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    कालाष्टमी: कल इस शुभ मुहूर्त पर करें भैरव देव की पूजा, होंगी सभी मनोकामनाएं पूर्ण

    By Rupa Shah
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    Kalashtami: कालाष्टमी का महत्व, पूजा विधि और कथा | Boldsky

    हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान भोलेनाथ के स्वरुप काल भैरव की पूजा की जाती है। इसे हम कालाष्टमी और भैरवाष्टमी के नाम से जानते है। महादेव के इस प्रचंड रूप की आराधना करने से सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है और मनुष्य को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

    आपको बता दें इस बार कालाष्टमी 8 अप्रैल रविवार को है जो की बहुत ही शुभ संयोग माना जा रहा है। रविवार के दिन काल भैरव की उपासना बहुत ही लाभदायक मानी जाती है। वैसे तो शनिवार को भी भैरव देव की पूजा की जाती है।

    आज इस मौके पर हम आपको सर्वशक्तिमान शिव शंकर के इस अंश से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे।

    Kalashtami 8 april

    काल भैरव की उत्पत्ति

    माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन ही काल भैरव का जन्म हुआ था। भगवान् शिव के इस स्वरूप के उत्पत्ति के पीछे की कथा कुछ इस प्रकार है, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनो में इस बात को लेकर विवाद हो रहा था कि इन तीनो में श्रेष्ठ कौन है। इस विषय पर चर्चा करने के लिए सभी देवतागण एकत्रित हुए। समस्त देवी देवताओं इस सवाल का का हल ढूंढने की कोशिश करने लगे, तभी ब्रह्मा जी ने शिव जी के ऊपर कोई टिप्‍पणी कर दी जिसे सुनकर महादेव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उनके इसी क्रोध की अग्नि से काल भैरव उत्त्पन्न हुए। कहतें है काल भैरव ने ब्रह्मा जी के पांच मुखों में से उनका एक मुख काट दिया था जिसके पश्चात उन पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया। तब ब्रह्मा जी को अपने किए पर पछतावा होने लगा और उन्होंने काल भैरव से क्षमा मांगी जिसके बाद भोलेनाथ अपने असली रूप में आ गए।

    बाद में काल भैरव को दंड स्वरूप कई वर्षों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। माना जाता है उनका दंड वाराणसी में जाकर खत्म हुआ इसलिए इसका एक नाम दंडपानी भी है।

    एक अन्य कथा के अनुसार जब अंधकासुर नामक दैत्य का अत्याचार काफी बढ़ गया तब उसके संहार के लिये भगवान शिव के रुधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। अंधकासुर के वध के बाद शिव जी ने अपने इस स्वरुप को काशी का कोतवाल नियुक्त किया था।

    काल भैरव पूजा विधि

    नारद पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि कालाष्टमी के दिन भैरव देव की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस अवसर पर भोलेनाथ, माता पार्वती और काल भैरव की विशेष पूजा रात्रि के समय की जाती है। सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि कर लें अगर सम्भव हो तो किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें नहीं तो नहाने के पानी में ही गंगा जल डाल कर उसकी शुद्धि कर लें। व्रत का संकल्प लें फिर पितरों का तर्पण व श्राद्ध करके कालभैरव की पूजा करें। मध्यरात्रि में धूप, दीप, गंध, काले तिल, उड़द, सरसों तेल आदि से पूजा कर भैरव आरती करें। इस दिन उपवास के साथ-साथ रात्रि जागरण का भी बहुत अधिक महत्व होता है। काला कुत्ता जो भोलेनाथ के इस अंश की सवारी है उसे व्रत पूर्ण होने से पहले चार मीठी रोटी खिलाएं। ऐसी मान्यता है कि कुत्ते को भोजन कराने से काल भैरव अत्यधिक प्रसन्न होतें है।

    तंत्र साधना में, ख़ास तौर पर महादेव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व है।

    इस मंत्र से करें काल भैरव की पूजा

    ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः॥

    कालाष्टमी पूजा से मिलता है यह फल

    भगवान भैरव की महिमा का जितना भी गुणगान किया जाए उतना कम है। इनकी पूजा अत्यंत ही लाभकारी मानी जाती है जिसका वर्णन नारद पुराण में भी मिलता है। ऐसी मान्यता है कि काल भैरव की पूजा करने से मनुष्य की मनोकामना पूर्ण होती है। साथ ही हर तरह के रोग, दुःख, तकलीफ और भय से भी मुक्ति मिल जाती है। इनकी उपासना से इनके भक्तों को अदम्य साहस की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव देव की पूजा अचूक होती है।

    Kalashtami 8 april

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    शाम 19:05 से रात 20:05 तक।

    भैरव देव के अलग अलग स्वरूप

    भैरव के कई अलग अलग स्वरूप है और इनके हर एक स्वरुप की पूजा का एक विशेष महत्व है। वैसे तो भगवान के 52 स्वरुप है जिनमे उनके 8 स्वरूपों को ही मुख्य माना जाता है। आइए जानते है इनके स्वरूपों के बारें में।

    1.असितांग भैरव:इनकी पूजा करने पर मनुष्य की कलात्मक क्षमता बढ़ती है।

    2. कपाल भैरव: भगवान भैरव के इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति सभी क़ानूनी कार्रवाइयों से मुक्ति प्राप्त करता है तथा उसके सारे रुके हुए कार्य बनने लगते है।

    3.उन्मत्त भैरव: उन्मत्त भैरव की पूजा करने से मन की सारी नकारात्मकता और बुराइयों का नाश हो जाता है।

    4.क्रोध भैरव: भगवान के इस स्वरूप के आशीर्वाद से आप बुरे से बुरे वक्त को भी बड़े ही आसानी से पार कर सकतें है और आपके सभी कष्ट दूर हो जातें है।

    5.गुरु भैरव: गुरु भैरव की पूजा से विद्या और ज्ञान प्राप्त होता है।

    6.संहार भैरव: इनकी पूजा से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है।

    7.भीषण भैरव: इनकी उपासना करने से सभी बुरी आत्माओं और भूतों से छुटकारा मिलता है।

    8.चंदा भैरव: इनकी पूजा करने से आपके सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है साथ आपकी सफलता के रास्ते में आने वाली सभी बाधाएं भी दूर होती है।

    English summary

    8 April Kalashtami

    Kalashtami is dedicated to the Kaalbhairaav form of lord Shiva, the form that he had taken to kill the demon king Mahabali.
    Story first published: Saturday, April 7, 2018, 18:00 [IST]
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