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इस गांव के बैंक, घर और टॉयलेट तक में नहीं है दरवाजे, जानिए क्यूं?
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई ऐसा गाँव भी है जहां मकानों के दरवाजे ही नहीं यहाँ कभी चोरियाँ नहीं होती हैं! है ना आश्चर्य की बात! हम बात कर रहे हैं शनि शिग्नापुर गाँव की, जो मुंबई से 300 किलोमीटर पूर्व में है।
शनि शिग्नापुर महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है जहां घरों के दरवाजे नहीं हैं।
वहाँ के रहने वालों के अनुसार, उन्हें घरों के ताले लगाने की ज़रूरत नहीं है, क्यों कि उन्हें शनि देव से सुरक्षा का वरदान मिला हुआ है। शनि शिग्नापुर में भगवान शनि देव का प्रसिद्ध मंदिर है जहां श्रद्धालु शनि देव की पूजा करने आते हैं।

शनि देव के इस प्रभावशाली मंदिर और शनि शिग्नापुर के बारे में और ज़्यादा जानने के लिए आगे पढ़ें...
मान्यताओं के अनुसार ऐसी कहानी प्रचलित है कि सालों पहले, शनि भगवान एक भक्त के सपने में आए थे और उन्होने उन्हें अपने घरों के दरवाजे नहीं लगाने के लिए कहा था। शनि देव ने कहा था कि वे उनके घरों की सुरक्षा करेंगे तब से यहाँ किसी के घर में मुख्य दरवाजा नहीं है।

बैंक के भी दरवाजे नहीं! जी हाँ, इस गाँव में बैंक के भी दरवाजे नहीं हैं। गाँव की परंपरा से प्रेरित होकर यहाँ यूनाइटेड कमर्शियल बैंक (यूको) ने यहाँ 'लोकलेस’ ब्रांच खोली है, इस बैंक के भी दरवाजे नहीं हैं। यह अपनी तरह का पहला बैंक है। दरवाजा रहित यह बैंक 2011 में खोला गया था और आज इसके 3700 से ज़्यादा खाताधारक हैं।

बैंक के एक कर्मचारी का कहना है कि... “कोई भी बैंक उचित सुरक्षा प्रबंधों और लॉकर सुविधा के बिना नहीं चल सकता। हमारे यहाँ दरवाजा है लेकिन इसमें कोई परंपरागत ताला नहीं है। यह रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित इलेक्ट्रोमेग्नेटिक लॉक है। हम यहाँ परम्पराओं को नहीं तोड़ सकते, लेकिन साथ ही सुरक्षा से भी समझौता नहीं कर सकते।“

इसके पीछे मान्यता है कि यदि यहाँ कोई व्यक्ति कोई चीज चुराता है तो उसे दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। ऐसा करने वाले के शनि की साढ़े साती (दुर्भाग्य के 7 साल) लग जाती है। गाँव वाले मानते हैं कि शनि भगवान की शक्ति को कोई भी नहीं नकारता है, यहाँ सभी लोग इसे मानते हैं। यदि कोई गलत करने की कोशिश करता है तो उसके साथ गलत होता है।

अपराध दर लगभग शून्य!
चौंकाने वाली बात है कि गाँव में चोरियाँ नहीं होती और अपराध दर शून्य है। सदियों से गाँव में चोरी की कोई घटना रिकॉर्ड नहीं की गई है। 2010 में, एक आदमी की गाड़ी से 35000 रुपए गायब हो गए थे। इसके अलावा 2012 में भी सोने के आभूषण चोरी होने का मामला सामने आया था। लेकिन ये घटनाएँ भी लोगों की मान्यताओं को नहीं हिला सकी और लोगों ने दरवाजे नहीं लगवाए। लोग खुशी और शांति से अपने घरों में रहते हैं। फिर भी, कुछ ग्रामीण हैं जिन्हें चोरी या जेबकतरों से डर है उन्होने घरों के दरवाजों की मांग की है। अन्य लोग मानते हैं कि ऐसा करने वाले शनि देव के प्रति उनकी मान्यता के खिलाफ हैं।

गाँव में कुछ लोग अब दरवाजे लगाने लगे हैं। जो लोग बॉर्डर किनारे रहते हैं वे अब अपने घरों की सुरक्षा के लिए दरवाजे लगाने लगे हैं। वे भी भगवान शनि की पूजा करते हैं लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं करते। ऐसे लोगों का मानना है कि घरों को बिना दरवाजों के सूना छोडना सही नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि गाँव वालों के दबाव में चोरी की कई घटनाएँ दर्ज़ ही नहीं होती हैं। चूंकि गाँव की अर्थव्यवस्था में इस मंदिर का खास योगदान है इसलिए इस मंदिर के प्रति मान्यता खास महत्व रखती है।



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