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पेनिस म्यूज़ियम: जहां जानवरो, मछलियों और इंसानो के 300 लिंगों को संग्रहित करके रखा गया हैं
आइसलैंड मे स्थित ‘आइसलैंडिक फैलोलॉजिकल म्यूजियम’ अपने आप में अनोखा है क्योकि यह दुनिया का इकलौता म्यूज़ियम है जहां मछलियो, जानवारों से लेकर इंसानो तक के लिंग (जननांग) का संग्रह किया गया है।
म्यूजियम नाम सुनते ही आप इतिहास के झरोखों में पहुंच जाते हैं, जहां आपने रियासतकाल या बाबा आदम के जमाने के अवशेष देखने को मिलते होंगे। दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ आपको अनोखा म्यूजियम देखने को मिल जाएगा। कॉइन म्यूजियम और शिप म्यूजियम के बारे में सुनने को मिल जाता है। आज हम आपको दुनिया के अनोखे म्यूजियम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने आज से पहले कभी सुना नहीं होगा, ये है पेनिस म्यूजियम। सुनकर हंसी आ रही होगी कि ये कैसा म्यूजियम हैं?
जी हां आइसलैंड की राजधानी रेक्जाविक मे स्थित 'आइसलैंडिक फैलोलॉजिकल म्यूजियम' (The Icelandic Phallological Museum) अपने आप में अनोखा है क्योकि यह दुनिया का इकलौता म्यूज़ियम है जहां मछलियो, जानवारों से लेकर इंसानो तक के लिंग (जननांग) का संग्रह किया गया है।
इस लिंग म्यूज़ियम की स्थापना आइसलैंड के एक निवासी सिगरदर जारटार्सन ने 1997 में की थी। आइए जानते है इस म्यूजियम के बारे में -

लिंग (पेनिस) का है विशाल संग्रह
इस संग्रालय मे आइसलैंड की धरती और पानी मे पाए जाने वाले अधिकतर मेमल्स (बच्चे पैदा करने वाले स्तनपायी प्राणी) के लिंगों का संग्रह है जिनकी संख्या 215 से अधिक है। इनमे 56 लिंग 17 अलग अलग तरह की व्हेल मछली के, 36 लिंग 7 अलग अलग तरह की सील के तथा बाकि के लिंग आइसलैंड की धरती पर मिलने वाले 26 प्रकार के अन्य मेमल्स के है जिसमे इंसान भी शामिल है। इसके अलावा कई लिंग विदेशी जानवारों के है। इस प्रकार कुल मिलाकर 300 से भी अधिक लिंग के नमुने यहाँ संग्रहित है।

4 इंसान कर चुके हैं अपना लिंग
इस म्यूज़ियम को अब तक 4 लोगो ने अपनी मृत्यु के बाद अपना लिंग उपहार स्वरुप दे दिया हैं। जिसमे से एक मनुष्य का लिंग तो म्यूज़ियम को मिल भी चुका है, जो कि आइसलैंड के टूरिस्ट गाइड पॉल एरासन (95 साल) का है। हालाकि उम्र अधिक हो जाने के कारन उनका लिंग काफी सिकुड़ चुका था। उनका यह लिंग, अंडकोष के साथ एक जार मे रखा है।

म्यूजियम को मिलेगा सबसे बड़ा लिंग
अमेरिकी निवासी जोना फाल्कन, जिसका लिंग दुनिया का सबसे बड़ा लिंग (शिथील अवस्था मे 9 इंच और उत्तेजित अवस्था मे 13.5 इंच) है, ने मृत्यु पश्चात अपना लिंग म्यूज़ियम को दान करने की घोषणा की है। इसके अलावा टॉम मिचेल (तस्वीर में ) नामक एक व्यक्ति ने भी अपना लिंग इस म्यूजियम को देने की घोषणा की है।

व्हेल मछली का लिंग
यहां डिस्प्ले किए गए लिंगो मे सब्से अधिक लम्बाई व्हेल मछली के लिंग की (67 इंच) , और सबसे कम लम्बाई हेमस्टर की पेनिस बोन (.081 इंच, देखने के लिए मेग्निफाइन ग्लास कि जरुरत पड़ती है) की है। पेनिस बोन, पेनिस में पाई जाने वाली हड्डी होती है जो की इंसानो के पेनिस मे नही होती है लेकिन कई जानवरो जैसे गोरिल्ला, चिम्पांज़ी आदि मे पाई जाती है।

एक मजाक के साथ बना यह म्यूजियम
इस म्यूज़िम कि शुरुआत एक मज़ाक से हुई थी। बात 1974 की है जब जारटार्सन आईसलैंड के एक स्कूल मे हेडमास्टर थे। एक बार गर्मियों की छुटियों मे वो पास के गाँव घूमने गएं, वहां पर उन्हे किसी ग्रामीण ने एक बेल का लिंग दीया। उन्होंने वो लिंग वापस आकर अपने साथी टीचर्स को दिखाया। उनके साथी अध्यापक भी गर्मियों की छुट्टियों में पास ही में बने व्हेल स्टेशन पर काम किया करते थे। उन्होंने जारटार्सन का मजाक उडाने के लिए, व्हेल स्टेशन से एक विशाल व्हेल का लिंग लाकर दिया। लेकिन इसका उलटा असर हुआ और जारटार्सन को लिंगों का संग्रह करने का विचार आया।

300 से ज्यादा लिंग है इस म्यूजियम में
1980 तक उनके पास 13, 1940 तक 34 और 1997 में, जब उन्होंने रेक्जाविक मे पेनिस म्यूज़ियम खोला, उनके पास 62 लिंगो का संग्रह हो चुका था। वर्तमान में यह संख्या 300 से ज्यादा हो चुकी है।

लिंग संग्रालय (पेनिस म्यूज़ियम) से जुड़े कुछ तथ्य :
1. इस म्यूज़ियम मे साल भर मे औसतन 11000 विज़िटर आते है।
2. यहां आने वाले विज़िटर्स मे से 60 % महिलाएं होती है। जो इस बात को प्रमाणित करती है कि प्रकृति विपरीत लिंग के प्रति हमेशा ज्यादा आकर्षण होता है।
3. अमेरिका के टॉम मिचेल ने अपनी मौत पूर्व अपना लिंग म्यूज़ियम को दान करने की इच्छा ज़ाहिर की है इस पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘The Final Member' बन चुकी है।
4. इस म्यूज़ियम को वर्तमान मे जारटार्सन के पुत्र सीगुरोसों संभाल रहे है।
5. एक जर्मन आदमी ने इस म्यूज़ियम को ख़रीदने के लिए 232000 $ का प्रस्ताव दिया था।
6. एक अन्य बिज़निस मेन ने इसे ब्रिटेन मे शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा था।
7. दोनों ही प्रस्ताव जारटार्सन द्वारा निरस्त कर दिये गये।
8. 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में आइसलैंड की हैंडबॉल टीम ने सिल्वर मेडल जीता था। उनकी जीत की ख़ुशी में म्यूज़ियम ने सभी 15 खिलाड़ियों के हूबहू लिंग बनाये थे जो कि म्यूज़ियम मे रखे है।
9. 2004 तक यह म्यूज़ियम रेक्जाविक मे ही था, इसे आईसलैंड सरकार कि तरफ़ से आर्थिक मदद मिलती थी जो कि सरकार ने 2004 में बंद कर दी। तब जारटार्सन ने इसे पास के एक गाँव मे शिफ़्ट कर दिया। पर 2011 में उनके बेटे ने इसे दुबारा रेक्जाविक मे नये संग्रालय मे शिफ़्ट किया।
10. इस म्यूज़ियम का सारा आर्ट वर्क भी पेनिस को समर्पित है।
11. जारटार्सन और उसके बेटे सीगुरोसों कि इच्छा इस म्यूज़ियम को फैलोलॉजी ( Phallology, मेडिकल साइंस की एक ब्रांच है जिसमे लिंग का अध्यन्न किया जाता है ) के विश्व्स्तरीय स्टडी सेंटर के रूप मे विकसित करने कि है।



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