Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई
क्यों खराब नहीं होता है गंगाजल, जाने इसके पवित्र होने की असल वजह
हिंदू धर्म में गंगा नदी को पवित्र नदी होने के साथ ही देवताओं की नदी कहा गया है, यही कारण है कि आज भी हर मांगलिक कार्य में गंगाजल का उपयोग किया जाता है। हिंदू धर्म में बच्चें के जन्म से लेकर मनुष्य की मुत्यु तक गंगाजल की मुख्य भूमिका होती है। समय-समय पर गंगाजल की आवश्यकता होती है, यही वजह है जब भी कोई व्यक्ति गंगास्नान के लिए हरिद्वार जाता है तो वह पवित्र जल को किसी चीज में लेकर अपने साथ जरूर आता है।

हर हिंदू परिवार में गंगाजल के बोतल या कंटेनर भरा हुआ मिलना आम पाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि सालो बोतल में बंद होने के बाद भी गंगा का पानी कभी खराब क्यूं नहीं होता है जबकि सामान्य जल बोतल में कई दिनों तक बंद रहने की वजह से या तो खराब हो जाता है या कीड़े पड़ जाते है।
इस बात पर तो वैज्ञानिक भी काफी रिसर्च कर चुके हैं। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के बाद यह बात प्रमाणित की है कि गंगा का पानी कभी ना खराब होने का कारण उसमें मौजूद एक वायरस है। आइए जानते है आखिर किन कारणों की वजह से कभी भी गंगाजल खराब नहीं होता है?

जड़ी बूटियों की वजह से
वैज्ञानिक बताते हैं कि हरिद्वार में गोमुख- गंगोत्री से आ रही गंगा के जल की गुणवत्ता पर इसलिए कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि यह हिमालय पर्वत पर उगी हुई अनेकों जीवनदायनी उपयोगी जड़ी-बूटियों, खनिज पदार्थों और लवणों को स्पर्श करता हुआ आता है। वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि हिमालय की कोख गंगोत्री से निकली गंगा के जल का ख़राब नहीं होने के कई वैज्ञानिक कारण भी हैं।

वैज्ञानिक शोध
वैज्ञानिकों का मानना है कि गंगा के पानी के भीतर एक ऐसा वायरस है जो जल को निर्मल रखता है। इस वायरस की वजह से ही गंगा का पानी कभी खराब नहीं होता, उसमें सड़न नहीं पैदा होती। आप कितने ही दिन क्यों ना गंगाजल को स्टोर करके रख लें, वह कभी बदबू नहीं मारेगा।

सल्फर की मात्रा
गंगा के पानी में गंधक (सल्फर) की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है; इसलिए भी यह ख़राब नहीं होता। इसके अतिरिक्त कुछ भू-रासायनिक क्रियाएं भी गंगाजल में होती रहती हैं, जिससे इसमें कभी कीड़े पैदा नहीं होते।
यही कारण है कि यह पानी सदा पीने योग्य माना गया है।

1890 से हो रहा है रिसर्च
अंग्रेजों के समय वर्ष 1890 में अर्नेस्ट हैंकिंग गंगा के पानी पर अनुसंधान कर रहे थे। उस समय भयंकर महामारी हैजा की बीमारी फैली हुई थी। शवों को गंगा नदी में बहाया जा रहा था, हैंकिंग को भय था कि कहीं जो लोग स्नान करने नदी में आते हैं वे भी कहीं हैजा पीड़ित ना हो जाएं। लेकिन जब हैंकिंग ने उस पानी को टेस्ट किया, उस पर रिसर्च की तो उसने पाया कि वह पानी एकदम शुद्ध था, उसमें किसी प्रकार का कोई बैक्टीरिया या कोई अन्य कीटाणु नहीं थे। ऐसे में हैंकिन को अपने शोध से ये बात समझ में आ गई कि गंगाजल कोई सामान्य जल नही है।

निंजा वायरस की वजह से
हैंकिंग ने करीब 20 वर्ष तक इस रिसर्च को आगे बढ़ाया। उन्होंने यह पाया कि गंगा के पानी में मौजूद वायरस किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता। उन्होंने इस वायरस को निंजा वायरस का नाम दिया था। आधुनिक विज्ञानिकों ने भी इस निंजा वायरस के अस्तित्व को स्वीकार किया और उसे ही गंगाजल की निर्मलता का कारण माना।

गंगाजल में स्नान-
गंगा नदी में तैरकर स्नान करने वालों को स्नान का विशेष लाभ होता है। गंगाजल अपने खनिज गुणों के कारण इतना अधिक गुणकारी होता है कि इससे अनेक प्रकार के रोग दूर होते हैं। गंगा नदी में स्नान करने वाले लोग स्वस्थ और रोग मुक्त बने रहते हैं। इससे शरीर शुद्ध और स्फूर्तिवान बनता है। भारतीय सभ्यता में गंगा को सबसे पवित्र नदी माना जाता है। गंगा नदी के पानी में विशेष गुण के कारण ही गंगा नदी में स्नान करने भारत के विभिन्न क्षेत्र से ही नहीं बल्कि संसार के अन्य देशों से भी लोग आते हैं। गंगा नदी में स्नान के लिए आने वाले सभी लोग विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति पाने के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश आकर मात्र कुछ ही दिनों में केवल गंगा स्नान से पूर्ण स्वस्थ हो जाते हैं।

शास्त्रानुसार गंगा का महत्त्व
शास्त्रों में गंगा को मुक्तिदात्री माना गया है, इसलिए जीवन के अंतिम समय में व्यक्ति के मुंह में दो बूंद गंगा जल व तुलसी डालने की प्रथा रही है। भगीरथ ने गंगा जल के स्पर्श मात्र से अपने पूर्वजों का उद्धार करा दिया था। यूं तो गंगा जल में हमेशा ही दिव्य चैतन्य प्रवाहित होता रहता है लेकिन मुख्य तिथियों जैसे कि कुंभ, ग्रहण, पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति और एकादशी पर तो इसकी दिव्यता में और भी वृद्धि हो जाती है। इसलिए इन तिथियों में गंगा जी का सान्निध्य विशेष लाभकारी माना गया है। आज भी हर मांगलिक कार्य गंगाजल के बिना अधूरा होता है।

ऐसे धरती पर आई थी गंगा
‘गंगा' की तो ये इसके विषय में माना जाता है कि यह स्वर्ग की नदी है, जिसे भागीरथ अपने तप से धरती पर लेकर आए थे। उस समय गंगा नदी का वेग इतना तेज था कि उसे नियंत्रित करने के लिए स्वयं भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में बांध लिया था। गंगा समस्त नदियों में सबसे प्रमुख स्थान रखती है, वह मनुष्य के पाप धोती है, उसे मोक्ष की ओर ले जाती है। यही वजह है कि हिन्दू धर्म में शव के अंतिम संस्कार से पूर्व उसके मुख में गंगाजल रखा जाता है, अस्थियों को गंगाजल में ही प्रवाहित किया जाता है। इतना ही नहीं हिन्दू धर्म के अंतर्गत किया गया कोई भी कार्य गंगाजल के बिना अधूरा ही रहता है।



Click it and Unblock the Notifications