क्‍यों आता है प्रेगनेंसी में चक्‍कर?

Pregnant Women
जब भी कोई प्रेगनेंट महिला बेहोश होती है, तो अन्‍य दूसरी महिलाएं इस बात का आंकलन कर लेती हैं कि वह जरुर गर्भवती होगी। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कई गर्भवती महिलाओं को पूरे 9 महीनों तक ना तो चक्‍कर आता है और ना ही वह बेहोश होती हैं। तो क्‍या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है या फिर यह बेफिजूल की बातें हैं, आइये जानते हैं-

क्‍या बेहोशी प्रेगनेंसी का संकेत है?

हृदय संबन्‍धी हलचल - अगर आप किसी भी प्रेगनेंट महिला की नस को पकड़ लें तो आपको पता चलेगा कि उसके अंदर ह्दय संबधी कोई हलचल चल रही है। पुराने जमाने में प्रेगनेंसी का कोई टेस्‍ट नहीं हुआ करता था। तो ऐसे में जब महिला का पल्‍स हाई हो जाता और मासिकधर्म रुख जाता था, तो उससे प्रेगनेंसी की पहचान कर ली जाती थी। तो इसलिये अगर आपका हृदय तेजी से खून को पंप करने लगे और शरीर में खून बढने लगे तो ब्‍लड प्रेशर अपने आप बढने लगेगा। इस वजह से चक्‍कर आने शुरु हो जाते हैं।

ब्‍लड शुगर में गिरावट- बेहोशी का एक और कारण भी हो सकता है और वह है कि ब्‍लड शुगर में अचानक से गिरावट आ जाना। प्रेगनेंसी के पहले महीने में ऐसा होना लाजिमी होता है। इसलिये प्रेगनेंट महिलाओं को 2-2 घंटों में खाने की सलाह दी जाती है। क्‍योंकि ऐसा करने से शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल हमेशा बरकरार रहता है।

बीच के महीनों में भी बेहोशी- प्रेनेंसी के शुरुआती महीनों में ही नहीं बल्कि बीच के भी कुछ महीनों में भी बेहोशी छाने लगती है। बीच प्रेगनेंसी के दौरान शरीर के अंदर खून की नली ज्‍यादा चौडी़ हो जाती है जिससे उसमें खून का तेज प्रवाह होने लगता है। जिससे फिर ब्‍लड़ प्रेशर में धीरे-धीरे कमी आने लगती है और फिर यह नार्मल होने लगता है। लो ब्‍लड प्रेशर कभी-कभी दिमाग के पास पहुंचने वाले खून की सपलाई कम कर देता है, जिससे चक्‍कर आने लगता है।

हार्मोन में पर‍िवर्तन- जब एक महिला गर्भवती होती है, तो उसके हार्मोन में बहुत बडे़-बडे़ बदलाव आते हैं। इस वजह से सांस लेने में दिक्‍कत होने लगती है और बेहोशी भी आने लगती है।

Story first published: Monday, August 27, 2012, 13:52 [IST]
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