ज्‍यादा एज गेप की वजह से क्‍या शादीशुदा लाइफ पर पड़ता है फर्क?

कहते है एक अच्‍छे और हेल्‍दी रिलेशनशिप की नींव होती है अंडरस्‍टैंडिंग और मैच्‍योरिटी होती है। लेकिन क्‍या हो जब एक रिलेशनशिप में ये दोनों ही न हो तो, जी हां अक्‍सर देखा गया है कि अगर किसी कपल में उम्र का फासला कुछ ज्‍यादा होता है तो वहां कुछ जगह दिक्‍कते होती है।

खासकर अगर शादीशुदा कपल में उम्र के फासले की वजह से कई बार आपसी सोच नहीं मिलती है। जिस वजह से उनमें मनमुटाव की स्थिति होने लगती है। शादी के लिए आदर्श जोड़े में भी पुरूष महिलाओं से आमतौर पर एकाध साल बड़ी उम्र के ही होते हैं। लेकिन आज के दौर में छोटी उम्र का पुरूष और बड़ी उम्र की महिला के बीच भी आसानी से संबंध बन जाते हैं।

पति-पत्नी की उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव निश्चय ही पड़ता है। दरअसल, अकसर यह कहा जाता है कि महिला अपनी उम्र से पहले ही मैच्योर हो जाती है जबकि पुरूष अपनी उम्र के बाद ही मैच्योर होता है। आइए जानें उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव।

खुशी है जरुरी

खुशी है जरुरी

आमतौर पर यदि बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष की उम्र में सिर्फ कुछ सालों का अंतर है तो बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब यही फर्क 10-12 साल तक का हो जाता है तो काफी फर्क पड़ता है। हालांकि यह सर्वमान्य है कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती, न ही कोई बंधन। अगर दो लोग आपस में समझदारी से एक-दूसरे के साथ जीवन-निर्वाह करने को तैयार है तो किसी को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए लेकिन दोनों लोगों का खुश होना भी जरूरी है।

मैच्‍योरिटी होना जरुरी

मैच्‍योरिटी होना जरुरी

बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष या फिर बड़ी उम्र का पुरूष और छोटी उम्र की महिला फिर चाहे उम्र कोई भी हो लेकिन दोनों को मैच्योरिटी लेवल मिलना चाहिए जिससे दोनों आपस में सामंजस्य स्थापित कर पाएं।

दरअसल,पति-पत्नी की उम्र के अंतर का संबंधो पर प्रभाव पड़ना लाजमी है। यदि बड़ी उम्र की महिला है तो निश्चित रूप से वह छोटी उम्र के पुरूष से अधिक अनुभवी होगी जिससे अधिक उम्र की महिला में सेक्‍स समस्‍याएं हो सकती हैं या फिर अधिक उम्र की महिलाओं की चाहत, सोच-विचार और इच्छाएं आपस में मिलने में मुश्किल हो सकते हैं।

सेक्‍स लाइफ में समस्‍या

सेक्‍स लाइफ में समस्‍या

लड़कियां सामान्यतः लड़कों से जल्दी परिपक्व हो जाती हैं, ऐसे में कोई भी निर्णय लेने में महिलाएं पुरूषों से अधिक सशक्त होती हैं। इतना ही नहीं महिलाओं में सेक्‍स समस्‍याएं भी पुरूषों के मुकाबले जल्‍दी उम्र में पनपनी लगती है, ऐसे में उम्र का रिश्‍तों पर प्रभाव पड़ना लाजमी है। दरअसल रिश्तों में बेस्ट हाफ, उम्र इत्यादि महत्वपूर्ण नहीं है। न ही महिलाओं और पुरूषों में सेक्‍स समस्‍याओं का ज्यादा महत्व है, महत्‍व तो इस बात का है कि वे एक दूसरे को कितनी अच्छी तरह से समझते हैं फिर चाहें उम्र कुछ भी हो।

 अलग अलग होती है जरुरतें

अलग अलग होती है जरुरतें

वैसे भी वर्तमान में इस बात का महत्व कम हो गया है कि पति पत्नी में किसकी उम्र ज्यादा है। लेकिन मेडिकल साइंस ने ये माना है कि यदि पत्नी की उम्र पति से कम है तो वे कई तरह की परेशानियों से बच सकते हैं।

आमतौर पर पत्नी या पति में कोई भी बड़ी उम्र का हो लेकिन दोनों की शारीरिक जरूरतें उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, इसीलिए दोनों की उम्र के बीच बहुत ज्यादा अंतराल होना सही नहीं है।

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