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क्या नसबंदी कराने के बाद कम हो जाती है पुरुषों में सेक्स पॉवर?
जब बात फैमिली प्लानिंग की आती है तो हमेशा से ही महिलाओं को इसका जिम्मा सौंप दिया जाता है। कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स खानी हो या नसबंदी करवानी हो इन कामों के लिए महिलाओं को आगे कर दिया जाता है। भारत में देखा गया है कि पुरुष हमेशा कंडोम इस्तेमाल और नसबंदी करवाने से बचते आए है।
इसलिए हमारे देश में नसबंदी करवाने वाले पुरुषों की तादाद ना के बराबर हैं। कभी आपने सोचा है कि पुरुष नसबंदी करवाने से क्यूं बचते हैं? दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि ज्यादात्तर पुरुष सोचते है कि नसबंदी करवाने से उनकी मर्दाना शक्ति यानी सेक्स पॉवर में गिरावट आ जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
पुरुष नसबंदी पर उनके सेक्स पॉवर पर कोई असर नहीं होता है। सावधान..! हर मर्द को मालूम होना चाहिए इन खतरनाक सेक्स डिसीज के बारे में

कई पुरुष दर्द के वजह से नहीं कराते है नसबंदी
नसबंदी के दौरान पुरुषों को दर्द नहीं होता है। लेकिन ज्यादतर पुरुषों को यह असहज लगता है। एनेस्थीसिया देते समय इंजेक्शन लगाने के दौरान, इंजेक्शन वाला दर्द होता है।

नसबंदी के बाद सीमेन निकलता है लेकिन स्पर्म नहीं
नसबंदी में शुक्राणु वाहिनी नालिकाओं को बांध दिया जाता है। जिससे शुक्राणु शरीर के बाहर नहीं जा पाते हैं ये शरीर में ही घुलकर रह जाते हैं। इस प्रकार शरीर के स्वस्थ रहने भी सहायक होते है। इससे पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अमेरिका के अनुसंधानकर्त्ताओं का कहना है कि नसबंदी कराए हुए व्यक्तिओं का स्वास्थ्य दूसरे व्यक्तियों की तुलना में अधिक अच्छा होता है वे अधिक दिन जीवित रहते हैं।

सेक्स लाइफ नहीं होती है इफेक्टिव
नसबंदी के बाद कुछ महीनों तक टेस्टिकल में आपको हल्का दर्द हो सकता है। लेकिन सेक्स में रुचि, इरेक्शन क्षमता, या स्खलन पर कोई प्रभाव नहीं होता।

डेली रुटीन पर पहले जैसे ही फिट
नसबंदी के बाद एक दो दिन का आराम बहुत जरुरी होता है। ज्यादातर पुरुष 2-3 दिन बाद काम पर जा सकते हैं। नार्मल फिजिकल एक्टिविटीज जैसे की भागना, वर्क आउट, भारी समान उठाना आदि एक सप्ताह रुक कर शुरु किए जा सकते है।

पुरुष और महिला नसबंदी के बीच अंतर
किसी महिला में नसबंदी करने के लिए फालोपियन ट्यूब्स को काट दिया जाता है। इसे करने के लिए जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है।
पुरुष नसबंदी में वासडिफरेंस ट्यूब्स को काट कर सील कर दिया जाता है। यह कोई बहुत लम्बा ऑपरेशन नहीं होता और लोकल एनेस्थीसिया दे कर लिया जाता है। इसे आउट पेशेंट सर्जरी के दौरान किया जाता है।
महिला नसबंदी की तुलना में, पुरुष नसबंदी सरल और अधिक प्रभावी है, इसमें कम जटिलताएं हैं और बहुत कम खर्चीली हैं।

कब से प्रभावी होती है नसबंदी
पुरुष नसबंदी करवाते ही एक तुरंत प्रभावी न हीं हो जाती है। यह तरीका प्रभावी होने में कई महीनों ले सकता है। क्योंकि ट्यूब्स में स्पर्म्स रह सकते हैं जो वीर्य के साथ निकलते हैं। इस समय के दौरान, कोई और प्रोटेक्शन की जानी चाहिए नहीं तो महिला गर्भवती हो सकती है। कम से कम तीन महीने के बाद यह तरीका प्रभाव हो सकता है। तीन महीने के बाद स्पर्म काउंट के लिए किये जाने वाले टेस्ट से पता किया जा सकता हैं की स्पर्म, सीमेन में मौजूद है या नहीं।सेक्स से पहले चैक कर लें, कहीं आपका कंडोम एक्सपायर तो नहीं हो गया?

सेक्स प्लेजर मिलता है
विशेषज्ञों की माने तो नसबंदी कराने से किसी प्रकार की नपुसंकता या नामर्दी नहीं आती है बल्कि इ ससे शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती हे। अनचाहें गर्भ की चिंता दूर हो जाती है तो यौन संबंध बनाने में पहले से ज्यादा प्लेजर मिलता है।



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