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Bhishma Ashtami 2021: इस व्रत से पितृ दोष होगा निवारण, सूनी कोख को मिलता है चरित्रवान संतान का आशीर्वाद

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महाभारत के अहम किरदार भीष्म पितामाह के नाम पर ही भीष्म अष्टमी का दिन समर्पित है। भीष्म अष्टमी के दिन ही भीष्म पितामाह ने अपने शरीर का त्याग किया था। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्म अष्टमी कहा जाता है। यह तिथि उत्तरायण के समय आती है। भीष्म पितामाह ने 58 दिनों तक मृत्यु की शैय्या पर लेटे रहने के बाद इसी दिन को अपने देह त्याग के लिए चुना। ये कहा जाता है उत्तरायण के दौरान जिस भी व्यक्ति की मृत्यु होती है वो स्वर्ग में जाता है। इस दिन व्रत करने का विशेष महत्व है। जानते हैं इस साल भीष्म अष्टमी किस दिन है और इस तिथि का क्या महत्व है।

भीष्म अष्टमी की तिथि

भीष्म अष्टमी की तिथि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल भीष्म अष्टमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है। साल 2021 में भीष्म अष्टमी 19 फरवरी, शुक्रवार के दिन पड़ रहा है।

भीष्म अष्टमी का शुभ मुहूर्त:

भीष्म अष्टमी का शुभ मुहूर्त:

19 फरवरी 2021

मध्याह्न समय: सुबह 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक

अवधि: 02 घंटे 16 मिनट

अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 19 फरवरी, शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से

अष्टमी तिथि समाप्त: 20 फरवरी, शनिवार दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक

भीष्म अष्टमी का महत्व:

भीष्म अष्टमी का महत्व:

हिंदू धर्म में भीष्म अष्टमी का विशेष महत्व है। किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने के लिए ये दिन बेहद शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि निःसंतान दंपत्ति द्वारा इस दिन व्रत करने से संस्कारी, चरित्रवान और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है। लोगों की आस्था है कि उन्हें इस मौके पर स्वयं भीष्म पितामाह का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

यह दिन पितृ दोष निवारण के लिए भी उत्तम बताया गया है। इस दिन जातक को भीष्म पितामह के निमित्त कुश, तिल व जल लेकर तर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

English summary

Bhishma Ashtami 2021: Date, Shubh Muhurat and Significance in Hindi

Know the date, shubh muhurat and importance of Bhishma Ashtami vrat in hindi. Read on.
Story first published: Wednesday, February 17, 2021, 13:20 [IST]