Latest Updates
-
World Youth Skills Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व युवा कौशल दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
28 दिन बाद लगेगा सूर्य ग्रहण, 2 मिनट 18 सेंकड के लिए छा जाएगा अंधेरा, क्या भारत में दिखेगा ये नजारा -
Harela Wishes In Pahadi Or Hindi: 'जी रया, जागि रया' कहकर अपनों को दें हरेला पर्व की शुभकामनाएं -
रथ यात्रा में सबसे पहले राजा ही क्यों लगाते हैं झाड़ू? जानिए छेरा पहरा की परंपरा -
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: रथ यात्रा पर शेयर करें भक्तिमय शुभकामना संदेश, मिलेगा प्रभु का आशीर्वाद -
अमरनाथ गुफा में पिघला तो फ्रिज में दिखा 'बाबा बर्फानी' का शिवलिंग? वायरल वीडियो देख लोग रह गए हैरान -
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर है लैला मजनूं की मजार, हर साल मन्नतें मांगने आते है हजारों आशिक यहां..
जब दो आशिकों या प्रेमियों का नाम लिया जाता है तो लैला-मजनू का नाम सबसे पहने लिया जाता है। इन दोनों ने अपनी मोहब्बत के लिए दुनिया भर के सितम सहें। लेकिन इसके बाद भी जीते जी तो इन्हें मोहब्बत के दुश्मनों ने मिलने नहीं दिया लेकिन मौत के बाद इन्हें कोई एक दूसरे से जुदा न कर पाया।
कहते हैं कि वे दोनों मोहब्बत के लिए क़ुर्बान हो गए और दुनिया से दूर आसमान में कहीं मिले। आज सैकड़ों सालों के बाद भी लैला-मजनूंं की प्रेम कहानी अमर है।

इस जगह हुई थी इनकी मौत
लोगों का मानना हैं कि लैला-मजनू सिंध प्रांत के रहने वाले थे। उनकी मौत यहीं पाकिस्तान बॉर्डर से महज 2 किलोमीटर दूर राजस्थान के गंगानगर जिले के अनूपगढ़ में हुई थी। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के इश्क का पता चला, तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने क्रूर तरीके से मजनू की हत्या कर दी।

नहीं मालूम कैसे हुई मौत
लैला को जब इसका पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और जान दे दी। कुछ लोगों का मत है कि घर से भाग कर दर-दर भटकने के बाद, वे यहां तक पहुंचे और प्यास से उन दोनों की मौत हो गई। वहीं कुछ लोग कहते है कि परिवार वालों और समाज से दुखी होकर उन्होंने एक साथ आत्महत्या कर ली।

एक काहानी ये भी है
लैला मजनूं को अलग करने के लिए लैला की शादी किसी और से करवा दी गई थी। मजनू इस गम में पागल हो गया और उसने पागलपन में कई कविताएं लिख डाली। इसके बाद लैला पति के साथ ईराक चली गई, जहां कुछ ही समय के बाद बीमार होने की वजह से वो मर गई। इसके बाद लैला की कब्र के पास ही मजनूं की लाश बरामद हुई। मरते हुए मजनू ने अपनी कविता के तीन चरण यहीं एक चट्टान पर लिख रखे थे। जो उसका लैला के नाम आखिरी पैगाम था।

मेले में आते है सभी धर्म के लोग
हर साल 15 जून को लैला-मजनू की मज़ार पर दो दिन का मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के प्रेमी और नवविवाहित जोड़े आते हैं और अपने सफल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। खास बात यह है कि मेले में सिर्फ़ हिंदू या मुस्लिम ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में सिख और ईसाई भी शरीक होते हैं। यह पवित्र मज़ार प्रेम करने वालों के लिए बेहद ख़ास है।

लैला-मजनू की कहानी
यह उस समय की काहानी है जब सिंध में अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस (मजनू) और लैला नाम की लड़की को एक दूसरे से प्यार हो गया और जिसका अंत मौत के साथ हुआ। उनके अमर प्रेम के चलते ही लोगों ने दोनों के नाम के बीच में ‘और' लगाना मुनासिब नहीं समझा और दोनों हमेशा के लिए ‘लैला-मजनू' के रूप में ही अमर हो गए।

बॉर्डर पर भी बनाई है 'मजनू पोस्ट'
इन महान प्रेमियों को भारतीय सेना ने भी सम्मान दिया है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक पोस्ट को बीएसएफ की ‘मजनू पोस्ट' नाम दिया है। कारगिल युद्ध से पहले मज़ार पर आने के लिए पाकिस्तान से खुला रास्ता था, लेकिन इसके बाद आतंकी घुसपैठ के चलते इसे बंद कर दिया गया है।



Click it and Unblock the Notifications