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शरद पूर्णिमा: आंखों और सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में काफी मान्यताएं है। इस दिन को शुभ दिन की तरह देखा जाता है। इस दिन काफी धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इसके अलावा ये दिन न सिर्फ धार्मिक बल्कि स्वास्थय की दृष्टि से भी ये दिन बहुत मायने रखता है।
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणें अमृत वर्षा करती है। यह अमृत वर्षा शरीर के लिए बहुत गुणकारी होती है। दशहरा के बाद से ही चंद्रमा की किरणें औषधियुक्त हो जाती हैं।

दशहरे से शरद पूर्णिमा तक देंखे चंद्रमा
आपकी आंखों की रोशनी कम हो रही है तो नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा को देखकर एकटक देखें।

खीर खानी चाहिए
आपकी इन्द्रियां अगर शिथिल हो गई हैं तो उन्हें पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चांदनी में रखी खीर खानी चाहिए। इससे इन्द्रियां पुन: ऊर्जावान हो जाती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र देव और मां लक्ष्मी को भोग लगाने के बाद वैद्यराज अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना चाहिए कि हमारी इन्द्रियों का तेज-ओज बढ़ाएं।

अस्थमा मरीजों के लिए वरदान
अस्थमा के मरीजों के लिए शरद पूर्णिमा वरदान की रात होती है। इस दिन रात को सोना नहीं चाहिए। चांदनी में रखी खीर का सेवन करने से दमे का दम निकल जाएगा।

चंद्रमा का गहरा प्रभाव
पूर्णिमा और अमावस्या पर चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। जब चन्द्रमा इतने बड़े समुद्र में उथल-पुथल कर उसे कंपायमान कर देता है तो जरा सोचिए कि हमारे शरीर में जो जलीय अंश है। सप्तधातुएं हैं और सप्त रंग हैं उन पर चन्द्रमा का कितना गहरा प्रभाव डालेगा।

शारीरिक संबंध न बनाएं इस दिन
शरद पूर्णिमा के दिन अगर आप काम-विलास में लिप्त रहें तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी होती है। इसलिए इससे दूर रहना चाहिए। शरद पूर्णिमा पर पूजा, मंत्र, भक्ति, उपवास, व्रत आदि करने से शरीर तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि आलोकित होती है।

ये एक्सरसाइज करें
शरद पूर्णिका की रात को चंद्रमा की रोशनी में सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।



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