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खर्राटे की समस्या में ये योगासन है फायदेमंद, मलाइका अरोड़ा के ट्रेनर ने दिया सुझाव

खर्राटे एक ऐसी स्थिति है जिसका सामना बहुत से लोग करते हैं। आमतौर पर ये समस्या तब होती है जब गले में हवा का प्रवाह प्रतिबंधित हो जाता है। जिससे सांस लेने में रुकावट आने लगती है। जिससे न सिर्फ खर्राटा लेने वाले को बल्कि उनके आस-पास सोने वाले लोगों को भी इससे समस्या होने लगती है। कभी-कभी खर्राटे लेना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नाम की बीमारी से जुड़ा होता है। ये समस्या तब होती है जब गले के पिछले हिस्से की मांसपेशियां बहुत ज्यादा रिलैक्स हो जाती हैं। जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कम मात्रा में खर्राटे लेना कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है। लेकिन जब खर्राटे में तेजी बढ़ जाती है, तो यह गंभीर समस्या बन सकती है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लक्षण में दिन में ज्यादा सोना, सुबह के समय सिर में दर्द होना, हांफना या दम घुटना, सीने में दर्द होना, हाई ब्लड प्रेशर और नींद से उठने के बाद गले में खराश होना शामिल हैं।

खर्राटे से बचने के लिए योगासन
कई लोग खर्राटों को नियंत्रित करने के तरीके ढुंढते हैं। एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा के फिटनेस ट्रेनर सर्वेश शशि ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होने खर्राटों के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आपके साइड में सोने वाले लोगों को भी ये समस्या हो सकती है। आगे उन्होने बताया कि खर्राटे लेने से न केवल आपकी नींद की प्रभावित होगी, बल्कि आपके साथ या आस-पास सोने वाले लोगों को भी परेशानी होगी। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सांस लेने की गुणवत्ता पर काम करें और इन सरल प्रथाओं के साथ अपने खर्राटों को नियंत्रित करें।
इसी के साथ उन्होने कुछ आसान योगासन भी लोगों के साथ शेयर किया। ये योग आसन सांस लेने और खर्राटों से बचने में आपकी मदद करेगा। इन योगासन में धनुरासन, भुजंगासन, और भ्रामरी प्राणायाम शामिल है। यह दिनचर्या कई स्वास्थ्य लाभों के साथ आती है।

धनुरासन
धनुरासन आपकी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह परिसंचरण में सुधार, शरीर की मुद्रा को समायोजित करने और डायबिटीज के लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद करता है।
कैसे करें
धनुरासन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद पैरों को आपस में चिपकाकर रखें और हाथों को पैरों के पास रखें। अब धीरे-धीरे अपने घूटनों को मोड़े और हाथों से टखने को पकड़े। इसी के साथ सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें। इसी के साथ सीने और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। और अपने हाथों से पैरों को खीचें। इसी के साथ अपना ध्यान सांसों की गति पर केंद्रित करने की कोशिश करें। जबकि हाथ धनुष की डोरी का काम करेंगे। इसे तब तक ही करें जब तक आप आसानी से कर सकें। 15 से 20 सेकेंड तक इस पोज में रहने के बाद पहले की तरह सामान्य हो जाएं।

भुजंगासन
भुजंगासन छाती, कंधों और पेट के क्षेत्र में मांसपेशियों को खींचने में मदद करता है। यह शरीर में लचीलापन लाने में मदद करता है।
कैसे करें
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और दोनों हथेलियों को फर्श की तरफ करें। अब अपने शरीर का पूरा वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस अंदर की ओर खींचें और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचें। लेकिन इस दौरान ध्यान दें कि आपकी कुहनी मुड़ी हुई हो। इसके बाद अपने सिर को पीछे की तरफ खीचतें हुए अपनी छाती को भी आगे की तरफ निकालें, और सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें। लेकिन ध्यान दें कि आपके कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें। इसके बाद अपने हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बनाएं। अपनी बॉडी को इस पोजीशन में 15 से 30 सेकेंड तक रखें और सांस की गति सामान्य बनाए रखें। इस दौरान ऐसा महसूस करें कि आपका पेट फर्श की तरफ दब रहा है। इस पोज को छोड़ने के लिए, धीरे-धीरे अपने हाथों को वापस साइड पर लेकर जाएं। अपने सिर को फर्श पर रख दें।

भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम पीनियल और पिट्यूटरी ग्रंथियों को उत्तेजित करते हुए दिमाग के तनाव को दूर करने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से रक्तचाप को कम करने और तनाव को दूर करने में भी मदद मिलती है।
कैसे करें
इस योग आसन को करने के लिए कुछ देर के लिए अपनी आंखों को बंद कर लें। इस दौरान अपनी बॉडी में शांति और तरंगो को फील करें। अब तर्जनी ऊंगली को अपने कानों पर रखें। आपके कान और गाल के बीच अपनी ऊंगली को रखें। इसके बाद एक लंबी गहरी सांस ले और सांस छोड़ते हुए, धीरे से उपास्थि को दबा दें। अब उपास्थि को बार बार दबाकर छोड़ दें। यह प्रक्रिया करते हुए लंबी भिनभिनाने वाली आवाज निकालें। इस प्रक्रिया को 3 से 4 बार दोहराएं।



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