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मलमास 2019: इस तारीख से शुरू होगा मलमास, मांगलिक कार्यों पर लग जाएगी रोक
चातुर्मास या चौमासा में भगवान विष्णु चार माह की निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। माना जाता है कि देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की निद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्य भी शुरू होते हैं। चातुर्मास के अलावा मलमास के दौरान भी कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। मलमास को मलिन मास या अधिक मास भी कहा जाता है। दिसंबर में शुरू होने वाले मलमास के कारण अगले एक माह तक सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।

मलमास की तिथि
इस साल मलमास या अधिकमास का आगाज 16 दिसंबर से होगा जो 14 जनवरी 2020 को समाप्त होगा। तकरीबन एक महीने के लिए मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं। मकर संक्रांति के साथ ये माह खत्म होता है जब सूर्य मकर राशि में चला जाता है। इसके बाद एक बार फिर शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

मलमास में ना करें ये काम?
मलमास के दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। इन दिनों में सगाई, शादी, वधु प्रवेश, घर का निर्माण कार्य, नए घर में प्रवेश, बच्चे का मुंडन, किसी नए व्यापर की शुरुआत आदि नहीं किए जाते हैं। किसी भी अच्छे और शुभ काम के लिए गुरू का मजबूत होना जरूरी माना जाता है। वैवाहिक जीवन में सुख शांति और संतान पक्ष से प्रसन्नता प्राप्ति के लिए बृहस्पति देव को कारक माना जाता है।
सूर्य जब मीन या धनु राशि में प्रवेश कर जाता है तब बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि एक माह तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं।

मलमास में करें ये काम?
इस महीने के दौरान शुभ कार्य भले ही नहीं किये जाते हों लेकिन इस माह में दान-ध्यान आदि करना चाहिए। इस दौरान जप, तप, तीर्थ यात्रा करने का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास में भागवत कथा सुनें। दान-पुण्य का काम करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

आखिर क्या है मलमास?
मलमास को लेकर पौराणिक मान्यता है कि हर राशि, नक्षत्र, सभी 12 महीनों का कोई ना कोई स्वामी है लेकिन मलमास का कोई स्वामी नहीं है। इस महीने का कोई स्वामी ना होने के कारण इसे अधिक मास भी कहा जाता है। इस कारण मलमास में देव कार्य और पितृ कार्य करने की मनाही होती है। मान्यता है कि अधिकमास का कोई स्वामी ना होने कारण भगवान विष्णु ने इसकी जिम्मेदारी ली और इस माह में उनकी खास पूजा की जाती है।



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