Latest Updates
-
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल
स्वस्थ मासिक धर्म (पीरियड्स) के लक्षण
स्वस्थ मासिक धर्म के क्या लक्षण हैं? दूसरे शब्दों में माहवारी के सामान्य लक्षण क्या हैं? माहवारी से जुडी हुई कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में प्रत्येक महिला यह सोचती हैं कि यह सामान्य है अथवा नहीं। आइए इस बारे में चर्चा करें।
जब लड़की बारह या तेरह वर्ष की होती है तब उसे पहला मासिक धर्म आता है जिसे मेनार्चे भी कहा जाता है। कुछ लड़कियों में यह आठ से नौ वर्ष की उम्र में ही प्रारंभ हो जाता है जबकि कुछ लड़कियों में यह पंद्रह से सोलह वर्ष की उम्र में प्रारंभ होता है।

महिलाओं के जीवन काल में औसतन पांच सौ बार मासिक धर्म आता है। क्योंकि प्रत्येक महिला एक दूसरे से अलग होती है अत: मासिक धर्म की अवधि भी प्रत्येक महिला में अलग होती है। किसी महिला को केवल दो दिन के लिए ही मासिक धर्म आता है जबकि किसी अन्य महिला को सात दिनों तक मासिक धर्म आता है। तो यदि आपका मासिक धर्म दो से सात दिनों के लिए आता है तो आपको चिंता नहीं करनी चाहिए।
कुछ महिलाओं का ऐसा मानना है कि प्रत्येक महीने की समान तारीख को ही मासिक धर्म आना चाहिए। यदि इसमें कुछ दिन की देरी हो जाती है तो वे घबरा जाती हैं। इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है। यह बहुत सामान्य बात है।

मासिक धर्म का चक्र इक्कीस दिन से लेकर पैंतीस दिन तक हो सकता है। परन्तु यदि यह इक्कीस दिन से कम या पैंतीस दिन से अधिक हो तो चिंता का कारण हो सकता है।
मासिक धर्म के दौरान क्लॉट्स (रक्त के थक्के) आना सामान्य है। यह गर्भाशय की लाइनिंग होती है जो मासिक धर्म के दौरान बाहर निकलती है। इसके अलावा रक्त स्त्राव भी सामान्य से लेकर बहुत अधिक हो सकता है। रक्त स्त्राव प्रत्येक महिला में अलग अलग हो सकता है।
इसके अलावा पीरियड्स (मासिक धर्म) के पहले तथा बाद में व्हाइट डिस्चार्ज आना भी अच्छा माना जाता है। यौन रूप से सक्रिय महिलाओं में तथा ऐसी महिलायें जो बच्चे को जन्म दे चुकी हैं, उनमें योनि से अधिक स्त्राव होता है।

पीरियड्स के दौरान दर्द होना सामान्य है। छोटी मोटी मरोड़ भी उठ सकती हैं। आप कमज़ोरी और असुविधा भी महसूस कर सकती हैं। हालाँकि यदि आपको बहुत अधिक दर्द हो तथा इसके साथ जी मिचलाना और उल्टी होने की समस्या भी हो तो यह सामान्य लक्षण नहीं है। यह एंडोमीट्रीओसिस या गर्भाशय में अल्सर होने के कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाएँ।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications