Latest Updates
-
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी -
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी
क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में भी थीं एक मदर टेरेसा
कौन नहीं जानता मदर टेरेसा और उनके निःस्वार्थ भाव से बिमारी से झेल रहे लोगों की मदद को? उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी ऐसे लोगों के नाम कर दी जो बिमारी से पीड़ित थे या गरीब थे।
आजकल मदर टेरेसा जैसे कितने लोगों को हम जानते हैं?
यह कहानी है एक ऐसी ही औरत की जिसे पाकिस्तान का मदर टेरेसा कहा जाता था। हाल ही में 87 साल की उम्र में उनकी मौत हो गयी।
जब यह खबर बाहर आई तो हमारा ध्यान उनके नाम से जुड़े "मदर टेरेसा" टैग पर गया। इससे हमने थोड़ी छानबीन की और हमें यह पता चला।
ऐसा कह सकते हैं कि वह पाकिस्तान की भूली बिसरी हीरो हैं क्यूंकि उन्होंने भी अपना जीवन भारत की मदर टेरेसा की तरह ही लोगों के लिए समर्पित कर दिया। आगे पढ़िए और पाकिस्तान की मदर टेरेसा के बारे में और जानिये।

वह पाकिस्तानी नहीं थी
उनका जन्म जर्मनी में हुआ पर उनका दिल पाकिस्तान में बसता था। 1960 में वह पाकिस्तान आयीं और यहाँ पर अपना घर बना लिया और उसके बाद से उन्होंने पाकिस्तान में टीबी और लेप्रोसी के मरीजों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।

उनका प्रेरणाश्रोत..
उनके शहर जर्मनी में विश्व युद्ध द्वितीय के विध्वंशकारी रूप को देखने के बाद उन्होंने डॉक्टर बन लोगों की मदद कर अपना जीवन यापन करने का निर्णय लिया। उन्होंने फ्रेंच रेवोल्यूशन के दौरान बने डॉटर ऑफ़ द हार्ट ऑफ़ मेरी आर्डर को ज्वाइन किया।

उन्हें अपना लक्ष्य मिला...
एक जाने माने मीडिया ग्रुप के साथ इंटरव्यू के दौरान प्फाऊ ने कहा कि वह कराची में अपने शुरुआत के दिनों में मिले एक नवयुवक को कभी नहीं भूल सकतीं, वह मरीज़ मिटटी में लोटता हुआ उनके पास पहुंचा क्यूंकि वह यह तय कर चुका था कि उसके पास इसके सिवाय और कोई रास्ता नहीं था।

उनकी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा के लिए समर्पित थी
कैथोलिक आर्डर ऑफ़ द डॉटर ऑफ़ हार्ट एंड मैरी को ज्वाइन करने से पहले उन्होंने मेंज़ और मारबर्ग की यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की पढ़ाई की थी। इस संस्था ने उन्हें मिशनरी के तौर पर बाहर भेजा। यह उनकी किस्मत थी जो उन्हें पाकिस्तान ले आई।

उन्होंने बीमारी को नियंत्रित किया
ऐसा माना जाता है कि 1950 से लेकर 1996 तक लेप्रोसी पाकिस्तान में एक बड़ी बिमारी बनकर उभरी। प्फाऊ ने पाकिस्तान सरकार और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के साथ मिलकर इस बिमारी को नियंत्रण में लाने में एक अहम भूमिका निभायी।

उन्हें उनके काम के लिए प्रसंशा मिली
प्फाऊ को पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री और आर्मी चीफ के द्वारा प्रसंशा मिली क्यूंकि उन्होंने पाकिस्तान को लेप्रोसी जैसी बीमारी से छुटकारा दिलाने में एक अहम भूमिका निभायी। यह एक ऐसी बिमारी है जिससे लोगों के शरीर में विकृति आ जाती है। पर ऐसा कुछ दिनों तक ही रहा और बहुत जल्द ही वह भूली बिसरी हीरो बनकर रह गयीं।
अगर आप ऐसे ही किसी व्यक्ति और उसकी प्रेरणादायक कहानी के बारे में जानते हैं, तो हमारे कमेंट सेक्शन में ज़रूर लिखें।



Click it and Unblock the Notifications