Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय -
माचा नहीं हल्दी, केल नहीं मोरिंगा: विदेशी सुपरफूड्स से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं भारत के ये 5 देसी खजाने -
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी
उत्तराखंड के इस मंदिर में चिठ्ठी लिखने पर पूरी हो जाती है मनोकामना
देव भूमि उत्तराखंड की धरती पर गोलू देवता पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के बीच में पडता है। यहां केवल चिट्ठी भेजने से ही मुराद पूरी हो जाती है
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है क्योंकि इस पहाड़ी इलाके में पग पग पर कोई ना कोई मंदिर जरुर ही मिल जाएगा और हर मंदिर की अपनी ही महिमा है।
देव भूमि उत्तराखंड में कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर है जिनके दर्शन करने हजारों किमी से लोग आते है। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिनके यहां सिर्फ चिट्ठी भेजकर भी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आपको सुनकर यकीन नहीं हो रहा होगा न सिर्फ चिट्ठी से भेजने से मुरादें पूरी होती है। जी हां, आइए आपको बताते है इस अनोखे मंदिर के बारें में
देव भूमि उत्तराखंड की धरती पर गोलू देवता नामक क्षेत्रीय देवता का मंदिर है जो सिर्फ आस-पास के गांवों में ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के बीच में पड़ता है। यहां केवल चिट्ठी भेजने से ही मुराद पूरी हो जाती है।

परेशानी हो तो भेजे चिट्ठी
कहा जाता है कि गोलू देवता इंसाफ के देवता हैं ,जिसे भी कोई मुश्किल होती है या फिर किसी के बारे में कोई शिकायत, तो वो गोलू देवता को एक अर्जी में सब कुछ लिखकर चढ़ा देता है, इस मंदिर को घंटी वाला मंदिर भी कहते है, क्योंकि अर्जियों के साथ-साथ श्रद्धालु अपनी आवाज़ गोलू देवता तक पहुंचाने के लिए मंदिर के प्रांगण में घंटियां भी बांधते हैं।

उत्तराखंड में न्याय का देवता
गोलू देवता को पूरे उत्तराखंड में न्याय का देवता माना जाता है। जो आदमी कोर्ट- कचहरी से उम्मीद खो बैठता है, वो अपनी अर्जी गोलू देवता के दरबार में लगा देता है। अब अर्जी तो अर्जी है प्रॉपर तरीके से ही लगानी होती है। इसलिए स्टाम्प पेपर पर नोटरी वगैरह के साइन करा कर के गोलू देवता के नाम पर चिट्ठी लिखी जाती है। लेकिन कुछ लोगों का कहना ये भी है कि भगवान तो सबके मन की बात जानते हैं तो वो कागज के छोटे से टुकड़े में ही अपनी समस्या लिख कर लटका देते हैं। एक नियम ये भी है कि दूसरे की लटकायी चिट्ठी को कभी पढ़ना नहीं चाहिए।

गोलू देवता की कहानी
जैसा कि हर मंदिर की विशेषता के पीछें एक कहानी होती है उसी तरह इस मंदिर की भी एक अपनी कहानी है। जी हां, गोलू देवता या भगवान गोलू उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र की प्रसिद्ध पौराणिक देवता हैं। मूल रूप से गोलू देवता को गौर भैरव (शिव) के अवतार के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि वह कत्यूरी के राजा झाल राय और कलिद्रा की बहादुर संतान थे, ऐतिहासिक रूप से गोलू देवता का मूल स्थान चम्पावत बताया जाता हैं।

अन्य काहानी
एक अन्य कहानी के मुताबिक गोलू देवता चंद राजा, बाज बहादुर 1638-1678 की सेना के एक जनरल थे और किसी युद्ध में वीरता प्रदर्शित करते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी, उनके सम्मान में ही अल्मोड़ा में चित्तैई मंदिर की स्थापना की गई।

घंटियों वाले देवता
गोलू देवता को घंटियों वाले देवता के रुप में भी जाना जाता हैं। कई घंटियां तो 50-60 या उससे भी ज्यादा पुरानी हैं। लोग मंदिर में आकर 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर लिखित में अपनी-अपनी अपील करते हैं और जब उनकी अपील पर सुनवाई हो जाती है तो वे फीस के तौर पर यहां आकर घंटियां तथा घंटे बांधते हैं।



Click it and Unblock the Notifications