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Lockdown: झाडू-पोछा भी है बेस्ट वर्कआउट, इन हाउसवर्क से कम करें कैलोरीज
कोरोना वायरस के वजह से पूरे देशभर में लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में घर रहकर लोग कई तरह के कामों में हाथ बंटा रहे हैं। कई लोग जो जिम नहीं जा पा रहे हैं, घर पर ही वर्कआउट कर रहे हैं। अगर हम आपको कुछ ऐसे घर के कामों के बारे में बताएं जिन्हें करके आप न सिर्फ घर के काम में हाथ बंटा सकते हैं साथ ही साथ कई कैलोरिज भी बर्न कर सकते हैं।
जैसे कि घर में सिर्फ झाडू-पोछा करके भी आप कमर और पेट पर जमा हुई चर्बी को कम कर सकते हैं। झाडू लगाने से स्क्वैट्स के बराबर फायदा मिलता है। जिससे हमारे थाई, बैक और टमी फैट कम होता है। आइए जानते हैं घर में झाडू और पोछा लगाने के फायदों के बारे में।

झुककर लगाए झाडू
जैसे ही आप झाड़ू लगाना शुरू करते हैं, अपनी रीढ़ की स्थिति को ठीक रखें। धीरे से झुकें और हर तरफ से अंदर से बाहर की तरफ झाडू लगाएं। झाडू लगाने से हमारी कलाई की फ्लैक्सीबिलिटी बढ़ती है और ये सुबह एक अच्छा वार्मअप होता है। इसके साथ ही बाइसेप मसल्स पर भी झाड़ू लगाने के फायदे होते हैं। वहीं, जब आप झाडू को पकड़ते हैं तो उससे आपके अंगूठे और उंगलियों के बीच पकड़ अच्छी होती है।

मसल्स होती है टोन
झुककर झाडू लगाने से एक तो बहुत अच्छा वर्कआउट होता है। अगर आप लगभग एक घंटे तक झाड़ू लगाते हैं तो 200 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इससे स्कवैट जैसा वर्कआउट होता है। जिससे कमर, बेली और थाई के मसल्स टोन होते हैं।

स्ट्रेस और एंग्जायटी का लेवल होता है कम
झाडू लगाने से सफाई होती है, जिससे हम तनाव मुक्त महसूस करते हैं। इसके अलावा जब हम झाडू लगाते हैं तो स्ट्रेस और एंग्जायटी का लेवल कम होता है। जब हम घर की सफाई करते हैं तो झाडू लगाने से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। क्योंकि झाडू लगाना और उसके बाद पोछा लगाने से घर डिसइंफेक्ट हो जाता है।
झाडू लगाने से एलर्जी कंट्रोल हो सकती है। अक्सर घर की धूल से कई लोगों को एलर्जी होती है। झाडू लगाने से घर की धूल साफ हो जाती है। जिससे एलर्जी होने से बच जाती है।

बैठकर पोछा लगाना है लाभदायक
पोछा लगाने के फायदे आपके द्वारा पोछा लगाने के तरीके पर निर्भर करता है। पोछा बैठकर लगाते हैं या खड़े होकर इससे पोछा लगाने के फायदे अलग होते हैं। जब आप खड़े होकर स्टिक की सहायता से पोछा लगाते हैं तो इससे सिर्फ आपके आर्म्स का वर्कआउट होगा। लेकिन जब आप बैठ कर पोछा लगाते हैं तो जो 340 स्क्वैट्स के बराबर होता है।

एक मिनट में कम होती है 4 कैलोरी
जब भी आप पोछा लगाते हैं तो हर मिनट में आपकी लगभग 4 कैलोरी बर्न होती है। पोछा लगाने से हमारे लोअर बॉडी का होता वर्कआउट है। जब हम बैठ कर पोछा लगाते हैं तो आगे से पीछे की ओर खिसकते जाते हैं। साथ ही हाथों को भी दाएं-बाएं करते हैं। ऐसे में इससे पेट की मसल्स और कमर की मसल्स टोन होती है। जिससे बॉडी टोन होती है।

इन कामों में भी बर्न होती है कैलोरी
बिस्तर लगाने में भी बर्न होती है कैलोरी
जब आप चादर को झाड़कर गद्दे पर बिछाते हैं तो ये भी एक तरह का वर्कआउट होता है। जिसमें प्रति मिनट आपकी 2 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। क्योंकि जब आप बिस्तर लगाते हैं तो आपकी अपर बॉडी काम करती है और लोअर बॉडी शरीर का बैलेंस बनाने में मदद करती है। जिससे आपके पैर, बैक और पेट की मसल्स स्ट्रेंथ में आती है।

सिल बट्टे पर चटनी बनाना
सिल बट्टा पर चटनी बनाने से या मसाला तैयार करने से बाजुओं की एक्सरसाईज़ होती है। अपने आस-पास उन महिलाओं को गौर से देखें जो सिल-बट्टे पर मसाला पीसती हैं, आपको पता चल जायेगा कि इससे हाथों की कैसे एक्सरसाईज़ होती है।

कपड़े धोना और निचोड़ना
कपड़े धोना वैसे बड़ा मशक्कत का काम है। कपड़े धोने के लिए साबुन को कई देर तक कपड़े पर मसलना पड़ता है और कपड़े धोने से हाथों और पैरों की अच्छी एक्सरसाईज़ हो जाती है। कपड़े निचोड़ने में जो लोग आलस करते हैं, वो ये जान लें कि कपड़े निचोड़ने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है. ज़ोर बहुत कम लोगों के पास होता है। ये लगातार लगाने से ही बढ़ता है।

आटा गूंधना और रोटी बेलना
हमारे भारतीय समाज में हालांकि रसोई का सारा काम महिलाओं के हिस्से ही कर दिया गया है, लेकिन आप कभी आटा गूंध कर देखिए। जब पानी आटा में मिलने लगता है तो एक जकड़ बन जाती है। उस जकड़ को तोड़ना और मुलायम करना बड़े ज़ोर का काम होता है। आटे को लोच लगाने के लिए भी कंधे और हाथ की सारी ऊंगलियों का ज़ोर लगता है. इससे ग्रिप मज़बूत होती है। इसके साथ ही रोटी बनाने से कलाई और उससे ऊपर का हिस्सा मज़बूत होता है।
अब तो आप समझ ही गए होंगे कि घर के काम जैसे कि झाडू लगाना, पोछा लगाना और बाकियों के कितने फायदे हैं। तो हो जाइए तैयार इन कामों को करने के लिए।



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