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ऐसा रहस्यमयी गाँव जहाँ से कोई वापस बच कर नहीं आता
हम कई भूतिया जगह की कहानियाँ सुनते हैं। इनमें से कुछ सच में भूतिया होती हैं और कुछ ऐसी जो कई सालों से खाली पड़ी हुई हों।
ऐसा माना जाता है कि जो लोग ऐसी जगहों पर जाते हैं वह वहां से कभी लौट कर नहीं आते। ऐसी ही एक कहानी रूस के एक गाँव की है, जहाँ से लोग कभी वापस लौट कर नहीं आते।
इस मामले की गहराई तक जाने के लिए कई विशेषज्ञों ने भी खोज की है। ज़्यादा जानकारी के लिए इस गाँव के बारे में पढ़िए जहाँ से लोग कभी वापस लौट कर नहीं आते।

यहाँ पर शोध किया गया था...
कई विशेषज्ञों ने इस जगह पर खोज किया है जहाँ के लिए यह माना गया है कि जो भी यहाँ गया है वापस जीवित लौट कर नहीं आ पाया है और लोग इसे "सिटी ऑफ़ डेड" के नाम से भी बुलाने लगे हैं। आइये इस रहस्यमयी जगह के बारे में कुछ और जानें।

यह कहाँ स्थित है?
यह जगह रूस के उत्तरी ओस्सेटिया के सुनसान इलाके में है और इस गांव का नाम दर्गाव्स है। यह ऐसी जगह है जहाँ सिर्फ मरे हुए लोग रहते हैं। इस जगह पर 5 पहाड़ हैं और अनगिनत झोपड़ियाँ हैं जो पहाड़ के पत्थरों से बनी हैं।

इस जगह को सिटी ऑफ़ डेड के नाम से जानते हैं
हालांकि, यह गाँव बहुत ही सुन्दर है पर कोई भी यहाँ जाने की हिम्मत नहीं रखता क्यूंकि इसका नाम 'सिटी ऑफ़ डेड' है, जहाँ सिर्फ मृत शरीर का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ के लोग अपने प्रियजनों के मृत शरीर इन झोपड़ियों में रखते हैं।

इसके कई सुरंगनुमा रास्ते हैं
क्यूंकि यह गाँव 5 पर्वतों के बीच में स्थित है, यहाँ तक पहुंचना काफी मुश्किल है। इस डेड सिटी की एक अजीब बात यह है कि यहाँ पर कई ऐसे घर हैं जिनमें सुरंगनुमा रास्ते हैं। इस गाँव के कुछ घर 4 मंजिल के भी हैं।

यह एक विस्तृत शमशान की तरह है
यहाँ के घरों के हर मंजिल पर मृत शरीर को दफनाया गया है। जिस घर में जितनी मंजिल हैं ऐसा समझिये वहां उतनी ही मृत शरीरों का घर होगा। इस गांव में करीबन 99 घर हैं और मृत शरीर को घर में दफनाने की प्रथा 16वीं शताब्दी से चली आ रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है
यहाँ के स्थानीय लोगों की विचारधारा इस गाँव को लेकर काफी अलग अलग हैं। उनका मानना है कि जो लोग इन घरों में एक बार जाते हैं वह वापस जीवित नहीं आते। इसलिए यहाँ पर पर्यटक नहीं आते। दूसरा कारण है मौसम ऐसी विषम परिस्थिति पैदा करता है कि यहाँ पहुंचना मुश्किल होता है।

अजीब विश्वास
इस गांव के ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि 18 वीं शताब्दी में जो लोग यहाँ रहते थे वह अपने बीमार परिवार के लोगों को घर में रखते थे। उन्हें समय समय पर खाना और उनकी ज़रुरत की चीज़ें मिल जाती थीं। पर उनके साथ यह शर्त थी कि बीमार इंसान अपने मरने तक घर से बाहर नहीं जा सकता था।

यहाँ लोग कैसे रहते थे?
यह जगह अपने आप में रहस्यमयी है और इस जगह पर समय समय पर शोध होते रहते हैं ताकि यहाँ के लोगों के रहने के तरीके के बारे में पता चल सके। शोधकर्ताओं ने इस जगह पर कई शोध किये हैं।

मौत का जहाज़
खुदाई करने वालों ने यहाँ पर शमशान के आस पास जहाज़ भी पाए हैं। उनके अनुसार मृत शरीर को एक लकड़ी के ताबूत में दफनाया जाता है जो जहाज़ के आकार का है। यहाँ पुराने ज़माने का विश्वास है कि इन जहाज़ों की मदद से मृत शरीर को स्वर्ग जाने में आसानी होगी।

कुँए का रहस्य
हर सुरंग के पास शोधकर्ताओं ने एक कुआं भी पाया है। ऐसा माना जाता है कि जब मृत शरीर को दफनाया जाता है तो परिजन कुँए में सिक्के डालते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर एक सिक्का दूसरे सिक्के से टकराता है और आवाज़ होती है तो मृत इंसान की आत्मा स्वर्ग पहुँचती है।



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