महिलाएं क्‍यूं पहनती हैं मंगलसूत्र

अगर एक हिंदू महिला शादी-शुदा है तो, उसे इस बात का सुबूत देने के लिये ऐसी कई सारी चीजे़ पहननी और लगानी पड़ती है जिससे कि लोग कह सकें कि वह शादी के बंधन में बंध चुकी है। कानों की बालियों से ले कर पैरों में बिछुए तक और गले से लटकता मंगलसूत्र आदि तक, हर चीज पहनना आवश्‍यक होता है। इन सब गहनों में जो सबसे खास गहना होता है वह है मंगलसूत्र। मंगलसूत्र की तुलना किसी अन्‍य आभूषण से नहीं की जा सकती। प्राचीन काल से मंगलसूत्र की बड़ी महिमा बताई गई है।

मंगलसूत्र को विवाह का प्रतीक चिन्ह और सुहाग की निशानी माना जाता है। इसलिए विवाह के बाद सुहागन स्त्रियां इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करती हैं। महिलाएं इसे अपने से अलग तभी करती हैं जब पति इस दुनिया में न हो या दोनों के बीच संबंध समाप्त हो जाए। मंगलसूत्र धारण करने का यह नियम परंपरागत तौर पर सदियों से चला आ रहा है। इसके पीछे मंगलसूत्र में मौजूद चमत्मकारी गुण का होना है।

मंगलसूत्र का क्‍या महत्‍व है

Why Hindu Women Wear Mangalsutra

1. मंगलसूत्र कई राज्‍यों में अलग अलग नामों से पुकारा जाता है पर इसका महत्‍व हर जगह एक ही होता है। मंगलसूत्र पति के प्रति प्रेम और आदर का चिह्न होता है। मान्यता है कि इससे पति पर आने वाली विपत्तियां दूर होती है।

2. ऐसा कहा जाता है कि मंगलसूत्र सोने का बना हुआ होता है, जिस वजह सोने का हिस्‍सा माता पार्वती को दर्शाता है और उसमें लगी हुईं काली मोतियां भगवान शिव को दर्शाती हैं। सोना महिला में तेज ऊर्जा का प्रवाह करता है और मंगलसूत्र के काले मोती उसे बुरी नजर से बचाते हैं।

3. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोना गुरू के प्रभाव में होता है। गुरू ग्रह को वैवाहिक जीवन में खुशहाली, संपत्ति एवं ज्ञान का कारक माना जाता है। यह धर्म का कारक भी है। काला रंग शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि स्थायित्व एवं निष्ठा का कारक ग्रह होता है। गुरू और शनि के बीच सम संबंध होने के कारण मंगलसूत्र वैवाहिक जीवन में सुख एवं स्थायित्व लाने वाला माना जाता है।

4. हर स्त्री को मंगलसूत्र विवाह पर पति द्वारा पहनाया जाता है जिसे वह स्त्री पति की मृत्यु पर ही उतार कर पति को अर्पित करती है। उसके पूर्व किसी भी परिस्थिति में मंगलसूत्र को सउतारना मना है। इसका खोना या टूटना अपशकुन माना गया है।

Story first published: Thursday, November 14, 2013, 17:03 [IST]
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