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Mental Health:इमोशनल डिटैचमेंट कैसे मेंटल हेल्थ को करता है प्रभावित, जाने इससे उबरने के टिप्स
कई बार मेंटल हेल्थ का इस बात से भी नाता होता है कि जब आप किसी ऐसे रिलेशन से काफी इमोशनली जुड़े हों, और वो रिश्ता खत्म कर लें, या आपसे दूर चला जाए, ऐसा भी हो सकता है कि आपका उससे काफी ज्यादा जुड़ाव हो और उसकी मृत्यु हो गई हो। अगर आपके सामने भी ऐसा कोई अपना साथी, दोस्त, रिश्तेदार या कोई भी जान पहचान का शख्स है तो आपका ये फर्ज बन जाता है कि आप उसकी मदद करें। उसे इमोशनल डिटैचमेंट से निकलने में उसकी हेल्प करें। इस तरह का अगर किसी को इश्यू है तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। ऐसे लोगों की खास देखभाल की भी जरूरत होती है।
किसी के साथ इमोशनली जुड़े होना काफी मायने रखता है। फिर उसके साथ रिश्ता खत्म हो जाना काफी तकलीफदेह हो सकता है। ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है।
इमोशनल डिटैचमेंट से जुड़े लोग अपनी भावनाओं को अपने में कैद करके अपने स्वास्थ्य के साथ अपनी लाइफ भी खराब कर रहे होते हैं, लेकिन उनको इस बात का अंदाजा नहीं होता है।
वो अपनी खुद की भवानाओं को समझ नहीं पा रहे होते कि उस पर वो रिएक्ट कैसे करें। जो उनकी सबसे बड़ी समस्या होती है।

भावनात्मक अलगाव क्या है?
इमोशनल डिटैचमेंट एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति इमोशनली खुद को दुनिया से आइसोलेट करने लगता है।
मनोचिकित्सा के नैदानिक और सांख्यिकीय मैनुअल ( Diagnostic and Statistical Manual of Psychiatry) के अनुसार, एक अलग साइकोलॉजिकल कंडीशन के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेकिन ये एक है लक्षण जो ज्यादातर डिप्रेशन के बाद के तनाव से परेशान लोगों में पाया जाता है।

भावनात्मक अलगाव रिश्तों को प्रभावित कर सकता है
इमोशनल डिटैचमेंट वाले लोगों के लिए, ये फील करने और पहचानने में असमर्थ होते है कि वो जो कर रहे है, उससे दूसरे क्या प्रतिक्रिया दे रहें हैं।
भावनात्मक अलगाव मेंटल हेल्थ को काफी हद तक परेशान करता है।
इससे पीड़ित लोगों में निराशा घर करने लगती है।
इमोशनल डिटेचमेंट से पीड़ित लोगों की पहचान
कम या ज्यादा चिड़चिड़ापन, गुस्सा
सोने के पैटर्न में बदलावभूख ना लगना
अपने आप को बुरा महसूस करना
सेल्फ डाउट में रहनाडेली रूटीन के काम मंद हो जाना
डिप्रेशन
मनोवैज्ञानिक आघात

भावनात्मक अलगाव से कैसे निपटें?
अपने इमोशन्स को पहचाने साथ ही अच्छी यादों के बारें में बात करें।
एक डायरी रखें, जिसमें अपने इस दौरान होने वाली परेशानियों का उल्लेख करें। क्योंकि आप अपने आप को अधिक जानते हैं।
सकारात्मक सोंचे आत्म-जागरूकता बढ़ाएं
अपने करीबी दोस्तों या परिवार से बिना झिझक मदद लें। उन पर भरोसा बनाएं।
शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करना छोड़ दें।
अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।
एक हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएं।
हिम्मत के साथ मनोचिकित्सक से भी संपर्क करें।*इमोशनल डिटैचमेंट के बारें में आप अधिक जानकारी किसी पेशेवर मनोचिकित्सक से जान सकते हैं। यहां जो जानकारी बताई गई है वो सामान्य जानकारी है।



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