Latest Updates
-
सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से दूर होंगी ये 5 समस्याएं, जानें इसे बनाने का तरीका -
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
फैटी लिवर में कौन सा योग करें? जानें लिवर को साफ और मजबूत रखने के लिए योगासन -
May 2026 Vrat Tyohar: वट सावित्री, शनि जयंती सहित मई माह में पड़ रहे हैं कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट -
Swapna Shastra: सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का क्या मतलब होता है? जानें ये शुभ होता है या अशुभ -
Bael Juice Benefits: गर्मियों में रोजाना पिएं एक गिलास बेल का जूस, सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे -
Who Is Divyanka Sirohi: कौन हैं एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही? जिनका 30 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हुआ निधन -
Kedarnath Yatra 2026: केदारनाथ यात्रा आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन से हेलीकॉप्टर बुकिंग तक जानें सभी जरूरी नियम -
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह करें केले के छिलके का इस्तेमाल, कुछ ही दिनों में घुटनों तक लंबे हो सकते हैं बाल -
दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट
क्या बुखार में योगा करना उचित है?
ऐसा में आज हम आपको कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहें जिन्हे आप बुखार के दौरान भी कर सकते हैं।
बदलते मैसम में अक्सर लोगों को बुखार हो जाता है। जिसकी वजह से आप अपने आपको कमजोर और बेहद थका हुआ मेहसूस करते हैं।
ऐसा में आज हम आपको कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहें जिन्हे आप बुखार के दौरान भी कर सकते हैं। इसमें कुछ सांस को अंदर बाहर छोड़ने के आसन हैं, जिससे शरीर में WBCs तेजी से बनने लगती हैं। तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही योग के आसन जिनसे भुखार के लक्षणों को ठीक किया जा सकता है।

ए) शीतली प्राणायाम
इस योग को शीतली प्राणायाम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आसन को करने से शरीर में ठंडक यानि कि शीतलता आने लगती है। शीतली प्राणायाम इंसान के शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है, क्योंकि इससे तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है जिससे भुखार ठीक होता है।

ए) शीतली प्राणायाम करने की विधि
- सबसे पहले आप जमीन पर कंबल या दरी बिछा लें। अब सुखासन व पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं।
- कमर, पीठ, रीढ और गर्दन एक सीध मे हो।
- शांत भाव से बैठे रहे।
- फिर अपनी जुबान को बाहर की ओर निकालें।
- अब अपनी जीभ के किनारों को उपर की उठाकर मोड़ लीजिए।
- इस तरह से आपके जुबान की आकृति कौए की चोंच जैसी बन जाती है।
- अब लंबी व गही सांस के जरिए पेट में कंठ तक वायु को भर लें।
- अब अपनी जुबान को अंदर करके अपने मुंह को बंद कर लें। जितनी देर हो सकता है उतनी देर तक एैसा करें।
- अब अपने दोनों नथुनों से रेचक करके वापस आराम कीजिए।

बी) अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम विलोम प्राणायम को नाड़ी शोधक प्राणायम के नाम से भी जान जाता है। इसे नियमित रूप से करने पर शरीर की सारी नाडि़यां शुद्ध व निरोग रहती हैं। इसके अलावा इस आसान को करने से सर्दी, जुकाम, भुखार व दमा में भी काफी राहत मिलती है।

अनुलोम विलोम प्राणायम करने की विधि
- अपने पैरों के मोड़ कर सुखासन, सिद्धासन या फिर वज्रासन में बैठें।
- सबसे पहले हाथो की उंगलियो की सहायता से नाक का दाया छिद्र बंद करें व बाये छिद्र से लंबी सांस लें।
- इसके पश्चात बाये छिद्र को बंद करके, दाये वाले छिद्र से लम्बी सांस को छोड़े।
- इस प्रक्रिया को कम से कम 10-15 मिनट तक दोहराइए।
- सांस लेते समय आपको अपना ध्यान दोनो आँखो के बीच मे स्थित आज्ञा चक्र पर एकत्रित करना होता है।

सी) कपालभाती प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम करने से व्यक्ति के चहेरे पर चमक आती है। और इस प्राणायाम से कई प्रकार के जटिल रोग दूर होते हैं और स्वस्थ व्यक्ति इस अभ्यास को प्रति दिन करता रहे तो वह जीवनभर निरोगी रहता है।

ए) अधो मुखा स्वानासन आसन
इस आसन को करने से शरीर में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं पूरे शरीर में फैलती हैं साथ ही इससे शरीर की गन्दगी भी साफ़ होती है।
- अधो मुखा स्वानासन आसन करने की विधि
- ताडआसन यानी सीधे खड़े हो जायें
- अब आगे की ओर झुके और अपने दोनों हाथों को ज़मीन पर रखें
- पर्वत मुद्रा में रह कर श्वास को अंदर लें और बहार छोड़ें।
- इस प्रक्रिया को 5 मिनट तक करें

बी) मत्स्यसन या मछली मुद्रा
मत्स्यासन दो शब्दों के मेल से बना है। पहला मत्स्य और दूसरा आसन। मत्स्य का अर्थ होता है मछली। इस आसन को करते वक्त शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, इसलिए ही इसका नाम मत्स्यासन रखा गया है। इस आसन को करने से सेहत और सौंदर्य दोनों में फायदा मिलता है।

मत्स्यसन आसन करने की विधि
- मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम पद्मासन में बैठ जाए।
- अब पीछे की और झुखे और लेट जाये।
- फिर अपने दोनों हाथो को एक दूसरे से बांधकर सिर के पीछे रखे और पीठ के हिस्से को ऊपर उठाकर गर्दन मोड़ते हुए सिर के उपरी हिस्से को जमीन पर टिकाए।
- अब अपने दोनों पैर के अंगूठे को हाथों से पकडे और ध्यान रहे की कोंहनिया जमीन से सटी हुई हो।
- एक से पांच मिनिट तक अभ्यास करे।
- इस स्थिति में कम से कम 5 सेकंड तक रुके और फिर पूर्व अवस्था में वापिस आ जाये।
- यह आसन को करते समय श्वसन की गति नियमित रखे, और 5 मिनट तक इस योग क्रिया का अभ्यास कर सकते है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन
अर्धमत्स्येन्द्रासन से मेरूदण्ड स्वस्थ रहने से यौवन की स्फूर्ति बनी रहती है। रीढ़ की हड्डियों के साथ उनमें से निकलने वाली नाडियों को भी अच्छी कसरत मिल जाती है। पेट के विभिन्न अंगों को भी अच्छा लाभ होता है

अर्ध मत्स्येंद्रासन करें की विधि
- बैठकर दोनों पैर लंबे किए जाते हैं।
- इसके बाद बाएँ पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी गुदाद्वार के नीचे जमाएँ।
- अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर खड़ा कर दें और बाएँ पैर की जंघा से ऊपर ले जाते हुए जंघा के पीछे जमीन पर रख दें।
- अब बाएँ हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करके अर्थात घुटने को बगल में दबाते हुए बाएँ हाथ से दाहिने पैर का अँगूठा पकड़ें।
- अब दाहिना हाथ पीठ के पीछे से घुमाकर बाएँ पैर की जाँघ का निम्न भाग पकड़ें।
- सिर दाहिनी ओर इतना घुमाएँ कि ठोड़ी और बायाँ कंधा एक सीधी रेखा में आ जाए। नीचे की ओर झुकें नहीं।
- छाती, गर्दन बिल्कुल सिधी व तनी हुई रखें।
विशेषज्ञों की राय के साथ
-मंजुनाथ पुजारी, सीनियर आर्ट ऑफ़ लिविंग योग शिक्षक
-योगेश्वर गौर, आर्ट ऑफ़ लिविंग योग ट्रेनर
-राज कुमार शर्मा, आर्ट ऑफ़ लिविंग योग शिक्षक



Click it and Unblock the Notifications