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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2018: अगर पाना है माता का आशीर्वाद तो ये गलतियां करने से बचें

साल में पूरे 4 नवरात्रि होती है जिसमें महा नवरात्रि बहुत ही धूमधाम से मनायी जाती है बाकी के सभी नवरात्रों को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि में महाविद्या की गुप्त साधना की जाती है। महाविद्या माँ काली के दस भयंकर रूप है। आम तौर पर इनकी पूजा तंत्र विद्या के लिए की जाती है। वहीं नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग अलग रूपों की आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में माँ काली की पूजा ख़ास तौर पर सिद्धि प्राप्त के लिए की जाती है।
गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आते हैं पहला माघ के महीने में और दूसरा आषाढ़ के महीने में और दोनों ही नवरात्रि शुक्ल पक्ष में पड़ते हैं।

गुप्त नवरात्रि: समय, नक्षत्र और योग
जैसा कि हम सब जानते हैं साल का दूसरा आंशिक सूर्य ग्रहण 13 जुलाई, शुक्रवार को था। यह शुक्ल पक्ष का पंद्रहवा दिन था यानी ये अमावस्या तिथि थी। चूंकि अमावस्या तिथि सुबह 8:17 मिनट तक ही थी इसलिए नवरात्रि भी इसी दिन शुरू हो गए। द्वितीया तिथि में नवरात्रों की शुरुआत कभी नहीं होती। यह पुण्य नक्षत्र होगा और इसके साथ सर्वसिद्धि योग इसे और भी शुभ बना रहा है। इसके अलावा सर्वतः, रवि और अमृत योग भी रहेगा।
माता के गुप्त स्वरुप की पूजा
माता के गुप्त स्वरुप की पूजा करने के लिए यह समय सबसे शुभ माना गया है क्योंकि इस दौरान माता की पूजा गुप्त रूप से की जाती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्री कहा जाता है। इस दौरान सप्तशती पाठ करना बेहद लाभदायक होता है। बाज़ार में इस पाठ की किताब आपको आसानी से उपलब्ध हो जाएगी।
इसके अलावा इस पाठ की किताब में दिया हुआ स्रोत्र भी गुप्त नवरात्रि में पढ़ना चाहिए। इस पाठ और स्रोत्र से मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साथ ही देवी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इससे रोगों का नाश होता है और व्यक्ति को अपने हर प्रयास में सफलता मिलती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: इन बातों का रखें खास ध्यान
गुप्त नवरात्रि माँ काली की पूजा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय माना जाता है और इस पूजा का बड़ा ही महत्व होता है इसलिए भूल कर भी इसमें किसी भी प्रकार की गलती न करें। इसके लिए कुछ बातों का आपको ख़ास ध्यान रखना होगा।
1. गुप्त नवरात्रों के दौरान साधक पूरे नौ दिनों तक काले कपड़े न पहने।
2. जानवरों के चमड़े से बने कपड़ों को भूल कर भी न पहने।
3. नवरात्रों में बाल न कटवाएं इसके अलावा बच्चे के मुंडन के लिए भी यह समय शुभ नहीं माना जाता।
4. व्रतधारी भूल कर भी दिन में न सोएं। ऐसा करना बेहद अशुभ माना गया है। कहते हैं व्रत के समय दिन में सोने से मनुष्य की तपस्या भंग हो जाती है।
5. पूरे नौ दिनों तक साधक को बिस्तर पर नहीं बल्कि ज़मीन पर सोना चाहिए। सोफे या कुर्सी पर बैठना भी इस दौरान वर्जित माना गया है।
6. व्रत में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले फल और फलों का रस पी सकते हैं।
7. नौ दिनों तक लहसून प्याज़ का सेवन वर्जित माना गया है। इसके अलावा मांस मछली से भी दूर रहना चाहिए।
8. माता की प्रतिमा या मूर्ति के आगे अखंड दीप जलाना चाहिए और समय समय पर उसमें घी डालते रहना चाहिए ताकि यह ज्योत बुझने न पाए।
9. नवरात्रि के दौरान साधक को भूलकर भी किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए। ना ही गलत शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, खास तौर पर महिलाओं के साथ तो बिलकुल नहीं।
10. इन सबके साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि जितना ज़्यादा भोग आप माता को अर्पित करेंगे उतना ही ज़्यादा उनका आशीर्वाद आपको प्राप्त होगा।
गुप्त नवरात्रि में माता की पूजा करने से मनुष्य के जीवन से सभी बाधाएं दूर होती हैं और उसे ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ प्राप्त होती है। माँ काली आपके जीवन से सभी नकारात्मक और बुरी शक्तियों को दूर कर आपको अपना आशीर्वाद प्रदान ज़रूर करेंगी।



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