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नवरात्रि 2018, क्यों उपवास के दौरान लोग त्याग देते है अनाज?

नवरात्र हिंदूओं के लिए मुख्य त्योहारों में से एक है, बहुत से लोग इस दिन उत्साह और त्याग की भावना से व्रत किया करते है। उत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में इन 9 दिनों का बहुत ही महत्व होता है। जहां कुछ लोग 9 दिन तक व्रत करते है वहीं कुछ लोग सिर्फ पहले और आखिरी दिन व्रत करना पसंद करते हैं।
इस 9 दिन कई लोग लहुसन-प्यास और शराब का सेवन करना भी बंद कर देते है। इस दौरान व्रत करने वाले लोग सादे नमक की जगह सेंधा नमक का सेवन करते है। क्या आपने कभी सोचा है आखिर क्यों नवरात्रियों के उपवास के दौरान लोग अनाज का त्यागकर सिर्फ फलाहार पर रहते है, आइए जानते है।

आध्यात्मिक मत
नवरात्रियों के 9 दिन तक व्रत करना और मां की पूजा करने से माना जातो है कि इससे हम तन और मन से शक्ति और करीब पहुंच जाते है। कई संस्कृतियों में मानना है कि व्रत करने से आध्यात्मिक शुद्धिकरण होता है और इच्छाशक्ति दृढ़ होती है। व्रत को आत्मसात और अनुकरण से जोड़कर भी देखा जाता है जिससे आत्म-अनुशासन बढ़ता है। जो लोग इन खास दिनों में व्रत को छोड़कर फलाहार भी रहते है। वो आध्यात्मिक तरीके से खुद को ईश्वर के करीब महसूस करते हैं। कई लोग तो इस दिन बिना कुछ खाएं और पीएं व्रत रखते है। जिसे निर्जला व्रत कहा जाता है।

वैज्ञानिक मत
जो लोग धर्म और विज्ञान दोनों को साथ लेकर चलते है उन लोगों का इन खास दिन अन्न त्यागने का तर्क थोड़ा अलग होता है। हालांकि हिंदू धर्म में एल्कोहल और मांसाहार को इन धार्मिक दिनों में सेवन करने को बुरा माना जाता है। इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक मत है। जैसे कि आपको मालूम है कि नवरात्रियां साल में दो बार मनाई है। आपने क्या इस बात पर गौर किया है कि इस दौरान मौसम का रुख बदल रहा होता है। आयुर्वेदिक नजरिए से इन दिनों अंडा, मांस, अनाज, एल्कोहल, प्याज और लहुसन जैसी चीजों का सेवन करने से शरीर नकरात्मक शक्तियों को अवशोषित करने लगती है। इस समय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत ही कम हो जाती है जिस वजह से हम बीमारियों से घिर सकते है। इसलिए इस समय खाने को अवॉइड ही करना चाहिए।

क्या खाना चाहिए
व्रत के दौरान हमारे शरीर को नियमित खानपान की रुटीन से एक ब्रेक मिलता है। हम हल्का भोजन खाना पसंद करते है जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही आसानी से पच जाता है। अनाज खासकर साबूत अनाज जैसे बाजरा, गेंहू और आदि। इन्हें पचाना बहुत मुश्किल होता है और इससे पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है। इसलिए व्रत के दौरान ज्यादा से ज्यादा डेयरी प्रॉडक्ट, फल, जूस और हल्की सब्जियों का सेवन करना फायदेमंद होता है।

गेंहू की जगह कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और ये ग्लूटेन फ्री होता है। लोग व्रत में कुट्टू का आटा खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फास्फोरस से भरपूर मात्रा में होता है।

प्याज और लहुसन का सेवन नहीं
नवरात्रि के कई नियमों में से एक ये है कि इन दिनों लहसुन और प्याज के बिना खाना बनाया जाता है और घर का कोई भी सदस्य इन्हें नहीं खाता है। लहुसन और प्याज तामसिक भोजन में आते है। जो मन और शरीर दोनों को सुस्त बनाता है। इन्हें पचने में काफी समय लगता है और इसमें अंडा, मांस, मछली और सभी तरह का ऐसा खाना या पीना जिससे नशा हो सब आता है। इसके अलावा, बासी खाना भी तामसिक भोजन होता है इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए।

नमक की जगह सेंधा नमक
हम में से कई लोग व्रत को लाइफस्टाइल, आध्यात्म और हेल्थ से जोड़कर देखते है। कई लोगो को लगता है कि व्रत करने से एक तरह से बॉडी डिटॉक्स हो जाती है। इसलिए लोग प्रोसेस्ड फूड और नियमित नमक से किनारा करके नेचुरल और असंसाधित सेंधा नमक का सेवन करते हैं।



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