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हनुमान जयंती 2018: जानिए बजरंगबली के तीन विवाह का रहस्य
प्रभु श्री राम के परम भक्त बजरंगबली का जन्मदिवस आज पूरे भारत में हिन्दू धर्म के लोग बड़े ही धूम-धाम से मनाएंगे। बल, विद्या, बुद्धि, निर्भयता और शौर्य के प्रतीक हनुमान जी को भगवान शंकर का ही एक अवतार माना जाता हैं।
इस बार यह उत्सव ख़ास हैं क्योंकि इस बार हनुमान जयंती शनिवार को हैं, जो बजरंबली की पूजा के लिए शुभ दिन माना जाता हैं, इसके अलवा मंगलवार को भी हनुमान जी की पूजा की जाती हैं।
यह त्यौहार हर वर्ष चैत्र (चैत्र पूर्णिमा) माह के शुक्ल पक्ष में 15वें दिन मनाया जाता हैं। आज इस पवित्र मौके पर हम आपको बजरंगबली के जन्म से लेकर उनके विवाह से सम्बंधित कुछ रोचक बातें बताएंगे जो शायद ही आपने सुनी या पढ़ी होगी। आइए जानते हैं।

कैसे और कब हुआ हनुमान जी का जन्म
हनुमान के जन्म के संबंध में धर्मग्रंथों में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता है कि एक बार जब केसरी ने अजंनी को वन में देखा तो वह उस पर मोहित हो गया। बाद में अंजनी गर्भवती हो गई और हनुमान को जन्म दिया । एक अन्य मान्यता है कि वायु के अंजनी के शरीर में कान के माध्यम से प्रवेश करने से अंजनी गर्भवती हो गई थी । एक अन्य कथा के अनुसार महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त जो हवि अपनी रानियों में बाँटी थी उसका एक भाग गरुड़ उठाकर ले गया और उसे उस स्थान पर गिरा दिया जहां अंजनी पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या कर रही थी। हवि खा लेने से अंजनी गर्भवती हो गई और कालांतर में उसने हनुमानजी को जन्म दिया।
वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के आदिवासियों का कहना है कि हनुमानजी का जन्म राँची जिले के गुमला परमंडल के ग्राम अंजन में हुआ था। कर्नाटकवासियों की धारणा है कि हनुमानजी कर्नाटक में पैदा हुए थे।
यूं तो सारा संसार मारुती को ब्रह्मचारी के रूप में पूजता हैं लेकिन क्या आप यह जानतें है कि उन्होंने एक नहीं बल्कि तीन तीन विवाह किए थे। आइए जानते है कौन थीं बजरंगबली की तीन पत्नियां।
सूर्यदेव की पुत्री से हुआ था पहला विवाह
हनुमान जी का पहला विवाह सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला से हुआ था। माना जाता है कि बजरंबली सूर्य देव के शिष्य थे और उन्हें सूर्य देव से नौ विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करना था। मारुती ने पांच विद्याओं का ज्ञान प्राप्त तो कर लिया किन्तु बचे हुए चार ज्ञान केवल एक विवाहित ही सीख सकता था।
नियमों का पालन करते हुए सूर्य देव ने बजरंबली को अपनी पुत्री से विवाह करने के लिए कहा और बहुत सोच विचार करने पर हनुमान जी ने विवाह के लिए हाँ कर दी। कहतें है सुवर्चला परम तपस्विनी थी इसलिए विवाह के पश्चात वह पुनः तपस्या में लीन हो गई।
अनंगकुसुमा थी बजरंगबली की दूसरी पत्नी
हनुमान जी का दूसरा विवाह लंकापति रावण की पुत्री अनंगकुसुमा से हुआ था। एक कथा के अनुसार बजरंबली ने वरुण देव की और से युद्ध करके रावण को पराजित कर उसके सभी पुत्रों को बंदी बना लिया था जिसके बाद दशानन ने अपनी पुत्री का विवाह बजरंबली से करा दिया था।
वरुण देव की पुत्री से हुआ तीसरा विवाह
ऐसी मान्यता है कि रावण के साथ युद्ध में हनुमान जी वरुण देव के प्रतिनिधि थे, इसलिए अपनी जीत से प्रसन्न होकर उन्होंने बजरंगबली का विवाह अपनी पुत्री सत्यवती से करा दिया था।
बजरंबली ने एक नहीं बल्कि तीन तीन विवाह किए थे, किन्तु उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का ही पालन किया था। उन्हें सिर्फ प्रभु श्री राम की भक्ति और उपासना में ही आनंद आता था। राज पाठ सुख-वैभव और भोग विलासता से वे हमेशा ही दूर रहते थे।
सिन्दूर से प्रसन्न होते हैं बजरंबली
ऐसा मानना है कि हनुमान जी सिन्दूर चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। लेकिन इसके पीछे भी एक कहानी छुपी हुई हैं। कहतें है एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिन्दूर भरते देखा तो उन्होंने माता से इसकी वजह पूछी इस पर देवी सीता ने उन्हें बताया कि ऐसा करने से प्रभु श्री राम प्रसन्न होंगे और उनकी आयु भी लम्बी होगी।
इतना सुनते ही बजरंगबली ने सिन्दूर लेकर अपने पूरे शरीर पर लगा लिया और श्री राम के समक्ष गए। जब भगवान ने उनसे इसके बारे में पूछा तो उन्होंने माता सीता की कही हुई बात राम जी को बता दी।
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जयंती पर रात्रि के समय हनुमान जी की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती हैं।



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