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the origin of paneer : एक गलती का नतीजा था पनीर, जानें आपकी फेवरेट पनीर की हिस्ट्री
the origin of paneer: भारत में पनीर पंसदीदा फूड में से एक है। इसके बिना कोई भी पार्टी-फंक्शन अधूरा माना जाता है। पनीर को खाने वालों ने इसे लेकर ढ़ेरों रेसिपी ईजाद कर दी है। पालक पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, पनीर टिक्का और ना जाने दर्जनों व्यंजन ऐसे हैं जो पनीर के बिना ऐसे हैं जैसे पानी-पुरी से पानी और रसगुल्ले से रस गायब हो गया हो।
सब्जी से लेके पिज्जा तक में पनीर एसेंशियल फूड आइटम बन गया है। बच्चों से लेकर बड़े तक इसे बहुत ही चाव से खाते हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है कि पनीर आखिर किसके दिमाग की उपज होगा कि आज इस चीज के बिना हर सब्जी अधूरी और बेस्वादी लगती है।
चलिए जानते हैं कि आखिर ये पनीर आया कहां से और इसकी खोज कैसे हुई :

मंगोलो ने ईजाद किया था पनीर?
कुछ लोगों का मानना है कि पनीर मंगोलों की गलती की वजह से वजूद में आया। मंगोल दूर-दराज के इलाकों में युद्ध करते रहते थे। वो अपने साथ खाने-पीने के सामान भी ले जाते थे। एक बार जब वो युद्ध पर निकले तो अपने साथ चमड़े की बोतल (मुश्की) में दूध लेकर गए थे। उनका काफिला रेगिस्तान की गर्म इलाके से होकर गुज़रा। गर्मी की वजह से चमड़े की बोतल में रखा दूध फट गया। जब मंगोल ने उसे चखा तो उन्हें उसका स्वाद काफ़ी पसंद आ गया। यही से पनीर ईजाद हुआ।
पनीर के इतिहास को लेकर है मतभेद
आर्थर बेरीडेल कीथ के अनुसार ऋग्वेद में भी एक प्रकार के पनीर का वर्णन किया गया है। वहीं दूसरी तरह एक लेखक ओटो शेरडर का मानना है कि ऋग्वेद में केवल "खट्टे दूध की परत का ही उल्लेख है, ना की पनीर का। चरक संहिता जैसे ग्रंथों को आधार मानते हुए बीएन माथुर ने लिखा है कि भारत में हीट-एसिड द्वारा जमने वाले उत्पाद का सबसे पहला उदाहरण कुषाण-सातवाहन युग में पाया गया था। उनके अनुसार, पनीर दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी भाग से आया है तथा यह अफगान और ईरानी यात्रियों द्वारा भारत लाया गया था।

ये भी है काहानी
वहीं इसे लेकर एक थ्योरी ये भी है कि 16 वीं सदी में जब भारत में अफ़गानी और ईरानी राजा-महाराजा और यात्री आए तो वे पनीर अपने साथ लाए। उस समय बकरी या भेड़ के दूध से पनीर बनाया जाता था। हालांकि, समय के साथ पनीर में भी बदलाव आया और जिस पनीर को आज हम जानते हैं वो वास्तव में 17वीं शताब्दी में सामने आया।
पुर्तगालियों ने सिखाया बंगालियों को पनीर बनाना
आधुनिक पनीर बनाने की प्रक्रिया नींबू के रस का उपयोग करके दूध को 'तोड़ने' की पुर्तगाली विधि से ली गई है। इसे वहां 'ब्रेकिंग मिल्क' के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है 17 वीं सदी में पुर्तगालियों ने बंगाल में रहते हुए लोगों को साइट्रिक एसिड की मदद से दूध को फाड़ने की कला सिखाई। उन्होंने बंगालियों को दूध को अम्लीकृत करने की नई विधि बताई! इस तरह भारत में पहले बंगाल में पनीर तैयार होने लगी। फिर उसी पनीर की विधि से छेना बनाया जाने लगा। माना जाता है कि यहीं से पनीर भी धीरे-धीरे पूरे भारत में फैला!



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