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मंगलवार विशेष: रामचरितमानस में क्यूं चमत्कारी माना जाता है सुंदरकांड का पाठ?
महाकवि तुलसीदास की रामचरितमानस में श्रीराम की प्रत्येक लीला को बड़ी ही खूबसूरती के साथ चित्रण किया हैं। रामचरित मानस अनेक खंडों में विभाजित तो है ही साथ ही यह बहुत से अध्यायों का भी संकलन है। यूं तो तुलसीदास कृत रामचरित मानस में कुल मिलाकर 7 अध्याय हैं लेकिन इन सभी में सबसे ज्यादा महत्व सुंदरकांड पाठ को माना गया है। बहुत से लोग इस बात से परिचित तो हैं लेकिन ये नहीं जानते कि ऐसा होने का कारण क्या है। इस पांचवें अध्याय को लेकर लोग अक्सर चर्चा करते हैं कि इस अध्याय का नाम सुंदरकाण्ड ही क्यों रखा गया है? और इस अध्याय का पाठ करने से क्या हैं फायदें?

श्रीरामचरित मानस में हैं 7 काण्ड
श्रीरामचरित मानस में 7 काण्ड (अध्याय- chapter) हैं। सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं।

1.
जब भी किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं।

2.
ज्योतिष के अनुसार कुंडली के दोष दूर करने के लिए और विपरीत परिस्थितियों से मुक्ति पाने के लिए सुंदरकांड का पाठ करने की सलाह देते हैं।

3.
श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है। सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है।

4.
सुंदर कांड आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है। सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।

5.
सुंदरकांड में हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुंच गए और वहां सीता की खोज की। लंका को जलाया और सीता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए।

6.
यह कांड एक भक्त की जीत का कांड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है। सुंदरकांड में जीवन के सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं।

7.
सुंदरकांड, हनुमान जी की विजय और उनकी शक्ति का प्रदर्शन करता है। इसका पाठ करने से रामभक्त हनुमान प्रसन्न भी होते हैं। शनि और राहु ग्रह भी केवल पवनपुत्र हनुमान से ही भयभीत होते हैं।

8.
मनोवैज्ञानिक तौर पर भी कहा जाए तो यह एक वजह है जिससे इसका पाठ करने वाले व्यक्तियों को मानसिक मजबूती का अहसास होने लगता है।

9.
सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को तनाव से मुक्ति मिलती है और उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा भी हासिल होती है। इससे आत्मविश्वास के साथ-साथ इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है।

10.
सुंदर कांड के पाठ से हनुमान जी के साथ श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो, सुंदर कांड के पाठ से दूर हो जाती है।



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