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आमलकी एकादशी का व्रत है बेहद फलदायी, होती है हर मनोकामना पूरी, जानें इस शुभ दिन की तिथि और मुहूर्त
फाल्गुन महीने में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ साथ आंवले के पेड़ की भी विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी को बेहद फलदायी और शुभ माना गया है। जानते हैं इस साल आमलकी एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

आमलकी एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारंभ: 24 मार्च को सुबह 10 बजकर 23 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त: 25 मार्च को 09 सुबह 47 मिनट तक
एकादशी व्रत पारण का समय: 26 मार्च को सुबह 06:18 बजे से 08:21 बजे तक

आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी का वर्णन हिंदू धर्म के पद्म पुराण में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु के साथ ब्रह्मा और महेश तीनों का वास है। ब्रह्मा जी आंवले के ऊपरी भाग में, शिव जी मध्य भाग में और भगवान विष्णु आंवले की जड़ में निवास करते हैं। ऐसी मान्यता है कि आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। इस पूजा के प्रभाव से घर-पारिवार में सुख और प्रेम का वातावरण बना रहता है।

भगवान शिव से जुड़ा है ये खास दिन
कई स्थान पर आमलकी एकादशी का दिन रंगभरी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवों के देव महादेव रंगभरी एकादशी के दिन ही माता गौरा को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे। इस मौके पर भगवान शिव की सेना ने रंग गुलाल के साथ खुशियां मनाई थीं। ये परंपरा अब भी जारी है और हर साल इस दिन काशी में रंग गुलाल खेला जाता है। साथ ही बाबा विश्वनाथ के साथ माता गौरी का गौना कराया जाता है। शिवभक्तों के लिए ये दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये भी मान्यता है कि इस दिन बाबा के साथ होली खेलने से हर मनोकामना पूरी होती है।



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