलते है, आमतौर पर योगासनों को खाली पेट या सुबह के समय करने की सलाह दी जाती है। लेकिन वज्रासन एक ऐसा आसन है, जिसे आप खाना खाने के तुरंत बाद कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप खाने के बाद वज्रासन का अभ्यास करते हैं तो इससे भोजन के पाचन में भी आसानी होती है। तो चलिए जानते हैं वज्रासन करने का तरीका और उससे होने वाले लाभों के बारे में-

करने का तरीका
वज्रासन करने के लिए घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एडि़यों को अलग रखें। अब अपने नितंबों को एडि़यों पर टिकाएं। साथ ही अपनर हथेलियां को घुटनों पर रख दें। इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें। ध्यान रखें कि इस दौरान आपके दोनों घुटने आपस में मिले हों। अब अपनी आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस अवस्था में जब तक संभव हो, आप बैठने का प्रयास करें।

जानें फायदे
वज्रासन पाचन तंत्र के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। जो लोग नियमित रूप से इसका अभ्यास करते हैं, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडिटी और अल्सर आदि की समस्या नहीं होती। इसके अतिरिक्त इस आसन के अभ्यास के दौरान व्यक्ति का पूरा शरीर खासतौर से पीठ तनी होती है, जिससे व्यक्ति की पीठ सुदृढ़ होती है और पीठ के निचले हिस्से की समस्या और साइटिका की समस्या से राहत दिलाता है।
अमूमन लोग पद्मासन में बैठकर ध्यान करते हैं, लेकिन आप व्रजासन में बैठकर भी ध्यान कर सकते हैं। इससे भी आपको लाभ होगा।
वैसे तो यह आसन हर किसी के लिए लाभदायक है, लेकिन महिलाओं को इससे विशेष फायदा होता है। सबसे पहले तो यह मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन को कम करता है। वहीं अगर कोई स्त्री गर्भवती है तो उसे भी प्रसव के दौरान पीड़ा कम होती है।

बरतें सावधानी
वैसे तो वज्रासन का अभ्यास कोई भी व्यक्ति कभी भी कर सकता है। लेकिन फिर भी इसका अभ्यास करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले तो इसका अभ्यास करते हुए अपने बॉडी पॉश्चर पर ध्यान दें। इसके अतिरिक्त अगर आपके घुटनों में कोई समस्या है या हाल ही में घुटने की सर्जरी हुई है, तो यह आसन न करें। वहीं रीढ़ की हड्डी में समस्या, हर्निया, आंतों में अल्सर होने पर भी विशेषज्ञ की देखरेख के बिना इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।



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