राजा महाबलि और उनकी भक्‍ति से जुड़ा है ओणम का त्योहार

दुनियाभर में भारत अपने धर्म और त्‍योहारों में विविधता के लिए जाना जाता है। हमारे देश में सालभर कोई ना कोई त्‍योहार आता रहता है। यहां पर आपको हर धर्म के लोग मिल जाएंगे और यही वजह है कि भारत में कई त्‍योहार मनाए जाते हैं। भारत में धर्म और भाषा की विविधता यह प्रमाण देती है कि हमारा देश एकता में अनेकता का प्रतीक है।

Onam 2018: जानें क्यों मनाया जाता है ओणम का त्योहार? ये है इसका महत्व | Boldsky

मॉनसून के अगस्‍त-सितंबर के महीने में कई धर्मों के खास त्‍योहार मनाए जाते हैं। सभी समुदाय अपने रीति-रिवाज़ों से इन त्‍योहारों को मनाते हैं। देशभर के कई हिस्‍सों में इस दौरान कोई ना कोई त्‍योहार मनाया जाता है।

onam 2018

उत्तर भारत में सावन का महीना चल रहा होता है तो वहीं दक्षिण भारत में लोग उनके लोकप्रिय त्‍योहार ओणम की तैयारियों में जुटे होते हैं। ये त्‍योहार मलयाली हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है। ये केरल राज्‍य का आधिकारिक त्‍योहार माना जाता है। मलयाली पंचांग के अनुसार हर साल छिंगम महीने के पहले सप्‍ताह में ओणम का त्‍योहार मनाया जाता है। वहीं ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ओणम अगस्‍त-सितंबर में आता है। इस साल ओणम का त्‍योहार 25 अगस्‍त, 2018 को मनाया जाएगा।

केरल में ये त्‍योहार नए साल की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक त्‍योहार से ज़्यादा ओणम एक सांस्‍कृतिक पर्व है जोकि मौसम की फसल के लिए मनाया जाता है। इस त्‍योहार को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है।

वामन और महाबलि की कहानी

कश्‍यप के पड़पोते महाबलि ने एक बार देवताओं को पराजित कर उनका सिंहासन अपने अधीन कर लिया था। सभी देवता गण सहायता हेतु भगवान विष्‍णु की शरण में गए। तब भगवान विष्‍णु ने कहा कि वो महाबलि के प्राण नहीं ले सकते क्‍योंकि वो उनका भक्‍त है। हालांकि, उसने अपने जीवन में कई पाप कर्म भी किए हैं। इसलिए भगवान विष्‍णु ने कहा कि वो अपने इस भक्‍त की भक्‍ति की परीक्षा लेने के बाद ही कोई निर्णय करेंगे।

महाबलि ने एक यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें वो सभी की इच्‍छाओं को पूरा कर रहे थे। भगवान विष्‍णु ने महाबलि की भक्‍ति की परीक्षा लेने के लिए वामन नामक एक बौने व्‍यक्‍ति का अवतार लिया। वामन ने महाबलि के सामने अपने तीन कदम की धरती मांगी। महाबलि ने हां कर दी लेकिन वहां बैठा हर व्‍यक्‍ति चौंक गया क्‍योंकि वामन ने विशाल आकार धारण कर महाबलि के पूरे साम्राज्‍य पर कब्‍ज़ा कर लिया। उनका दूसरा कदम देवलोक यानि आकाश पर गया। इस तरह देवताओं को अपना देवलोक और सिंहासन मिल गया और महाबलि की सारी ताकत और साम्राज्‍य चला गया।

तीसरे कदम के लिए महाबलि ने भगवान विष्‍णु के आगे अपना मस्‍तक झुका दिया और यही भगवान विष्‍णु के लिए महाबलि की भक्‍ति का प्रमाण था। म‍हाबलि की भक्‍ति से प्रसन्‍न होकर भगवान विष्‍णु ने उसे साल में एक बार अपने साम्राज्‍य में आने की अनुमति दी। ओणम के अवसर पर हर साल केरल के लोग अपने राजा के आगमन की खुशी मनाते हैं।

केरल की कहानी

अन्‍य कथा के अनुसार एक राजा था कारताविरया जो अपनी प्रजा पर खूब अत्‍याचार करता था। उसके अत्‍याचार से साधु-संत भी नहीं बच पाए थे। पृथ्‍वी को उसके अत्‍याचारों से बचाने के लिए भगवान विष्‍णु ने परशुराम का अवतार लिया। जब परशुराम अपने घर से दूर थे और उनकी मां घर पर अपनी गाय और उसके बछड़े के साथ अकेली थीं तब कारताविरया गाय के बछड़े को अपने साथ ले गया।

ये खबर सुनते ही भगवान परशुराम सीधा राजा के पाए गए और उन्‍हें युद्ध के लिए ललकारा। राजा की हत्‍या के बाद परशुराम जी ने अपनी कुल्‍हाड़ी को समुद्र में फेंक दिया था। जिस स्‍थान पर वो कुल्‍हाड़ी गिरी थी आज वहीं पर केरल राज्‍य बसा है। आज केरल के लोग हर साल इस दिन को नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं।

ओणम का त्‍योहार

ओणम का त्‍योहार दस दिन तक मनाया जाता है। इन दस दिनों के नाम इस प्रकार हैं – अथम, चिथिरा, चोधी, विशाकम, अनिझम, थ्रिकेटा, मूलम, पूरदम, उथरादोम और थिरुवोनम। केरल में कोच्चि के वामनमूर्ति त्रिकारा मंदिर में इस त्‍योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यहां पर इस मौके पर नावों की रेस लगती है जिसे वल्‍लामकल्‍ली के नाम से जाना जाता है।

इसके अलावा इस त्‍योहार के दौरान ओनाकलिक खेल भी खेला जाता है। इस त्‍योहार पर ओनासाद्या खास व्‍यंजन बनता है जोकि 26 व्‍यंजनों का समावेश होता है। इससे ओणम का त्‍योहार और भी खास बन जाता है।

Story first published: Wednesday, August 22, 2018, 10:30 [IST]
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