Latest Updates
-
Papmochani Ekadashi Wishes: विष्णु जी का आशीर्वाद मिले...पापमोचनी एकादशी पर प्रियजनों को दें ये शुभकामना संदेश -
Papamochani Ekadashi Wishes in Sanskrit: पापमोचिनी एकादशी पर शेयर करें ये दिव्य संस्कृत मंत्र और संदेश -
पापमोचिनी एकादशी पर 10 मिनट में बनाएं चटपटे व्रत वाले आलू, स्वाद ऐसा कि हर कोई पूछेगा रेसिपी -
क्या Papmochini Ekadashi के दिन बाल धो सकते हैं? जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें -
कौन थी 'फ्यूंली' जिसकी याद में मनाया जाता है फूलदेई त्योहार? पढ़ें भावुक लोककथा -
कौन हैं कुलदीप यादव की होने वाली पत्नी? मेहमानों के लिए शाही इंतजाम, 6000 की प्लेट और पहाड़ी 'कंडाली का साग' -
क्या फिर सच हो रही बाबा वेंगा की भविष्यवाणी! इजराइल-ईरान युद्ध के बीच LPG संकट की आहट -
Phool Dei 2026: उत्तराखंड की देहरियों पर कब बरसेंगे फूल? जानें 'फूलदेई' त्योहार की तिथि, महत्व और परंपरा -
शनिवार को तेल खरीदना शुभ या अशुभ? जानें धार्मिक कारण और पौराणिक कथा -
Hindu Nav Varsh 2026: कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष? जानें विक्रम संवत 2083 की तिथि और महत्व
जानिये कृष्ण जी को क्यूं प्रिय था मोरपंख का मुकुट पहनना
मोर पंख श्री कृष्ण को इतना प्रिय है कि वह उनके श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है। इसीलिए श्री कृष्ण को मोर्मुकुत धारी के नाम से भी बुलाया जाता है। मोर का पंख कृष्ण हमेशा अपने मुकुट पर धारण करते हैं।
सारे देवताओं में सबसे ज्यादा श्रृंगार प्रिय है भगवान कृष्ण। उनके भक्त हमेशा उन्हें नए कपड़ों और आभूषणों से लादे रखते हैं।
यही नहीं कृष्ण का नाम जुंबा पर आते ही उनकी बाल छवि या युवा छवि सामने आ जाती है। जिसमें उन्हों ने खूब सारे आभूषण पहन रखे हैं, और साथ में मस्तक पर मोर पंख धारण कर रखा है।
मोर पंख श्री कृष्ण को इतना प्रिय है कि वह उनके श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है। इसीलिए श्री कृष्ण को मोर्मुकुत धारी के नाम से भी बुलाया जाता है। मोर का पंख कृष्ण हमेशा अपने मुकुट पर धारण करते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों है कि कृष्ण मोर के पंख से इतना प्रेम करते हैं। आज हम ऐसी ही कुछ कहानियों और कथाओं के बारे में जानेंगे कि आखिर क्यों कृष्ण को मोर पंख प्रिये है?

कृष्ण और मोर का नृत्य
एक बार कृष्ण अपने दोस्तों के साथ जंगल में सो रहे थे। तभी कृष्ण की आँख खुली और देखा की मौसम बहुत अच्छा है। यह देख कर उन्हों ने बांसुरी बजाना शुरू कर दिया। जिसके संगीत से सारे पशु पक्षी नाचने लगे। उनमें कुछ मोर भी थे जो नाच रहे थे। जब संगीत ख़त्म हुआ तो मोरों के राजा कृष्ण के पास गए और अपने पंख तोड़ कर जमीन पर गिरा दिए। इन पंखों को उन्हों के कृष्ण को गुरुद्दिना के रूप में दिए। जिसे कृष्ण ने खुशी ख़ुशी स्वीकार कर लिया और कहा कि इसे कृष्ण अपने बालों पर सजा लें। इस पर कृष्ण ने कहा कि वे हमेशा यह पंख अपने मुकुट पर पहनेगें।

सात रंग
मोरपंख में सभी तरह के रंग पाए जाते हैं, गहरे और हल्के। भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख के इन रंगों के माध्यम से सही संदेश देना चाहते हैं। हमारा जीवन भी इसी तरह के सभी रंगों से भरा पड़ा है। कभी चमकीला तो कभी हल्का, इसी तरह जीवन में भी इन रंगों के भांति कभी सुख आते हैं और कभी दुःख।

स्कंद के शुभेच्छु
भगवान विष्णु और देवी पार्वती का भाई बहन का रिश्ता है, क्योंकि विष्णु ने देवी पार्वती से शिव की शादी करने के लिए भगाया था। इसीलिए कृष्ण कार्तीकेया के मामा हुए, और कार्तिकेय मोर की सवारी करते हैं। यही कारण है कि कृष्ण अपने मुकुट पर मोर पंख धारण करते हैं जिससे उनके भतीजा साड़ी मनोकामना पूरी हो और वो युद्ध के राजा कहलाएं।

श्री राम और मोर
भगवान श्री राम का जन्म जब त्रेता युग में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान श्री राम एक बार घूमने निकलें तो मोर के एक समूह ने पंखों से उनका रास्ता साफ़ किया था। मोरों की इतनी निर्दयता और भक्ति को देखकर श्री राम ने मोरों से वादा किया कि द्वापर युग में जब वे फिर से जन्म लेंगे तो यह मोर पंख वे अपने मस्तक पर धारण करेंगे। इसीलिए जब कृष्ण ने द्वापर युग में जन्म लिया तो मोर पंख को अपने मुकुट पर सजाया और अपना वादा पूरा किया।



Click it and Unblock the Notifications











