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दमा, खांसी, दिल के रोग के लिये कारगर है पीपल
पीपल का पेड़ न एक पवित्र धार्मिक वृक्ष ही है बल्कि इसे स्वास्थ्य के लिए भी अति उपयोगी माना गया है। यह विशाल पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता है इसलिये यह काफी कीमती पेड़ों में से एक भी है। आयुर्वेद में बताया गया है कि पीपल का हर भाग जैसे तना, पत्ते, छाल और फल सभी चिकित्सा में काम आते हैं। इनसे कई गंभीर रोगों का भी इलाज संभव है।
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पीपल के पेड़ की पत्तियां रक्त पित्त नाशक , रक्त शोधक , सूजन मिटाने वाली, शीतल और रंग निखारने वाली मानी जाती हैं। पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खाँसी और दमा तथा सर्दी और सिर दर्द में पीपल की टहनी, लकड़ी, पत्तियों, कोपलों और सीकों का प्रयोग का उल्लेख मिलता है। आइये जानते हैं पीपल हमारे स्वास्थ्य को निखारने में किस प्रकार असरकारी है।

जुकाम, खांसी और दमा में लाभ
पीपल के पांच पत्तों को दूध में उबालकर चीनी या खांड डालकर दिन में दो बार, सुबह-शाम पीने से जुकाम, खांसी और दमा में बहुत आराम होता है।

आंखों के दर्द के लिये
इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है।

दांतों के लिये फायदेमंद
पीपल की ताज़ी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है।

नकसीर में आराम
पीपल के ताज़े पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है।

पैरों की फटी एडियां ठीक करे
हाथ -पाँव फटने पर पीपल के पत्तों का रस या दूध लगाए।

फोडे़ फुंसी दूर करे
पीपल की छाल को घिसकर लगाने से फोड़े फुंसी और घाव और जलने से हुए घाव भी ठीक हो जाते है।

सांप काटने पर
सांप काटने पर अगर चिकित्सक उपलब्ध ना हो तो पीपल के पत्तों का रस 2-2 चम्मच ३-४ बार पिलायें। विष का प्रभाव कम होगा।

बांझपन दूर करे
इसके फलों का चूर्ण लेने से बांझपन दूर होता है और पौरुष में वृद्धि होती है।

पीलिया होने पर
पीलिया होने पर इसके ३-४ नए पत्तों के रस का मिश्री मिलाकर शरबत पिलायें। ३-५ दिन तक दिन में दो बार दे।

हकलाहट दूर करे
इसके पके फलों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन करने से हकलाहट दूर होती है और वाणी में सुधार होता है।

दमा की बीमारी दूर करे
इसके फलों का चूर्ण और छाल सम भाग में लेने से दमा में लाभ होता है।



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