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अनंत चतुर्दशी : 14 अनंत सूत्र का धागा बांधने से इस दिन दूर हो जाते है सारे संकट
भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इसी चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की विदाई की जाती है। साथ ही इसी दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत भी रखा जाता है और इस दिन अनंत भगवान की पूजा की जाती है।
ऐसी मान्यता है कि अनंत भगवान की पूजा करने और व्रत रखने से हमारे सभी कष्ट दूर होते हैं। इसलिए, संकटों से सबकी रक्षा करने वाला अनंतसूत्र बांधा जाता है, इससे सभी कष्टों का निवारण होता है।

इसी दिन होता है गणेश विसर्जन
अनंत चतुर्दशी, इसी दिन गणपति विसर्जन किया जाता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाता है, साथ ही पूजन के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांह में बांधा जाता है।


पांडवों ने की थी शुरुआत
मान्यता है कि पांडव अपना सारा राज-पाट जुएं में हारकर वनवास के दौरान में तकलीफ भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा था। सबने मिलकर पूरे विधि-विधान के साथ अनंत चतुर्दशी व्रत किया। इस व्रत के बाद से एक-एक कर उनके सारे संकट टल गए। तब से ये पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। इस दिन को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

व्रत की तैयारी
इस व्रत में मन के साथ अपने आसपास की और शरीर की शुद्धता का भी बहुत महत्व है, स्नान के बाद ही व्रत की तैयारियां शुरू करनी चाहिए। व्रत का संकल्प और पूजा बहते पानी के स्त्रोत के पास की जाए तो व्रत का फल पूरा मिलता है। नदी तक जाना संभव न हो तो घर पर भी कलश स्थापित कर सकते हैं. कलश पर भगवान विष्णु की फोटो स्थापित करें। पूजा की शुरुआत में भगवान विष्णु के सामने चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र खीरे जैसी किसी पवित्र वस्तु में बांधकर घुमाएं, ये समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद अनंत सूत्र को पुरुष अपने दाहिने और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें। अनंतसूत्र बांधने के बाद ही पूजा का प्रसाद ग्रहण करें।

अनंत सूत्र बांधने का मंत्र
अनंत सागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव. अनंत रूपे विनियोजितात्माह्यनन्त रूपायनमोनमस्ते.



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