Latest Updates
-
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूर नियम -
कौन थे पद्मश्री डी.वाई. पाटिल? बिहार के पूर्व राज्यपाल और प्रसिद्ध शिक्षाविद का 90 वर्ष की उम्र में निधन -
डायबिटीज होने से पहले शरीर में दिखने लगते हैं Pre-diabetes के ये लक्षण, अधिकतर लोग करते हैं इग्नोर -
Viral Video: ऑटो में बैठी महिला के सामने अश्लील वीडियो देखता रहा Rapido ड्राइवर, वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल -
डेंगू और वायरल फीवर में क्या है अंतर? डॉक्टर से जानें कैसे करें पहचान और बचाव के उपाय -
Sawan Mehendi Designs 2026: सावन में हाथों पर खूब जचेंगे ये 7 लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफ -
Mangla Gauri Vrat 2026: आज है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व -
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर है लैला मजनूं की मजार, हर साल मन्नतें मांगने आते है हजारों आशिक यहां..
जब दो आशिकों या प्रेमियों का नाम लिया जाता है तो लैला-मजनू का नाम सबसे पहने लिया जाता है। इन दोनों ने अपनी मोहब्बत के लिए दुनिया भर के सितम सहें। लेकिन इसके बाद भी जीते जी तो इन्हें मोहब्बत के दुश्मनों ने मिलने नहीं दिया लेकिन मौत के बाद इन्हें कोई एक दूसरे से जुदा न कर पाया।
कहते हैं कि वे दोनों मोहब्बत के लिए क़ुर्बान हो गए और दुनिया से दूर आसमान में कहीं मिले। आज सैकड़ों सालों के बाद भी लैला-मजनूंं की प्रेम कहानी अमर है।

इस जगह हुई थी इनकी मौत
लोगों का मानना हैं कि लैला-मजनू सिंध प्रांत के रहने वाले थे। उनकी मौत यहीं पाकिस्तान बॉर्डर से महज 2 किलोमीटर दूर राजस्थान के गंगानगर जिले के अनूपगढ़ में हुई थी। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के इश्क का पता चला, तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने क्रूर तरीके से मजनू की हत्या कर दी।

नहीं मालूम कैसे हुई मौत
लैला को जब इसका पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और जान दे दी। कुछ लोगों का मत है कि घर से भाग कर दर-दर भटकने के बाद, वे यहां तक पहुंचे और प्यास से उन दोनों की मौत हो गई। वहीं कुछ लोग कहते है कि परिवार वालों और समाज से दुखी होकर उन्होंने एक साथ आत्महत्या कर ली।

एक काहानी ये भी है
लैला मजनूं को अलग करने के लिए लैला की शादी किसी और से करवा दी गई थी। मजनू इस गम में पागल हो गया और उसने पागलपन में कई कविताएं लिख डाली। इसके बाद लैला पति के साथ ईराक चली गई, जहां कुछ ही समय के बाद बीमार होने की वजह से वो मर गई। इसके बाद लैला की कब्र के पास ही मजनूं की लाश बरामद हुई। मरते हुए मजनू ने अपनी कविता के तीन चरण यहीं एक चट्टान पर लिख रखे थे। जो उसका लैला के नाम आखिरी पैगाम था।

मेले में आते है सभी धर्म के लोग
हर साल 15 जून को लैला-मजनू की मज़ार पर दो दिन का मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के प्रेमी और नवविवाहित जोड़े आते हैं और अपने सफल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। खास बात यह है कि मेले में सिर्फ़ हिंदू या मुस्लिम ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में सिख और ईसाई भी शरीक होते हैं। यह पवित्र मज़ार प्रेम करने वालों के लिए बेहद ख़ास है।

लैला-मजनू की कहानी
यह उस समय की काहानी है जब सिंध में अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस (मजनू) और लैला नाम की लड़की को एक दूसरे से प्यार हो गया और जिसका अंत मौत के साथ हुआ। उनके अमर प्रेम के चलते ही लोगों ने दोनों के नाम के बीच में ‘और' लगाना मुनासिब नहीं समझा और दोनों हमेशा के लिए ‘लैला-मजनू' के रूप में ही अमर हो गए।

बॉर्डर पर भी बनाई है 'मजनू पोस्ट'
इन महान प्रेमियों को भारतीय सेना ने भी सम्मान दिया है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक पोस्ट को बीएसएफ की ‘मजनू पोस्ट' नाम दिया है। कारगिल युद्ध से पहले मज़ार पर आने के लिए पाकिस्तान से खुला रास्ता था, लेकिन इसके बाद आतंकी घुसपैठ के चलते इसे बंद कर दिया गया है।



Click it and Unblock the Notifications