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पुरुष अपनी मेंटल हेल्थ पर खुल कर क्यों नहीं बोल पाते ? ये कारण है महत्वपूर्ण
अच्छी मेंटल हेल्थ ऑक्सीजन जितना ही महत्वपूर्ण है। जिंदा रहने के लिए आपको इसकी जरूरत है। लेकिन ऐसे कई अलग-अलग कारण हैं जिनकी वजह से पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे डिप्रेशन के बारे में बोलने की संभावना कम होती है। बहुत से पुरुषों को ऐसा लगता है कि इसे स्वीकार करना उन्हें कमजोर बनाता है। उन्हें डर है कि उन्हें जज किया जाएगा। वे किसी चिकित्सक के पास नहीं जाना चाहते क्योंकि वे किसी अंजान के साथ अपने डिप्रेशन को शेयर नहीं करना चाहते हैं। लेकिन अगर वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं, तो दोस्तों या परिवार के सदस्यों के लिए यह जानना मुश्किल हो सकता है कि कुछ गलत हो रहा है। पुरुष हमेशा उन संकेतों को नहीं दिखाते हैं जिन्हें अक्सर डिप्रेशन से जोड़ते हैं, जैसे उदासी और निराशा। इसके बजाय, वे गुस्सा या अग्रेसिव दिखाई दे सकते हैं। नतीजतन, पुरुष इसके ट्रीटमेंट से चूक सकते हैं जिसकी उन्हें जरूरत होती है।

मेंटल हेल्थ डेली रूटीन को प्रभावित करता है
डिप्रेशन को यूं ही दूर नहीं किया जा सकता है। यह एक गंभीर मेंटल हेल्थ इश्यू है जो किसी व्यक्ति के डेली रूटीन को प्रभावित करती है, जिसमें उसके खाने, सोने, महसूस करने और सोचने का तरीका भी शामिल है। यह काम करने, स्कूल जाने और दोस्तों और परिवार के साथ संबंध बनाए रखने की उसकी क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। अवसाद कमजोरी का संकेत नहीं है, और यह किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो।

आदमी को अवसाद विकसित करने का क्या कारण होगा?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार, ये कई फैक्टर्स का एक कॉम्बिनेशन हो सकता है। शुरुआत के लिए, उनके जीन एक भूमिका निभा सकते हैं। जिन पुरुषों का डिप्रेशन की फैमली हिस्ट्री है, उनमें अवसाद के विकसित होने की संभावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है। इनवायरमेंट डिप्रेशन तनाव भी इसको को ट्रिगर कर सकता है। इसमें वित्तीय समस्याएं, किसी प्रियजन का चले जाना, काम की समस्याएं, एक कठिन रिश्ता, जीवन में बड़ा परिवर्तन या तनावपूर्ण स्थिति शामिल है। साथ ही, उन पुरुषों में भी डिप्रेशन हो सकता है जिन्हें मधुमेह, हृदय रोग या कैंसर जैसी गंभीर चिकित्सा स्थिति है।

डिप्रेशन के गंभीर परिणाम हो सकते हैं
इसका निदान करना और ट्रीटमेंट के साथ उसको फॉलो करना जरूरी है। ज़्यादातर लोगों को बेहतर महसूस करने के लिए पेशेवर मदद की ज़रूरत होती है। इसके बिना, डिप्रेशन के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि ड्रग्स या अल्कोहल के साथ सेल्फ-मेडिसिन की कोशिश करना, या इससे भी बदतर है आत्महत्या। सुसाइड भारत में एक बड़ी समस्या बना हुआ है। पुरुषों की मृत्यु महिलाओं की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। दुर्भाग्य से, हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि देश भर में आत्महत्या की दर बढ़ रही है।

प्रिय व्यक्ति को अवसाद से बाहर निकालनें में उसका साथ दें
आपको अपने भाई या फिऱ पार्टनर या और कोई भी प्रियजन से इस बारें में खुलकर बात करने की जरूरत है। हमारे जीवन में पुरुषों के लिए चुप रहकर दर्द सहना एक हेल्दी ऑप्शन नहीं है। उनसे पूछें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं, खासकर अगर उनमें से किसी ने हाल ही में एक ऐसी घटना का अनुभव किया है जो डिप्रेशन को ट्रिगर कर सकती है। अगर आप उसके व्यवहार में बदलाव देखें और डिप्रेशन के लक्षणों पर ध्यान दें। अगर आपको लगता है कि आपके प्रिय व्यक्ति को अवसाद है, तो उसे अपना समर्थन दें, उसको सुनें और अपना धैर्य बनाएं रखें। उसे अपने डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करने के लिए प्रोत्साहित करें, अवसाद के साथ रहना भारी और अलग-थलग महसूस कर सकता है, इसलिए उसे बताएं कि वे अकेले नहीं है। इससे वो बेहतर महसूस कर सकता है।



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