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सांस की गंध से पता लगाइये बीमारी के लक्षण
यह बात अटपटी जरूर लग सकती है लेकिन सच है। सांस लेने के तरीके से लेकर सांसों में आने वाली महक से आपको स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में पता चल सकता है। इन दिनों, चिकित्सा जगत में भी डॉक्टर्स, सांसों से बीमारी को जानने में काफी सफल हुए हैं।
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सांसों में जो भी महक या बदबू आती है या व्यक्ति जिस तरीके से सांस को लेता या छोड़ता है, अगर उसे सही ढंग से ऑब्जर्व किया जाएं, तो पता लग जाएगा कि उसे क्या समस्या है।
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जैसे- जब सांस लेने पर गले से छाती तक चिडि़या बोलने की आवाज लम्बे समय से आ रही हों, तो व्यक्ति को ब्रोन्काईटिस या अस्थमा की शिकायत हो सकती है।

मछली सी बदबू:
अगर मुंह से मछली सी बदबू आती है तो इसका मतलब है कि रक्त में अमोनिया की मात्रा काफी ज्यादा है। अमोनिया एक प्रकार का टॉक्सिक होता है जो यूरिन के रास्ते से बाहर निकल जाता है लेकिन जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती हैं तो यह बाहर नहीं निकल पाता है और मछली की तरह बदबू देता है।

एसिड रिफ्लेक्स:
कभी-कभार पेट में एसिड की समस्या ज्यादा हो जाती है, ऐसे में डकार के साथ गले में खट्टा सा एसिड आ जाता है, जो कि सांसों में एसिड जैसी बदबू ला देता है।

फेफड़ों में संक्रमण:
अस्थमा, ब्रोन्काईटिस, साइनस आदि समस्याएं होने पर सांस लेने पर जोर देना पड़ता है और सांस छोड़ने पर हल्की सी बदबू आती है, क्योंकि फेफड़ें में बैक्टीरिया संक्रमण हो जाता है।

मोटापा:
हाल ही में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि आप भविष्य में मोटे होगें या नहीं, इसका पता सांसों से लगाया जा सकता है। जिन लोगों की सांस में उच्च सांद्रता में हाईड्रोजन और मेथेन पाया जाता है, उनके मोटे होने के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं।

अजीब सी बदबू:
जिन लोगों को डायबटीज की शिकायत होती है उनके सांस छोड़ने पर आपको अजीब सी बदबू लगेगी, वह सामान्य बदबूदार सांसों की तरह नहीं ही होती है। क्यूंकि जब डायबटीज काफी ज्यादा बढ़ जाती है तो मसस्ल्स प्रोटीन और फैट टूटने लगते हैं और इससे बॉडी में किटोन घुलने लगती है और रक्त में भी बहुत सारी प्रक्रियाएं एक साथ शुरू हो जाती हैं। ऐसे में सांसों में असामान्यता आना स्वाभाविक है।

एलर्जी:
छाती में जकड़न होना और नाक में भारीपन लगना, पानी सा भरा रहना आदि अगर हमेशा किसी व्यक्ति को रहता है तो उसे एलर्जी की समस्या है, एलर्जी की समस्या होने पर मुंह से बुरी बदबू आती है, क्योंकि मुंह में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है।

दिल का फेल होना:
सांसों का विश्लेषण करके जाना जा सकता है कि व्यक्ति का जीवन में कभी हार्ट फेल होगा या नहीं। इस तकनीकी को ब्रेथ प्वाइंट कहते हैं।



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