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प्रार्थना की शक्ति
प्रार्थना की क्या शक्ति है?, यह कहां से आती है?, क्या ये दिमाग से ही आती है या बाहरी तत्वों से शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है? आदि मुद्दों पर पिछले कई वर्षो से बहस होती आ रही है। खैर जो भी प्रार्थना मन को सुकून देने का अच्छा तरीका है जो हमारे शरीर को कई तरीके से लाभ प्रदान करता है।
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अगर आप या आपका बच्चा प्रार्थना की शुरूआत करता है तो सबसे पहले मन को शान्त करिए। अगर आप ऐसा करने में असफल है तो किसी बाहरी शक्ति, देवी, मूर्ति आदि के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, इससे आपको अंदरूनी शक्ति मिलेगी। प्रार्थना करने से आप समझ सकते है कि आपको क्या चाहिये, आप खुद से बातचीत कर सकते है, आपका मन स्थिर हो जाएगा और दिमाग को सुकून मिलेगा। सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

कभी प्रार्थना करते समय भ्रमित न रहें, प्रार्थना इस प्रकार करें कि आप किसी भी नए माहौल या जगह पर भी आराम से बैठकर ध्यान दे पाएं। प्रार्थना, आपकी उम्मीदों और आशाओं को व्यक्त करने का तरीका होता है जो ब्रह्माण्ड में आपकी उपस्थिति दर्शाता है। जब आप दिल से प्रार्थना करते है और जो भी मांगते है तो उस काम को करने के लिए आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है और आप उस दिशा में कुछ भी कर सकते है।
हनुमान चालीसा पढ़ने का लाभ
प्रार्थना, हमेशा पूर्ति के लिए की जाती है। कभी भी भिखारी बनकर प्रार्थना न करें, बल्कि ईश्वर में पूर्ण आस्था रखें और मांगे कि आपको उस कार्य को करने की शक्ति और समझ मिलें। ईश्वर के समक्ष सदैव एक बच्चा बनकर प्रार्थना करें, मान लें कि वह आपके पिता है और आपको उनसे कुछ लेना है, आप जानते है कि वह आपके साथ कभी कुछ गलत नहीं करेगें तो आप उनसे हर बात बता सकते है। प्रार्थना हमेशा करें, अगर आपको लगता है कि प्रार्थना से कोई लाभ नहीं है फिर भी प्रार्थना करते रहें और हमेशा सकारात्मक रहें।
लगातार प्रार्थना करने से मन में दृढ़ता आती है। आपको रिश्तों की वैल्यू समझ में आती है, आप सफलता, असफलता और जीवन के हर पहलू से अवगत हो जाते है। जिन्दगी में आने वाली कठिनाईयों से लड़ने की ताकत मिलती है, घाटा, दुख, कमी, असफलता, आंसू आदि से दूर रहने की शक्ति मिलती है। प्रार्थना से मन में सुविचार आते है और अंर्तआत्मा को शांति मिलती है।



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