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क्या बच्चे को जबर्दस्ती खिलाना सही है?
बच्चे को जन्म देना एक वरदान होता है, उसका घर में होना माहौल को आनंदमयी बना देता है और उसकी प्यारी नटखट शैतानियों को देखना अच्छा लगता है। लेकिन बच्चे की देखभाल करना आपको बहुत मुश्किल काम लगता है। बच्चे के विकास के साथ उसके खान - पान को भी बढ़ाना पड़ता है। लेकिन बच्चे बहुत शैतान होते है, ऐसे में उनको खाना खिलाना बहुत मुश्किल काम होता है। जब बच्चे की उम्र बढ़ती है तो उसे स्वाद समझ में आने लगता है और टेस्ट अच्छा न होने पर वह खाने से इंकार कर देता है। हालांकि, जब तक आप उसे चम्मच से गोद में बैठाकर खिलाती है, वह खा लेता है लेकिन एक उम्र के बाद उसे बहलाकर खिलाना मुश्किल होता है। ऐसे में सवाल यह उठता है - क्या बच्चे को जबरन ठूंस - ठूंस कर खिलाना सही है?
हो सकता है कि बच्चे को जबर्दस्ती खिलाने से उसका पेट भर जाएं और उसके शरीर में ज्यादा एनर्जी आ जाएं, वहीं दूसरी ओर यह भी हो सकता है कि ऐसा करने से उसे कोई दिक्कत हो जाएं। जबरन खिलाने के दौरान आप बच्चे के मुंह में कुछ देती है, वह इंकार करता है, आप जर्बदस्ती मुंह में डाल देती है और उसे निगलने को कहती है या उसे जर्बदस्ती कुछ पिलाती है। कई बार बच्चे सही से गटक नहीं पाते है और खाना या दूध उनकी सांस नली में चला जाता है, इससे उनकी मौत भी हो जाती है। ऐसे कई केस पिछले कुछ सालों में देखने को मिले है। अगर आप भी अपने बच्चे को जबरन खाना खिलाती है तो इसके दुष्परिणामों पर एक नजर डाल लें :

क्या होता है जब आप बलपूर्वक खिलाती हैं?
जब आपका बच्चा कुछ खाने का मन नहीं करता है तो आप उसे हर बार बलपूर्वक, डांटडपट कर खिलाती हैं, ऐसा करने से उसकी आदत खराब होगी। वह अगली बार से और ज्यादा नखरे दिखाएगा और खाने में मामले में दिनों - दिन चूजी होता जाएगा। उसकी इस आदत के चलते घर में डाईनिंग रूम, अखाड़ा बन जाएगा। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप अपने बच्चे को उस खाने के गुण बताएं, अगर वह फिर भी खाने को राजी न हो, तो उसे उसकी पसंद का खाना दें। जबरन खिलाना इस समस्या का हल नहीं है। आपको उसकी आदतों को सुधारने की जरूरत है।
बच्चे को जबर्दस्ती खिलाने से बेहतर होगा कि उसे खाने का स्वाद लगा दें। अगर बच्चे को एक बार भी किसी डिश का टेस्ट लग जाता है तो वह उसे मजे से खा लेगें और आपको उनके साथ द्धंद युद्ध भी नहीं करना पड़ेगा। अगर आपका बच्चा फास्ट फूड का शौकीन है तो उसे कुछ महीने फास्ट फूड खा लेने दें, वह खुद भी उब जाएगा और उस दौरान आप उसे ट्रिक से खाना खिला सकती है। बच्चे को फोर्सफुली खिलाएंगी तो उसे गुस्सा आएगा और वह जरूरी भोजन को कभी नहीं खाएगा।
अगर आप बच्चे को जबरन मार कर खाना खिलाती है तो यह गलत है, इससे उसके मन में गुस्सा पैदा होगा। हो सकता है कि उसे खाना खाने से ही नफरत हो जाएं। बच्चे को प्यार से खिलाएं। बच्चों के खाने को रंगीन और स्वाद से भरा बनाना जरूरी होता है, उनके लिए खाने की चीजों का रंग मायने रखता है।
बच्चा अगर खाने - पीने के दौरान ज्यादा नखरे करें तो उसे शुरू में कुछ दिनों तक उसकी पसंद का खाना सर्व करें। धीरे - धीरे आप उसे अच्छे और हेल्दी फूड के बारे में बताएं। आप चाहें तो ही- मैन, डोरेमन जैसे कई कार्टून कैरेक्टर की मदद ले सकती है, कह सकती हैं कि वह लोग भी यही खाते है। उनके फेवरिट एक्टर का डायट प्लान भी बता सकती है जो उनके डायट प्लान जैसा बिल्कुल नहीं है, इस तरह से बच्चे अपने मन से हेल्दी फूड खाना शुरू कर देते है।
बच्चा अगर छोटा हो, तो उसके साथ चिडिया गेम खेलें। आप आंखें बंद करके चम्मच में खाना रखें और कहें कि देखूं तो कौन खाता है। बच्चों को ऐसे गेम में मजा आता है और वह झट से खा लेते है। बच्चे को अगर कभी - कभार कुछ खाने का मन नहीं है तो उससे दिक्कत पूछें। हो सकता है कि उसे कहीं दर्द हो या उसका दांत टूट रहा हो। बच्चों के मानसिक स्तर को समझते हुए उन्हे खाना खिलाएं, वरना आप काफी परेशानी में भी फंस सकती है।



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